शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात मानी जाती है, लेकिन सोमवार को कारोबार की शुरुआत में ही भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर बाजार की चाल पर साफ नजर आया।
मौजूद जानकारी के अनुसार सुबह के कारोबार में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब ढाई हजार अंकों तक गिर गया और लगभग 76 हजार के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया है। वहीं निफ्टी भी सात सौ अंकों से ज्यादा टूटकर करीब 23 हजार सात सौ के स्तर के आसपास पहुंच गया।
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेंट तेल की कीमत एक सौ पंद्रह डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जिससे तेल आयात करने वाले देशों के लिए नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
गौरतलब है कि भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में अगर मध्य पूर्व में संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका भी रहती है। चाहे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जाए या नहीं, इसका दबाव अर्थव्यवस्था पर किसी न किसी रूप में जरूर पड़ता है।
कारोबार की शुरुआत में लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली है। हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में गिरावट सीमित रही है, जबकि कई कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई है।
मौजूद आंकड़ों के अनुसार बैंकिंग और धातु क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला है। इसके अलावा वाहन, निजी बैंक, सार्वजनिक बैंक और रियल एस्टेट से जुड़े शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।
इस दौरान बाजार में अस्थिरता भी तेजी से बढ़ी है। निवेशकों की चिंता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाजार में जोखिम को मापने वाला अस्थिरता सूचकांक भी काफी तेजी से ऊपर गया।
छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखा गया है। इन श्रेणियों के कई सूचकांकों में तीन प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इतिहास बताता है कि भू-राजनीतिक घटनाओं का असर बाजार पर लंबे समय तक नहीं रहता। ऐसे हालात में निवेशकों को घबराने के बजाय धैर्य के साथ बाजार की दिशा पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
विश्लेषकों के अनुसार घरेलू खपत से जुड़े कुछ क्षेत्रों पर इस संकट का असर सीमित रह सकता है। बैंकिंग, वाहन, दूरसंचार और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक निवेश के अवसर बने रह सकते हैं। इसके अलावा रक्षा और दवा क्षेत्र को अपेक्षाकृत मजबूत माना जा रहा है।
फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष कितने समय तक जारी रहता है और वैश्विक तेल बाजार में कीमतों की चाल कैसी रहती है।
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नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध आज नौवें दिन में प्रवेश कर गया। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका की साजिश का जिक्र करते हुए कहा, ईरान पूरी तरह से तैयार है।
विदेश मंत्री सैयद अब्बास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ऑपरेशन एपिक मिस्टेक के नौ दिन बाद, तेल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं और सभी वस्तुएं तेजी से महंगी हो रही हैं। हमें पता है कि अमेरिका हमारे तेल और परमाणु स्थलों के खिलाफ योजना बना रहा है, ताकि महंगी कीमतों के बड़े झटके को नियंत्रित किया जा सके। ईरान पूरी तरह से तैयार है।
उन्होंने कहा, हमारे पास भी आपके लिए बहुत सारी रोमांचक चीजें हैं।
इससे पहले आज विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ईरान को नया सुप्रीम लीडर मिलने पर बधाई भी दी। अराघची ने कहा कि यह चुनाव देश की संप्रभुता और अखंडता को मजबूत करेगा।
सैयद अब्बास ने कहा कि मैं अयातुल्ला सैयद मुजतबा हुसैनी खामेनेई को इस्लामिक क्रांति के तीसरे नेता के तौर पर उनके सही चुनाव पर बधाई देता हूं और ईरान के महान लोगों को बधाई देता हूं। देश के सामने मौजूदा मुश्किल हालात में, यह चुनाव बेशक हमारे प्यारे देश की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी देगा और ईरानी लोगों के बीच एकता और मेलजोल को मजबूत करेगा।
उन्होंने आगे कहा, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सभी डिप्लोमैट्स इस्लामिक क्रांति के तीसरे लीडर के प्रति अपनी वफादारी की घोषणा करते हैं, और हम ईरान के महान देश के अधिकारों की रक्षा करने, राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को आगे बढ़ाने और ईरान की इस्लामिक क्रांति के बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। झंडा उठाने वालों के हाथों से झंडा कभी न गिरे।
वहीं, साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने दावा किया है कि अमेरिका की वजह से कूटनीतिक रास्ते बंद हुए हैं और तेहरान इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा, यह जंग थोपी गई है। अब ईरान के लोग एकजुट होकर अपने देश की रक्षा कर रहे हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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