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एटीएफ में इथेनॉल मिलाने की कोई योजना नहीं, भ्रामक दावों से बचें: नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने गुरुवार को विमान ईंधन (एविएशन टरबाइन फ्यूल या एटीएफ) में इथेनॉल मिलाने की खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने विमानन सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भ्रामक जानकारी फैलाने के खिलाफ भी आगाह किया।

केंद्रीय मंत्री की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है, जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया था कि सरकार विमान ईंधन में इथेनॉल मिलाने की योजना बना रही है। उन्होंने इस कदम को उड़ानों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बताया था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए राम मोहन नायडू ने कहा कि एटीएफ में इथेनॉल मिलाने संबंधी दावे पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना हैं।

उन्होंने कहा, ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। विमानन सुरक्षा से जुड़ी गलत जानकारी फैलाने से केवल हवाई यात्रियों के बीच अनावश्यक चिंता पैदा होती है। यात्रियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

नायडू ने आगे स्पष्ट किया कि इथेनॉल और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) दो अलग-अलग प्रकार के ईंधन हैं और इन्हें लेकर किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि एसएएफ एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित विमानन ईंधन है, जिसे अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) की मान्यता प्राप्त है। दुनिया के कई देश विमानन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए इसका उपयोग कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एसएएफ को विमान संचालन में उपयोग की मंजूरी मिलने से पहले कठोर परीक्षणों और वैश्विक सुरक्षा मानकों से गुजरना पड़ता है। इसकी गुणवत्ता और प्रदर्शन की व्यापक जांच की जाती है, जिसके बाद ही इसे विमान ईंधन के रूप में उपयोग के लिए स्वीकृति दी जाती है।

इस बीच, केंद्र सरकार ने इसी सप्ताह संसद को जानकारी दी थी कि भारत के हवाई अड्डा बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है और देश की कुल वार्षिक यात्री संचालन क्षमता अब 58 करोड़ यात्रियों से अधिक हो गई है।

सरकार के अनुसार, यह बढ़ोतरी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और निजी हवाई अड्डा संचालकों द्वारा लगातार किए जा रहे विस्तार और आधुनिकीकरण कार्यों का परिणाम है।

सरकार ने यह भी बताया कि हवाई अड्डों से जुड़ी नई परियोजनाएं यात्री यातायात वृद्धि, परिचालन आवश्यकताओं, एयरलाइनों की मांग, वित्तीय व्यवहार्यता और तकनीकी-आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखकर लागू की जा रही हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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मिडिल एज में तीन चीजों पर नियंत्रण से 13 साल तक टल सकता है डिमेंशिया : अध्ययन

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। मिडिल एज में उच्च रक्तचाप, टाइप-2 मधुमेह और धूम्रपान को अगर नियंत्रित रखा तो तय है कि डिमेंशिया की शुरुआत को औसतन 13 वर्ष तक टाला जा सकता है। यह दावा एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में किया गया है।

अमेरिकी मेडिकल जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 12,400 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का लगभग 26 वर्षों तक विश्लेषण किया। अध्ययन की शुरुआत में प्रतिभागियों की औसत आयु 56 वर्ष थी। फॉलो अप पीरियड के दौरान 3,000 से अधिक प्रतिभागियों में डिमेंशिया बढ़ा।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में मिडिल एज के दौरान उच्च रक्तचाप, टाइप-2 मधुमेह और धूम्रपान जैसे तीनों जोखिम कारक मौजूद नहीं थे, वे औसतन 30.1 वर्ष तक डिमेंशिया से मुक्त रहे। वहीं, जो इन्हें नियंत्रित नहीं कर पाए, उनमें डिमेंशिया-मुक्त अवधि केवल लगभग 17 वर्ष रही। इस प्रकार दोनों समूहों के बीच करीब 13 वर्षों का अंतर दर्ज किया गया।

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और अमेरिका के एनवाईयू लैंगोन हेल्थ से जुड़े डॉ. जोसेफ कोरेश ने कहा कि डिमेंशिया की प्रक्रिया लक्षण सामने आने से कई वर्ष पहले ही शुरू हो जाती है। ऐसे में मिडिल एज में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना मस्तिष्क के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च रक्तचाप और मधुमेह मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि धूम्रपान ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को बढ़ाकर मस्तिष्क कोशिकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इन जोखिमों को कम करने से संज्ञानात्मक क्षमता लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है।

हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि डिमेंशिया को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, क्योंकि उम्र और आनुवंशिक कारक इसके प्रमुख जोखिम बने रहते हैं। फिर भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, रक्तचाप और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखकर तथा धूम्रपान से दूरी बनाकर डिमेंशिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इससे पहले लैंसेट आयोग की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि डिमेंशिया के लगभग 45 प्रतिशत मामलों को जीवनशैली और अन्य संशोधित किए जा सकने वाले जोखिम कारकों पर समय रहते नियंत्रण कर रोका या कई वर्षों तक टाला जा सकता है।

--आईएएनएस

केआर/

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