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बुलंदशहर की बेटी सबा हैदर ने अमेरिका में रचा इतिहास, इलिनॉय के 84वें डिस्ट्रिक्ट से जीता चुनाव

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के लिए गर्व की खबर सामने आई है. जिले के औरंगाबाद कस्बे की मूल निवासी सबा हैदर ने अमेरिका के इलिनॉय राज्य में हुए मध्यावधि चुनाव में जीत दर्ज की है. उन्होंने इलिनॉय के 84वें डिस्ट्रिक्ट से स्टेट रिप्रेजेंटेटिव का चुनाव जीतकर अमेरिकी राजनीति में एक नई उपलब्धि हासिल की. रिपोर्ट के मुताबिक, सबा को करीब 70 प्रतिशत वोट मिले और उन्होंने अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी ब्रायन स्कोपा को बड़े अंतर से हराया.  

बुलंदशहर के औरंगाबाद से अमेरिका तक का सफर

सबा हैदर मूल रूप से बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद कस्बे की रहने वाली हैं. वह पिछले करीब 20 वर्षों से अपने परिवार के साथ अमेरिका के इलिनॉय राज्य में रह रही हैं. विदेश में रहते हुए उन्होंने स्थानीय समुदाय के बीच अपनी पहचान बनाई और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई.

राजनीति में आने से पहले सबा हैदर स्थानीय स्तर पर सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों से जुड़ी रहीं. वह ड्यूपेज काउंटी बोर्ड की सदस्य के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं. इस अनुभव ने उन्हें स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधित्व के क्षेत्र में काम करने का अवसर दिया.  

84वें डिस्ट्रिक्ट में ब्रायन स्कोपा को हराया

इलिनॉय के 84वें डिस्ट्रिक्ट में सबा हैदर का मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार ब्रायन स्कोपा से था. चुनाव में सबा ने करीब 70 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की. अमेरिकी मीडिया के शुरुआती चुनावी आंकड़ों में भी इस सीट पर सबा को स्पष्ट बढ़त के साथ विजेता बताया गया. 

यह सीट पहले डेमोक्रेटिक पार्टी की स्टेफनी किफोविट के पास थी, जिन्होंने लगातार कई कार्यकाल तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. उनके चुनाव नहीं लड़ने के बाद इस सीट पर नए प्रतिनिधि का चुनाव हुआ. सबा की जीत के साथ अब वह इलिनॉय की स्टेट हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 84वें डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करेंगी.  

परिवार में खुशी, पिता ने बताया पूरे भारत की उपलब्धि

सबा हैदर की जीत की खबर से बुलंदशहर के औरंगाबाद कस्बे में खुशी का माहौल है. उनके पिता सैयद अली हैदर ने बेटी की सफलता पर प्रसन्नता जताते हुए इसे पूरे भारत के लिए गर्व की उपलब्धि बताया. परिवार के अन्य सदस्य फिलहाल गाजियाबाद में रहते हैं. सबा के पति अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं. 

सबा हैदर की यह सफलता बताती है कि भारतीय मूल के लोग विदेशों में भी सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं. बुलंदशहर के एक छोटे कस्बे से निकलकर अमेरिका की राज्य विधायिका तक पहुंचना उनके लंबे सफर और राजनीतिक प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

 

 

 

 

 

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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गहराया, इस साल 1,269 बच्चों की मौत

Bangladesh Measles Out Break: स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के मुताबिक, ये मौतें बुधवार सुबह तक के पिछले 24 घंटों के दौरान दर्ज की गईं. समाचार एजेंसी यूएनबी (यूएनबी) की रिपोर्ट के अनुसार, हाल में हुई छह मौतों को संदिग्ध खसरा मामलों के रूप में दर्ज किया गया है. रिपोर्टों के मुताबिक, खसरे से पुष्टि की गई मौतों की संख्या 105 पर बनी हुई है, जबकि संदिग्ध मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1,164 हो गया है.

डीजीएचएस ने बताया कि 24 घंटे के दौरान खसरे के 1,325 नए संदिग्ध मामले सामने आए. इसके बाद कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 2,34,148 हो गई है. इसी अवधि में 77 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए, जिससे कुल पुष्ट मामलों की संख्या 24,150 तक पहुंच गई.

पिछले महीने 'द संडे गार्डियन' से बातचीत में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खसरे की इस 'महामारी' के लिए सरकारी लापरवाही और दशकों पुराने टीकाकरण तंत्र के कमजोर पड़ने को जिम्मेदार ठहराया था.

टीकाकरण में रुकावट और सियासी आरोप

हसीना ने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय लिए गए राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों के कारण वैक्सीन की खरीद प्रभावित हुई, जिससे टीकाकरण में बड़ा अंतर पैदा हो गया. उन्होंने दावा किया कि मार्च 2026 में बांग्लादेश में खसरा-रूबेला वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया था. इसके बाद टीकाकरण की दर में तेज गिरावट आई. उनका आरोप था कि सरकार समय पर अतिरिक्त टीकाकरण अभियान शुरू करने में असफल रही.

शेख हसीना ने मौजूदा तारीक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार की भी आलोचना की. उनका कहना था कि जब बीमारी की गंभीरता साफ दिखाई देने लगी, तब भी अधिकारियों ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए. उन्होंने कहा, "एक ऐसी बीमारी से, जिसे रोका जा सकता है, एक हजार से ज्यादा बच्चों की मौत होना कोई सामान्य प्रशासनिक विफलता नहीं है."

पूर्व प्रधानमंत्री ने वैक्सीन की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने, कमजोर और जोखिम वाले समुदायों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाने, रियल-टाइम बीमारी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, बच्चों के स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाने और वैक्सीन खरीद तथा टीकाकरण में हुई कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की.

प्रशासन की प्रतिक्रिया और जमीन की हकीकत

वहीं, डीजीएचएस में रोग नियंत्रण विभाग के पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद ने पिछले महीने कहा था कि अप्रैल में यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद दोबारा शुरू होने और आपातकालीन टीकाकरण अभियान चलाने के बावजूद महामारी को जल्द नियंत्रित करना आसान नहीं होगा. बांग्लादेश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार के अनुसार, बीमारी के तेजी से फैलने की वजह से इसके प्रभाव को कम करने में अभी समय लग सकता है.

यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में फिर भड़की हिंसा, कपड़ा मजदूरों का उग्र प्रदर्शन; आगजनी और हिंसा से ढाका में तनाव

DISCLAIMER: पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.

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