ईरान के साथ तनाव कम होने की उम्मीद के चलते कच्चा तेल 6 प्रतिशत लुढ़का
नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में ईरान के साथ तनाव कम होने की उम्मीद के चलते मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत में गिरावट देखने को मिली है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 6.51 डॉलर या 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल हो गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमत 6.12 डॉलर या 6.5 प्रतिशत गिरकर 88.65 डॉलर हो गई।
तेल की कीमतों में गिरावट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद आई, जिसमें कहा गया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान बहुत जल्द समाप्त हो जाएगा। ट्रंप ने जीत को उस बिंदु के रूप में परिभाषित किया है जब तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रह जाएगी जो अमेरिका, इजरायल या उसके सहयोगियों के लिए खतरा बन सकें।
ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। उन्होंने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य सुरक्षित रहेगा, क्योंकि हमारे नौसेना के कई जहाज वहां तैनात हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा मार्ग है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रंजिट मार्गों में से एक है। खाड़ी उत्पादकों के कच्चे तेल के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है, जिससे इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन जाता है।
अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से इजरायल के साथ संयुक्त सैन्य अभियान के तहत ईरानी ठिकानों पर बड़े हमले किए।
इससे पहले, सोमवार के सत्र में तेल की कीमतें कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं, जिसमें ब्रेंट क्रूड की कीमत 119.50 डॉलर और डब्ल्यूटीआई की कीमत 119.48 डॉलर हो गई, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का भारत में मुद्रास्फीति की दर पर फिलहाल कोई खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश की मुद्रास्फीति निम्नतम सीमा के करीब है।
वित्त मंत्री ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी, 2026 को भू-राजनीतिक संघर्ष शुरू होने तक, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमत पिछले एक वर्ष से लगातार गिर रही थी।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत ने रमजान में अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हमलों की निंदा की; इसे इस्लामिक एकजुटता का पाखंड बताया
संयुक्त राष्ट्र, 10 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव जारी है। इस बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की। यूएन में भारत ने कहा कि यह हमला रमजान के महीने में किया गया, जिसमें ज्यादातर औरतें और बच्चे मारे गए। यह हमला ऐसे समय में किया गया जब इस्लामिक एकता, यानी कि रमजान का महीना चल रहा है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, “एक तरफ अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामिक एकता के ऊंचे सिद्धांतों की बात करना और दूसरी तरफ रमजान के पवित्र महीने में बेरहमी से एयर स्ट्राइक करना दोहरे मापदंड को दिखाता है।”
उन्होंने कहा कि इन हमलों में 6 मार्च 2026 तक 185 बेगुनाह आम लोग मारे गए हैं, जिनमें से लगभग 55 फीसदी महिलाएं और बच्चे हैं। उन्होंने कहा, “भारत अफगान इलाके पर एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा करता है, जो इंटरनेशनल कानून और यूएन चार्टर और देश की संप्रभुता के सिद्धांत का खुला उल्लंघन है।”
इस दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन डिप्लोमैटिक तरीके से कही गई बातें साफ थीं कि वे किसके खिलाफ थीं। पाकिस्तान ने दावा किया है कि वह अफगानिस्तान पर हमला इसलिए कर रहा है क्योंकि वह अपने इलाके से आतंकवादियों को काम करने दे रहा था।
हालांकि, हरीश ने बताया कि पाकिस्तान ही पड़ोसियों पर हमला करने के लिए आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल प्रॉक्सी के तौर पर कर रहा है। उन्होंने कहा, आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए संकट बनी हुई है जो इंसानियत को परेशान कर रही है, और सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मिलकर की गई कोशिशों से ही यह सुनिश्चित होगा कि इस्लामिक स्टेट आईएसआईएल और अलकायदा और उनके साथी, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद और एलईटी के प्रॉक्सी जैसे द रेजिस्टेंस फ्रंट शामिल हैं और जो लोग उनके ऑपरेशन में मदद करते हैं, वे अब क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म में शामिल न हों।
बता दें, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवेंट (आईएसआईएल) एक चरमपंथी आतंकवादी समूह है जो मध्य पूर्व के बड़े क्षेत्र सीरिया, लेबनान, जॉर्डन और इजरायल-फिलिस्तीन में काफी सक्रिय है।
द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में धर्म से प्रेरित आतंकवादी हमला किया, जिसमें 26 लोग मारे गए। अफगानिस्तान के लिए यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के उप-विशेष प्रतिनिधि, जॉर्जेट गैग्नन ने कहा, “पाकिस्तान के साथ लड़ाई की इंसानी और आर्थिक कीमत बहुत ज्यादा चुकानी पड़ी है।”
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ अपनी सीमा बंद कर दी है, इसलिए व्यापार का एकमात्र रास्ता ईरान से होकर जाता है, जो युद्ध की वजह से रुक गया है। इस वजह से जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने लगी हैं, जिससे “अफगानिस्तान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “इस इलाके में, अफगानिस्तान के दोनों सबसे लंबे बॉर्डर पर अस्थिरता अफगानिस्तान की स्थिरता को कमजोर कर रही है।”
--आईएएनएस
केके/एएस
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