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आईएसआई अफगानिस्तान में चीनी प्रोजेक्ट्स को बना रही निशाना, विशेषज्ञ ने दी चेतावनी

काबुल, 10 मार्च (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के एक प्रमुख सुरक्षा विशेषज्ञ ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अफगान इंटेलिजेंस एनालिस्ट और आतंक रोधी विशेषज्ञ अजमल सोहेल ने एक जानी-मानी अंतर्राष्ट्रीय मैगजीन को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) अफगानिस्तान में चीन के बुनियादी ढांचे और निवेश परियोजनाओं को निशाना बनाने की गतिविधियों में कथित तौर पर शामिल है।

काउंटर नार्को-टेररिज्म अलायंस जर्मनी के सह-संस्थापक और सह-अध्यक्ष सोहेल ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम इस्लामाबाद की इस चिंता को दिखाता है कि काबुल के साथ बीजिंग का बढ़ता जुड़ाव, जिसमें माइनिंग ऑपरेशन से लेकर विदेशी निवेश और संभावित ट्रांजिट कॉरिडोर शामिल हैं, पाकिस्तान के भू-राजनीतिक दबदबे को सीमित कर सकता है।

डिप्लोमैट पत्रिका को दिए साक्षात्कार में सोहेल ने कहा, हाल के समय में अफगानिस्तान में चीनी निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। उनका आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे आईएसआई सक्रिय है। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों का उद्देश्य अफगानिस्तान में चीन की आर्थिक मौजूदगी को कमजोर करना और क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन को प्रभावित करना हो सकता है।

उन्होंने कहा, यह स्ट्रैटेजी इस्लामाबाद की इस चिंता को दिखाती है कि काबुल के साथ बीजिंग का बढ़ता सीधा जुड़ाव, खासकर माइनिंग, विदेशी निवेश और संभावित ट्रांजिट रूट्स के जरिए, पाकिस्तान के भू-राजनीतिक असर को कम कर सकता है। चीनी प्रोजेक्ट्स को कमजोर करके, आईएसआई बीजिंग को यह याद दिलाना चाहती है कि पाकिस्तान रीजनल कनेक्टिविटी के लिए एक जरूरी चौकीदार (खासकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर) बना हुआ है।

अफगान विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में चीन के कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें खनन, सड़क निर्माण और ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन परियोजनाओं को क्षेत्रीय विकास और आर्थिक स्थिरता के लिए अहम माना जाता है, लेकिन सुरक्षा चुनौतियों के कारण इन प्रोजेक्ट्स के सामने लगातार खतरा बना हुआ है।

विश्लेषक का मानना है कि अफगानिस्तान में चीन की बढ़ती आर्थिक भागीदारी को लेकर क्षेत्रीय भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। ऐसे में इन परियोजनाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई है। हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में विदेशी निवेश से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कुछ मामलों में विदेशी कर्मचारियों को भी निशाना बनाया गया।

उन्होंने आगे कहा, इस डॉक्ट्रिन का एक हिस्सा विदेशी टूरिस्ट और इन्वेस्टर पर गुरिल्ला-स्टाइल हमलों को बढ़ावा देना है, जिसमें चीनी नागरिकों को सिंबॉलिक टारगेट के तौर पर चुना जाता है। इसका मकसद चीनी वेंचर्स के आसपास इनसिक्योरिटी पैदा करना और बीजिंग की अफ़गानिस्तान में इंडिपेंडेंटली ऑपरेट करने की क्षमता को मुश्किल बनाना है।

सोहेल ने बताया कि आईएसआई का फोकस अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में वखान कॉरिडोर पर है, जो पाकिस्तान को बायपास करते हुए चीन के लिए एक वैकल्पिक ट्रेड रूट के तौर पर काम कर सकता है।

उन्होंने द डिप्लोमैट को बताया, अगर चीन अफगानिस्तान के जरिए प्रत्यक्ष इंफ्रास्ट्रक्चर लिंक बनाने में कामयाब हो जाता है, तो एक स्ट्रेटेजिक बिचौलिए के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका कमजोर हो जाएगी। इसलिए, आईएसआई की साजिश बीजिंग की निर्भरता को वापस पाकिस्तान की ओर मोड़ने, उसकी जियोइकोनॉमिक अहमियत को बनाए रखने और यह पक्का करने के लिए है कि सीपीईसी चीन की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के लिए मुख्य रास्ता बना रहे।

पाकिस्तान से वखान कॉरिडोर जा रहे हथियारों की खेप पकड़े जाने के बारे में पूछे जाने पर, सोहेल ने बताया कि तालिबान इंटेलिजेंस ने 21 फरवरी को तोरखम बॉर्डर पर लगभग 525 हथियारों और 27,000 राउंड गोला-बारूद का एक शिपमेंट रोका था। उन्होंने कहा कि ट्रकों में छिपाकर रखे गए हथियार, जो ओमारी रिफ्यूजी कैंप और आखिर में वखान कॉरिडोर जा रहे थे, तालिबान शासन के खिलाफ गुप्त ऑपरेशन में तेजी से बढ़ोतरी दिखाते हैं।

एक्सपर्ट ने बताया, इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स इस ऑपरेशन के लिए पाकिस्तान की आईएसआई और मिलिट्री इंटेलिजेंस को जिम्मेदार ठहराती हैं, जो अफगानिस्तान में तालिबान विरोधी ग्रुप्स और अलगाववादियों को हथियारों की सप्लाई का इंतजाम करती हैं। अफगानिस्तान इंडिपेंडेंस फ्रंट जैसे नए सक्रिय संगठन, साथ ही क्षेत्रीय समूह, आईएसकेपी, और दूसरे हथियारबंद गुटों को चीनी माइनिंग कंपनियों और विदेशी निवेशकों (खासकर वखान कॉरिडोर में) पर हमले करने के लिए हथियार दिए गए थे।

फिलहाल यह मुद्दा क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय निवेश से जुड़ी बहस को और तेज कर सकता है, क्योंकि अफगानिस्तान में स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए विदेशी निवेश को महत्वपूर्ण माना जाता है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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फर्जी पार्टनरशिप डीड से जमीन हड़पने का आरोप, मुंबई में चार लोगों पर FIR; तलाठी की भूमिका भी जांच के घेरे में

मुंबई में जमीन से जुड़े एक कथित फर्जीवाड़े ने पुलिस को भी हैरान कर दिया है। आरोप है कि एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की जमीन को हड़पने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर कर फर्जी पार्टनरशिप डीड तैयार की गई और उसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में नाम भी दर्ज करा लिए गए। मामले की शिकायत मिलने के बाद काशिमिरा पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता रवि कमलेश्वर पुजारी के अनुसार, कुछ समय पहले राजेश कुमार झा और विकास सिंह ने उनकी निष्क्रिय कंपनी किरण कंस्ट्रक्शन को खरीदने का प्रस्ताव रखा था। बातचीत के बाद एक समझौता हुआ, जिसमें यह साफ तौर पर तय किया गया कि कंपनी के नाम पर दर्ज वसई की करीब 16 एकड़ जमीन और गोरेगांव की लगभग 725 वर्ग मीटर जमीन पर अधिकार पुजारी परिवार का ही रहेगा।

कागजात दिखाने के बहाने ले लिए मूल दस्तावेज

शिकायत के मुताबिक, गोरेगांव की जमीन के लिए संभावित खरीदारों को कागजात दिखाने का बहाना बनाकर आरोपियों ने संपत्ति के मूल दस्तावेज अपने पास ले लिए। इसके बाद जब दस्तावेज वापस मांगे गए तो उन्हें लौटाने में लगातार टालमटोल की जाती रही। इसी दौरान कथित तौर पर एग्रीमेंट में से कुछ महत्वपूर्ण पन्ने हटाकर एक नई पार्टनरशिप डीड तैयार की गई। आरोप है कि इस दस्तावेज में कंपनी की संपत्तियों पर नए लोगों का अधिकार दिखाया गया।

नए पार्टनर जोड़कर कराया नामांतरण, कैसे हुआ खुलासा ? 

जांच में सामने आया कि बाद में एक और डीड तैयार कर मनोज कुमार सिंह और सुरेखा नारखेडे को कंपनी में पार्टनर के रूप में जोड़ा गया। इसी दस्तावेज के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव करवाया गया और जमीन के सातबारा (7/12) अभिलेख में उनके नाम दर्ज करा दिए गए।
पूरे घटनाक्रम का खुलासा तब हुआ जब आरोपियों ने इस जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की कोशिश की। जमीन खरीदने के इच्छुक व्यक्ति ने दस्तावेजों की जांच के दौरान पुजारी परिवार से संपर्क किया, जिसके बाद कथित फर्जीवाड़े की बात सामने आई और मामला पुलिस तक पहुंचा।

तलाठी की भूमिका पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में संबंधित तलाठी विक्रम बाड़ की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि दस्तावेजों की पूरी जांच किए बिना ही जमीन का नामांतरण कर दिया गया। इसे लेकर उनके खिलाफ भी अलग से शिकायत दर्ज कराई गई है और जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के खिलाफ अन्य स्थानों पर भी जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। काशिमिरा पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र कांबले ने बताया कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है और इसमें शामिल लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

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