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इंडोनेशिया में कचरे का पहाड़ धंसने से मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हुई

जकार्ता, 10 मार्च (आईएएनएस)। इंडोनेशिया के सबसे बड़े लैंडफिल साइट पर कचरे के ढेर के धंसने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। मंगलवार को जकार्ता सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस ने इसकी पुष्टि की। अधिकारियों के मुताबिक, आखिरी शव मिलने के बाद सोमवार देर रात बचाव अभियान समाप्त कर दिया गया।

जकार्ता सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस की प्रमुख देसियाना कार्तिका बाहारी ने एक लिखित बयान में कहा कि सभी पीड़ितों के मिल जाने और किसी अन्य व्यक्ति के लापता होने की सूचना न मिलने के बाद खोज और बचाव अभियान को औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया है।

यह हादसा रविवार दोपहर बंटार गेबांग लैंडफिल में हुआ, जो इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के पास स्थित एक बड़ा कचरा प्रसंस्करण केंद्र है। यहां अचानक कचरे का विशाल ढेर धंस गया, जिससे वहां मौजूद कई लोग मलबे के नीचे दब गए।

हादसे के समय वहां फूड स्टॉल चलाने वाले लोग, कचरा ढोने वाले ट्रक ड्राइवर और इलाके में काम करने वाले कचरा बीनने वाले मौजूद थे। कुछ ट्रक और वाहन भी कचरे के नीचे दब गए।

बचावकर्मियों ने मौके पर भारी मशीनों और एक्सकेवेटर की मदद से मलबा हटाकर पीड़ितों को बाहर निकाला। कई शव कचरे के बड़े-बड़े ढेरों के नीचे से बरामद किए गए।

बताया गया कि मृतकों में दो कचरा ट्रक ड्राइवर और दो फूड स्टॉल चलाने वाले लोग शामिल हैं, जो हादसे के समय लैंडफिल के पास काम कर रहे थे या आराम कर रहे थे। हालांकि इस दुर्घटना में चार लोग किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे।

इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में 300 से ज्यादा सर्च एंड रेस्क्यू कर्मियों को लगाया गया था। पुलिस, सेना और स्वयंसेवकों की टीमें भी मौके पर मौजूद रहीं। बचाव कार्य के दौरान स्निफर डॉग और भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया।

इससे पहले भी साल 2005 में यहां इसी तरह का कचरा धंसने का हादसा हुआ था, जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गई थी।

इंडोनेशिया के पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक, बार-बार हो रहे ऐसे हादसे इस बात का संकेत हैं कि 110 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले इस लैंडफिल पर कचरे का अत्यधिक दबाव गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। यहां हर दिन जकार्ता शहर से करीब 6,500 से 7,000 टन कचरा लाया जाता है, जिससे जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीयूष

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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आयुर्वेद की जादुई जड़ी-बूटी 'मकोय', जो है त्रिदोषनाशक

नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। प्रकृति ने मानव स्वास्थ्य के लिए अनेक औषधीय पौधे दिए हैं। इनमें मकोय एक अत्यंत महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी मानी जाती है। यह पौधा भले ही देखने में छोटा-सा लगता है लेकिन इसके औषधीय गुण अत्यंत प्रभावशाली होते हैं।

आयुर्वेद ने इसे अत्यंत गुणकारी और त्रिदोषनाशक बताया है। यह वात, पित्त और कफ को संतुलित करने वाली जड़ी-बूटी है, जो लिवर की रक्षा, सूजन कम करने, पेट के रोगों, पीलिया, चर्म रोगों और बुखार में अत्यंत लाभकारी होती है।

हालांकि, पुराने समय में इसके पके फल, पत्ते और जड़ें औषधीय रूप से उपयोग किए जाते थे। मकोय की तासीर ठंडी होती है। इसके छोटे काले फल और हरे पत्ते शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होते हैं।

इसके छोटे-छोटे काले फल और हरे पत्ते शरीर को ठंडक देते हैं और जहरीले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग सदियों से इसे घरेलू इलाज के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं। वहीं, इसके पत्ते, फल, जड़ और तना दवा के काम आते हैं।

सुश्रुत संहिता में इसे काकमाची के नाम से जाना जाता है। उनके अनुसार, इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में

दाद-खाज, खुजली और सनबर्न जैसी त्वचा संबंधित समस्याओं से निजात दिलाने में कारगर साबित हो सकते हैं।

इसके पके हुए फल टीबी जैसी बीमारियों में भी फायदेमंद हो सकते हैं। इसके अंदर कैंसर रोधी गुणों वाला फल है, जो ट्यूमर और कैंसर सेल्स के विकास को रोकने में मदद करता है। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज में भी यह असरदार है, क्योंकि यह ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है।

मकोय के गुणों का वर्णन प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों सुश्रुत और चरक संहिता में किया गया है। उनके अनुसार, यह एक ऐसा रसायन है जो शरीर के टॉक्सिन्स को खत्म करता है। हालांकि, इसका सेवन करने से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य या फिर किसी डॉक्टर से एक बार जरूर सलाह लें।

--आईएएनएस

एनएस/पीयूष

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