जरूरत की खबर- इस दिवाली कम बजट में सजाएं घर:पुरानी चीजों से घर को दें नया फेस्टिव लुक, इंटीरियर डिजाइनर से जानें आसान टिप्स
दिवाली पर घर सजाने के लिए बाजार में एक से बढ़कर एक डेकोरेटिव आइटम मिलते हैं, लेकिन इन्हें खरीदने में अच्छा-खासा पैसा खर्च हो जाता है। ऐसे में सवाल है कि कम खर्च में घर को खूबसूरत और फेस्टिव लुक कैसे दिया जाए? इसके लिए घर में रखे पुराने दुपट्टे, दीये, कांच की बोतलें और झालरें भी सजावट के काम आ सकती हैं। थोड़ी क्रिएटिविटी से इन्हें नया लुक देकर घर के अलग-अलग कोनों को आकर्षक बनाया जा सकता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में बात करेंगे कि कम बजट में घर को फेस्टिव लुक कैसे दें। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- दिपांशी जोशी, सीनियर इंटीरियर डिजाइनर, आइरिस स्टूडियोज, बेंगलुरू सवाल- घर सजाने से पहले बजट और जरूरतें कैसे तय करें? जवाब- कम बजट में घर सजाने के लिए सबसे पहले तय करें कि कितना खर्च करना है और घर के किस हिस्से को सजाने से सबसे ज्यादा बदलाव दिखेगा। पूरा घर एक साथ सजाने की बजाय मुख्य दरवाजे, लिविंग रूम और पूजा की जगह को प्रिऑरिटी दें। बजट तय करें पुरानी चीजें रीयूज करें सिर्फ जरूरी सामान खरीदें गैरजरूरी सजावटी चीजें खरीदने की बजाय मौजूदा सामान को नए तरीके से इस्तेमाल करें। सवाल- अगर खरीदारी का बजट ही न हो तो घर को नया लुक कैसे दें? जवाब- घर में मौजूद चीजों को थोड़े क्रिएटिव तरीके से इस्तेमाल करके बिना पैसे खर्च किए भी फेस्टिव लुक दिया जा सकता है। पुराने दुपट्टे से सजाएं टेबल दीयों से बनाएं सेंटर पीस कांच की बोतल को बनाएं फूलदान पुरानी झालरों को सही जगह लगाएं कुशन कवर बदलकर रंग जोड़ें सवाल- घर की दीवारों को बिना पेंट कराए फेस्टिव लुक कैसे दें? जवाब- घर में पहले से मौजूद चीजों की मदद से भी दीवारों को सजा सकते हैं। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- फोटो फ्रेम की नई अरेंजमेंट करें दुपट्टे से बनाएं बैकड्रॉप पुरानी सजावटी प्लेटें लगाएं पेपर डेकोरेशन बनाएं सवाल- पुराने पर्दे, चादर और दुपट्टे से सजावट कैसे करें और कलर थीम कैसे चुनें? जवाब- पहले कमरे में मौजूद पर्दों, सोफे और दीवारों के रंग देखें। फिर उनसे मेल खाते दो या तीन रंग चुनें। पारंपरिक लुक सॉफ्ट लुक मेज की सजावट कुशन और पर्दे सवाल- बिना महंगी लाइटिंग खरीदे घर में फेस्टिव माहौल कैसे बनाएं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- घर के प्रवेश द्वार, पूजा की जगह और डाइनिंग टेबल को कम खर्च में कैसे सजाएं? जवाब- घर में मौजूद चीजों को व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करें। प्रवेश द्वार पूजा की जगह डाइनिंग टेबल पुरानी ट्रे और जार सवाल- पुराने कांच के जार, बोतल और ट्रे से सजावट कैसे करें? जवाब- दिवाली की सजावट के लिए खाली जार, कांच की बोतलें और पुरानी ट्रे को फेंकने की बजाय उनसे सुंदर डेकोर पीस बना सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- अब आइए इसे बनाने का तरीका समझते हैं- रंगीन जार लैंटर्न बनाएं ध्यान दें: खुली लौ वाला दीया जार के अंदर न रखें। बोतल को बनाएं डिजाइनर फूलदान पुरानी ट्रे को दें फेस्टिव लुक जार से हैंगिंग डेकोर बनाएं पुराने जार पर बनाएं रंगीन डिजाइन बचे हुए फूलों से बनाएं फ्लोटिंग फ्लावर डेकोर पुरानी चूड़ियों से बनाएं डेकोरेटिव कैंडल होल्डर दिवाली की सजावट में हर खाली जगह भरना जरूरी नहीं है। एक फोकल पॉइंट, दो-तीन मेल खाते रंग और सही रोशनी पूरे घर को ज्यादा प्रीमियम दिखा सकती हैं। सवाल- क्या रंगोली बनाने के लिए महंगे रंग और स्टेंसिल खरीदना जरूरी है? जवाब- नहीं, छोटी और सरल रंगोली भी सुंदर दिख सकती है। इसके लिए घर में उपलब्ध सामग्री इस्तेमाल कर सकते हैं। सवाल- छोटी बालकनी या घर के किसी कोने को फेस्टिव लुक कैसे दें? जवाब- छोटी जगह को सजाने के लिए फर्श पर ज्यादा सामान रखने की बजाय उपलब्ध जगह का सही इस्तेमाल करें। सवाल- घर सजाते समय किन गलतियों से बचें, ताकि बजट न बिगड़े? जवाब- सजावट में कई बार छोटी-छोटी खरीदारी से खर्च बढ़ जाता है। इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखें- …………………………… ग्राफिक- महेंद्र वर्मा ……………………………… यह खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- दिवाली का बजट कैसे बनाएं:त्योहार मनाने और बोनस खर्च करने से पहले जरूरी है प्लानिंग, फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह दिवाली पर सैलरी, बोनस और बचत का बड़ा हिस्सा त्योहार की तैयारियों में खर्च हो जाता है। खरीदारी के दौरान छोटे-छोटे खर्च ज्यादा नहीं लगते, लेकिन त्योहार खत्म होते ही स्कूल फीस, राशन, बिजली बिल और EMI जैसे जरूरी भुगतान सामने आ जाते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Karwa Chauth 2026: प्रेम, विश्वास और अखंड सौभाग्य का पर्व है करवा चौथ
भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में करवाचौथ का विशेष स्थान है। यह केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण, विश्वास और दांपत्य जीवन की मंगलकामना का प्रतीक है। उत्तर भारत में विशेष रूप से लोकप्रिय यह पर्व पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना के साथ मनाया जाता है। बदलते समय में करवाचौथ का स्वरूप भी व्यापक हुआ है और अब अनेक पति भी अपनी पत्नी के साथ व्रत रखकर परस्पर प्रेम और समान भागीदारी का संदेश देते हैं।
कब मनाया जाता है करवाचौथ?
करवाचौथ का व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। यह पर्व सामान्यतः अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है। हालांकि, कुछ पंचांगों में मास-गणना की परंपरा के कारण इसे आश्विन कृष्ण चतुर्थी से भी जोड़ा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 29 अक्टूबर को पड़ रहा है।
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इस दिन विवाहित महिलाएं प्रातः सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और उसके बाद चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखने की परंपरा निभाती हैं। शाम को भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।
व्रत के नियम और पूजन विधि
करवाचौथ के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां, मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। इसके बाद व्रती महिलाएं दिनभर भोजन और जल का त्याग करती हैं। हालांकि, निर्जला व्रत धार्मिक परंपरा है, अनिवार्यता नहीं; स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
शाम को महिलाएं लाल, गुलाबी या अन्य शुभ रंगों के वस्त्र पहनकर सोलह शृंगार करती हैं। पूजा के लिए करवा यानी मिट्टी या धातु के पात्र में जल भरकर रखा जाता है। भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। रोली, अक्षत, दीपक, पुष्प, मिठाई और सुहाग सामग्री अर्पित करने के बाद करवाचौथ की कथा सुनी जाती है। रात में चंद्रमा निकलने पर अर्घ्य दिया जाता है और छलनी से चंद्र दर्शन करने के बाद पति का चेहरा देखा जाता है। इसके पश्चात पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।
करवाचौथ की पौराणिक कथा
करवाचौथ की सबसे प्रचलित कथा वीरवती नामक एक पतिव्रता स्त्री की है। वीरवती अपने सात भाइयों की इकलौती बहन थी। विवाह के बाद उसने पहली बार करवाचौथ का व्रत रखा। भूख-प्यास से व्याकुल बहन की हालत देखकर उसके भाइयों ने छलपूर्वक एक पेड़ के पीछे अग्नि जलाकर उसे चंद्रमा निकलने का आभास कराया। वीरवती ने उसे चंद्रमा समझकर व्रत खोल लिया। कथा के अनुसार, इसके बाद उसे पति के संकटग्रस्त होने का समाचार मिला। वह अत्यंत दुखी हुई और पूरे श्रद्धाभाव से देवी की आराधना करने लगी। अंततः उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उसके पति को पुनः जीवन प्रदान किया। इस कथा का संदेश है कि श्रद्धा, धैर्य और संकल्प जीवन की कठिन परिस्थितियों में संबल बनते हैं।
धार्मिक और सामाजिक महत्त्व
पौराणिक मान्यताओं में माता पार्वती को अखंड सौभाग्य और आदर्श दांपत्य का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के माध्यम से वैवाहिक सुख, प्रेम और पारिवारिक समृद्धि की कामना की जाती है। चंद्रमा को अर्घ्य देना मन की शांति और शुभता से भी जोड़ा जाता है।
वास्तव में करवाचौथ का सबसे सुंदर पक्ष पति-पत्नी के बीच परस्पर विश्वास, सम्मान और समर्पण है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि दांपत्य जीवन केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि एक-दूसरे की चिंता, सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव से मजबूत होता है। समय के साथ बदलती परंपराओं के बीच करवाचौथ आज भी भारतीय संस्कृति में प्रेम और पारिवारिक एकता का उत्सव बना हुआ है।
- शुभा दुबे
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