अमिताभ बच्चन की सुरक्षा को लेकर PM मोदी को पत्र:बुलेटप्रूफ ग्लास के पीछे फैंस से मिलने के बाद फिल्म संगठन AICWA ने जताई चिंता
अमिताभ बच्चन रविवार यानी 1 नवंबर को मुंबई स्थित अपने घर जलसा के बाहर बुलेटप्रूफ ग्लास के पीछे फैंस से मिले। जिसके बाद अमिताभ बच्चन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अभिनेता, फिल्ममेकर्स और उनके परिवारों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की। AICWA ने अमिताभ बच्चन की लंबे समय से चली आ रही रविवार को फैंस से मिलने की परंपरा का भी जिक्र किया। इस दिन फैंस उन्हें देखने के लिए एक्टर के घर जलसा के बाहर जुटते हैं। एसोसिएशन ने पत्र में लिखा, “चार दशक से ज्यादा समय से वह हर रविवार वहां फैंस से मिलते हैं। उन्हें देखने के लिए भारत और विदेशों से लोग आते हैं। 84 साल की उम्र में उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि उन्हें अपने ही शहर में इस तरह खुद को बचाना पड़ेगा। उनके बेटे अभिषेक बच्चन, जो बहुत कम बाहर आते हैं, अपने पिता की सुरक्षा के लिए उनके साथ खड़े रहे।” AICWA ने पत्र में लिखा, “लोगों ने बुलेटप्रूफ कारों के बारे में सुना है। इससे पहले किसी सुपरस्टार को अपने घर से बाहर बुलेटप्रूफ ग्लास के पीछे उन लोगों से मिलने के लिए निकलते नहीं देखा गया, जो उनसे प्यार करते हैं। यह तस्वीर भारतीय सिनेमा के इतिहास में याद रखी जाएगी और इससे पूरी इंडस्ट्री हिल गई।” फिल्मी हस्तियों पर हमलों का जिक्र प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में AICWA ने कई प्रमुख हस्तियों से जुड़े मामलों का जिक्र किया। इनमें बांद्रा में बाबा सिद्दीकी की हत्या, सलमान खान के घर के बाहर गोलीबारी और सैफ अली खान पर घर में हुआ चाकू से हमला शामिल है। संगठन ने फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर हुई गोलीबारी का भी हवाला दिया। पत्र में कनाडा में कॉमेडियन कपिल शर्मा के कैफे को निशाना बनाकर हुई गोलीबारी की कई घटनाओं का भी जिक्र है। इसमें हाल ही में जुहू में टाइगर श्रॉफ से जुड़ी गोलीबारी की घटना भी शामिल है। AICWA ने टाइगर श्रॉफ से जुड़ी घटना पर चिंता जताई। संगठन ने कहा कि यह घटना एक व्यस्त इलाके में हुई, जहां कई लोग मौजूद थे। पत्र में लिखा गया, “टाइगर श्रॉफ पर जुहू में बड़ी भीड़ की मौजूदगी में गोली चलाई गई। यह मुंबई के सबसे प्रमुख VIP इलाकों में से एक है। दो लोगों को गोलियां लगीं। टाइगर श्रॉफ का कोई विवाद या किसी से दुश्मनी सामने नहीं आई है।” AICWA ने यह भी कहा कि इन घटनाओं के पीछे रंगदारी एक आम वजह हो सकती है। संगठन के मुताबिक, अपराधी गिरोह बॉलीवुड की लोकप्रियता और अंतरराष्ट्रीय पहचान के कारण फिल्मी हस्तियों को निशाना बना रहे हैं। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि मशहूर अभिनेताओं और फिल्ममेकर्स पर हमले डर फैलाने, पहचान बनाने और बड़ी रकम वसूलने के लिए किए जा रहे हैं। पत्र में तुषार कपूर से कथित तौर पर 5 करोड़ रुपए की मांग करने के लिए धमकियां मिलने की खबरों का भी जिक्र है। AICWA ने अपनी स्थिति बताते हुए लिखा, “इन सभी हमलों का मकसद रंगदारी वसूलना लगता है। गैंगस्टर जानते हैं कि बॉलीवुड सबसे आसान निशाना है और पूरी दुनिया में जाना जाता है। मशहूर फिल्मी हस्तियों पर हमला करके वे अपना नाम बनाना और बड़े स्तर पर पैसे वसूलना चाहते हैं।” मुंबई की कानून-व्यवस्था पर सवाल AICWA ने फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा के साथ मुंबई की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। संगठन ने कहा कि अगर बड़े नामों पर ऐसे हमले हो सकते हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा भी चिंता का विषय है। एसोसिएशन ने सिर्फ भरोसा दिलाने के बजाय ठोस सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की। पत्र में कहा गया, “आज मुंबई में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई है। अगर टाइगर श्रॉफ शहर के बीचोंबीच सुरक्षित नहीं हैं, तो आम मुंबईकर भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता। 2026 में अंडरवर्ल्ड का वह खौफ, जिसे खत्म माना जा रहा था, मुंबई की सड़कों पर लौट आया है। सिर्फ बातें काफी नहीं हैं। बॉलीवुड को असली और साफ दिखाई देने वाली सुरक्षा चाहिए।” ____________________ यह खबर भी पढ़ें… धमकी के बाद बुलेटप्रूफ केबिन में दिखे अमिताभ बच्चन:संडे दर्शन में जलसा के बाहर सुरक्षा बढ़ी; बम से उड़ाने की धमकी मिली थी बम से उड़ाने की धमकी और घर की रेकी के बाद अमिताभ बच्चन की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। बिग बी फैंस से मिलने के लिए बुलेटप्रूफ कांच के केबिन में पहुंचे थे। दरअसल, हाल ही में अमिताभ के बंगले को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। वहीं, टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस की जांच में पता चला कि हमलावरों ने अमिताभ के दोनों घरों जलसा और प्रतीक्षा की रेकी भी की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
मैं मैदान में होता तो बड़े अंतर से जीतते, मिड टर्म चुनाव में पिछड़कर बोले ट्रंप
अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी करते नजर आ रहे हैं। चुनावी नतीजों और शुरुआती अनुमान में डेमोक्रेटिक पार्टी मजबूत होती दिखाई दे रही है और सबसे बड़ा झटका ओहायोग के गवर्नर चुनाव में लगा है। जहां भारतीय मूल के रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को हार का सामना करना पड़ा। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने उन्हें शिकस्त दी है। वहीं सीनेट में भी डेमोक्रेट बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचते नजर आ रहे हैं। भारतीय समय के मुताबिक 4 नवंबर की सुबह तक आ रहे चुनावी अपडेट में रिपब्लिकन पार्टी के लिए कई चिंताजनक संकेत मिले हैं। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में 435 में से 203 सीटों के नतीजे आए हैं। डेमोक्रेट्स 119 सीटें जीत चुकी हैं और 86 पर आगे है। जबकि रिपब्लिकन 84 सीटें जीतकर 91 पर आगे चल रहे हैं। सीनेट 100 में से 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है।
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डेमोक्रेट्स 49 सीटों के साथ दो पर आगे हैं। जबकि रिपब्लिकन 40 सीटों के साथ पांच पर आगे हैं। दो निर्दलीय सदस्य हैं। इसके अलावा गवर्नर चुनाव 36 राज्यों में मुकाबला है। डेमोक्रेट्स 20 सीटें जीतकर आठ पर आगे चल रहे हैं। जबकि रिपब्लिकन 15 सीटें जीतकर चार पर आगे चल रहे हैं। वहीं ओहायू के गवर्नर चुनाव में विवेक रामास्वामी को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टर ने हरा दिया है। रामास्वामी को राष्ट्रपति ट्रंप का समर्थन हासिल था। उन्होंने मई में रिपब्लिकन पार्टी का प्राइमरी चुनाव जीतकर गवर्नर पद की दौड़ में जगह बनाई थी। मतगणना के दौरान एमी एक्टन लगातार बढ़त बनाए हुई थी और शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक उन्हें करीब 50.47% वोट मिले। जबकि रामास्वामी को 46.22% वोट हासिल हुए। करीब 65% मतों की गिनती के दौरान एक्टन की बढ़त 4.24% अंक तक पहुंच गई थी और आखिरकार डेमोक्रेटिक पार्टी ने यह मुकाबला अपने नाम कर लिया।
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ओहायू में यह नतीजा इसलिए बढ़ा है क्योंकि यहां रिपब्लिकन पार्टी अपनी पकड़ मजबूत मानकर चल रही थी। रामास्वामी की हार को ट्रंप के समर्थन के बावजूद रिपब्लिकन उम्मीदवार की हार के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं अमेरिकी सीनेट में भी इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। सीनेट में कुल 100 सीटें हैं जिनमें से 35 सीटों पर इस बार चुनाव में मतदान हो रहा है। बाकी 65 सीटों पर पहले से चुने गए सांसद हैं जिनका कार्यकाल अभी जारी है। अब तक के चुनावी आंकड़ों के मुताबिक डेमोक्रेट्स 49 सीटों के साथ दो पर आ गए हैं। यानी कि बहुमत हासिल करने के लिए सिर्फ दो सीटों की जरूरत है। सीनेट में बहुमत का आंकड़ा 51 है और अगर डेमोक्रेट्स 51 सीटें हासिल कर लेते हैं तो सीनेट में उनका नियंत्रण हो जाएगा। इसका असर राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों और सरकार के कामकाज पर पड़ सकता है। वहीं साउथ कैरोलना से भी डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए बड़ी खबर सामने आई है।
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