डेमोक्रेट्स की 5 ऐतिहासिक जीत: ट्रंप के 'MAGA' गढ़ में महा-उलटफेर, हिली अमेरिकी सियासत!
अमेरिकी राजनीति आज डेमोक्रेटिक पार्टी के नाम रही। साउथ कैरोलिना में सीनेट सीट पर अप्रत्याशित उलटफेर से लेकर नॉर्थ कैरोलिना में एक अहम सीट जीतने तक, चुनावी नतीजों ने देश के सियासी परिदृश्य की एक अलग ही तस्वीर पेश कर दी है। अब तक ऐसा माना जा रहा था कि अमेरिकी राजनीति पूरी तरह से डोनाल्ड ट्रंप के 'MAGA' (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) एजेंडे की गिरफ्त में है। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस (संसद) पर नियंत्रण की जंग अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन डेमोक्रेट्स ने कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर बड़ी जीत हासिल कर ली है। डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका ओहायो से आया है, जो लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ओहायो के गवर्नर चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार डॉ. एमी एक्टन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को करारी शिकस्त दी है। यह कोई सामान्य हार नहीं है। रामास्वामी के पीछे सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन था। इतना ही नहीं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (जो खुद ओहायो से आते हैं) की राजनीतिक रणनीतिकारों की टीम भी पूरी ताकत से रामास्वामी के प्रचार में जुटी हुई थी। इसके बावजूद, रामास्वामी इस मजबूत राजनीतिक समर्थन को जीत में तब्दील करने में पूरी तरह नाकाम रहे। इस ऐतिहासिक जीत के साथ एमी एक्टन ने ओहायो के चुनावी इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। वह ओहायो की गवर्नर बनने वाली पहली महिला बन गई हैं और करीब दो दशकों बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस राज्य की गवर्नर की कुर्सी पर वापसी की है।
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वह ओहियो की गवर्नर चुनी जाने वाली पहली महिला हैं। हाल के दिनों में रिपब्लिकन प्रचार काफी आक्रामक हो गया था। रामास्वामी की टीम ने एक ऐसा विज्ञापन चलाया था जिसमें एक्टन की माँ को निशाना बनाया गया था। लेकिन आखिरकार जीत एक्टन की हुई। इस रात का दूसरा सबसे चौंकाने वाला नतीजा साउथ कैरोलिना से आया है। डेमोक्रेट एनी एंड्रयूज ने राज्य की सीनेट दौड़ में रिपब्लिकन डार्लीन ग्राहम को हरा दिया है। यह एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर है। डार्लीन ग्राहम, दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम की बहन हैं, जिन्होंने दशकों तक सीनेट में साउथ कैरोलिना का प्रतिनिधित्व किया था। जुलाई में उनके निधन के बाद, गवर्नर हेनरी मैकमास्टर ने उनकी खाली हुई सीनेट सीट पर उनकी बहन को नियुक्त किया था।
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इसके बाद उन्होंने पूरे छह साल के कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन मतदाताओं ने उनके इस प्रयास को खारिज कर दिया है। बच्चों की डॉक्टर और बच्चों की सेहत की पैरोकार, एनी एंड्रयूज ने एक ऐसी सीट जीत ली है, जिस पर दशकों से रिपब्लिकन का कब्ज़ा था। आपको बता दें कि इससे पहले यहाँ आखिरी बार 1998 में कोई डेमोक्रेट सीनेट चुनाव जीता था। इस तरह 28 साल का सिलसिला अब टूट गया है। यह सिर्फ सीनेट की एक और जीत नहीं है, बल्कि अमेरिका के उन राज्यों में से एक में डेमोक्रेट्स के लिए एक बड़ी कामयाबी है, जहाँ हमेशा से रिपब्लिकन का दबदबा रहा है। अब आते हैं तीसरे नंबर पर। डेमोक्रेट रॉय कूपर ने नॉर्थ कैरोलिना में रिपब्लिकन माइकल वाटली को हराकर सीनेट सीट जीती है। डेमोक्रेट्स के लिए यह एक और बड़ी जीत है। नॉर्थ कैरोलिना के दो बार गवर्नर रह चुके कूपर ने अपनी पार्टी को सीनेट की एक अहम सीट दिलाई है। यह सीट पहले रिपब्लिकन के पास थी, और जाहिर है कि यह डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक झटका है, जिन्होंने वाटली के चुनाव प्रचार का समर्थन किया था। आज रात हम यही ट्रेंड देख रहे हैं; कई उम्मीदवार जिन्हें ट्रम्प का समर्थन मिला, वे चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए। अब चौथे नंबर पर एक और बड़ी खबर।
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जॉर्जिया में डेमोक्रेट सीनेटर जॉन ओसॉफ़ फिर से चुने गए हैं। ओसॉफ़ ने रिपब्लिकन माइक कॉलिन को हराकर अमेरिकी सीनेट में अपना दूसरा कार्यकाल पक्का कर लिया है। डेमोक्रेट्स के लिए अपनी इस सीट को बचाए रखना काफी अहम है। जॉर्जिया पूरे अमेरिका में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले राजनीतिक अखाड़ों में से एक रहा है। इस सीट को अपने पास बनाए रखने का मतलब है कि डेमोक्रेट्स सीनेट पर नियंत्रण पाने की अपनी लड़ाई में, अपने सबसे अहम मोर्चों में से एक को बचाने में कामयाब रहे हैं। जॉर्जिया ने डेमोक्रेट्स को एक और बड़ी जीत दिलाई है। केशा लांस बॉटम्स ने गवर्नर का चुनाव जीत लिया है। वह अमेरिका के किसी राज्य की गवर्नर बनने वाली पहली अश्वेत महिला हैं, और यह अमेरिकी राजनीतिक इतिहास का एक ऐतिहासिक पल है। बॉटम्स अटलांटा की पूर्व मेयर रही हैं और उन्होंने एक ऐसी बाधा को तोड़ दिया है जो पीढ़ियों से कायम थी। लेकिन इस जीत का महत्व सिर्फ इतिहास की किताबों तक ही सीमित नहीं है। यह इस रात की पहली ऐसी जीत है जिसमें किसी पार्टी ने गवर्नर का पद हासिल किया है। और डेमोक्रेट्स के लिए, जॉर्जिया जैसे अहम चुनावी राज्य में गवर्नर का पद जीतना, उनकी पहले से ही शानदार चल रही रात को और भी बेहतर बनाता है।
निकल गई अकड़...मिड टर्म चुनाव में कैसे भारतवंशियों ने धुआं उड़ा दिया?
अमेरिका में मिड टर्म चुनाव के नतीजों में ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन को जोरदार झटका लगता नजर आ रहा है। वहीं विपक्षी दल डेमोक्रेट्स ने अच्छी खासी बढ़त बनाई है। इस चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की सभी 435 सीटों यानी कि भारत के हिसाब से समझे तो लोकसभा की सीटें और वहीं सीनेट की सिर्फ 35 सीटों यानी भारत के हिसाब से राज्यसभा और 36 राज्यों के गवर्नर पदों पर मुकाबला हुआ है। अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों के शुरुआती नतीजों में कई भारतवंशी उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार और पूर्व स्कूल प्रिंसिपल पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन नेता कैसी अस्कर को हराकर जीत दर्ज की है। वे अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला बनी हैं। भारतीय मूल के नेता सुहास सुब्रह्मण्यम ने भी इन चुनावों में जीत हासिल की है। ओहायो के गवर्नर पद के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी फिलहाल डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से पीछे चल रहे हैं। रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और अमी बेरा जैसे भारतवंशी नेता भी अपनी-अपनी सीटों पर चुनावी मैदान में हैं।
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चुनाव परिणाम ना केवल यूएस कांग्रेस यानी अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर नियंत्रण तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के शेष हिस्से और उनके बिल संबंधी एजेंडे की दिशा भी अब निर्धारित करेंगे। सीबीएस न्यूज़ के एग्जिट पोल के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग भी 38% दर्ज की गई है जो कि गिरावट आई है। मिड टर्म चुनाव के दौरान किसी मौजूदा राष्ट्रपति के लिए यह सबसे कम अप्रूवल रेटिंग में से एक मानी जा रही है। एग्जिट पोल के अनुसार लगभग 3/4 मतदाता देश की वर्तमान दिशा को लेकर असंतुष्ट है। साथ ही 2 साल पहले की तुलना में अर्थव्यवस्था को लेकर नकारात्मक सोच रखने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। यानी कि ट्रंप के ट्रंप को लेकर निराशा बढ़ी है। सीएनएन के वोटर पोल के शुरुआती आंकड़ों में पता चला है कि 10 में से छह मतदाता राष्ट्रपति ट्रंप के कामकाज को लेकर असंतुष्ट हैं। बढ़ती महंगाई, आर्थिक चुनौतियां और राजनीतिक ध्रुवीकरण मतदाताओं के प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं। वोटर पोल में यह भी सामने आया है कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप का समर्थन करने वाले लगभग पांचवें हिस्से के मतदाता अब उनके प्रदर्शन से असंतुष्ट हैं।
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सर्वे के अनुसार लगभग 3/4 मतदाताओं ने कहा है कि देश की वर्तमान स्थिति से वह खुश नहीं है और उन्हें लगता है कि हालात खराब हुए हैं। लगभग 40% मतदाताओं ने खुद को ट्रंप के कार्यकाल से नाराज बताया और बदलाव की मांग की है। यही है कि यह नतीजे अब बदलते नजर आ रहे हैं। जहां ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन को जोरदार झटका लगता जा रहा है। वहीं विपक्षी दल डेमोक्रेट्स यहां बढ़त बनाए हुए हैं।
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