अफगानिस्तान तनाव से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डगमगाई, आईएमएफ फंडिंग पर संकट
नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर चल रहे युद्ध के कारण पाकिस्तान को मिलने वाली आईएमएफ (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) फंडिंग की अगली किस्त खतरे में पड़ गई है। एक मीडिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
आईएमएफ की एक टीम इस समय पाकिस्तान के दौरे पर है और वह देश की अर्थव्यवस्था की तीसरी समीक्षा कर रही है। इस समीक्षा के बाद ही अगली फंडिंग जारी होगी। टीम यह देख रही है कि पाकिस्तान सरकार की ओर से लिए जा रहे आर्थिक फैसले उन शर्तों के अनुसार हैं या नहीं, जो आईएमएफ ने तय की हैं, ताकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधर सके और वह कर्ज चुका सके।
अफगानिस्तान के साथ चल रहा युद्ध और बढ़ता हुआ सैन्य खर्च इन शर्तों को पूरा करना मुश्किल बना रहा है। इससे देश में निवेश का माहौल खराब हुआ है और महंगाई भी बढ़ गई है। ये सभी बातें आईएमएफ की टीम ध्यान में रखेगी जब वह यह तय करेगी कि पाकिस्तान को आगे कर्ज दिया जाए या नहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान जैसे देश के लिए आईएमएफ से मदद पाने के कुछ जरूरी नियम होते हैं, जैसे आर्थिक सुधारों को जारी रखना, संरचनात्मक बदलाव करना और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना। किसी बड़ी सीमा पर युद्ध होना इन सभी चीजों पर नकारात्मक असर डालता है और उन आर्थिक आंकड़ों को बिगाड़ देता है जिनकी आईएमएफ सबसे ज्यादा जांच करता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर आईएमएफ का कार्यक्रम रुक जाता है तो निवेशकों का भरोसा भी कम हो सकता है, जो पिछले एक साल में काफी बेहतर हुआ था।
इसके अलावा, अफगानिस्तान के साथ युद्ध चीन के निवेश के लिए भी खतरा बन सकता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) लगभग 65 अरब डॉलर की बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना है, जो चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है और पाकिस्तान के संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरती है। सीमा पर तनाव बढ़ने से इस परियोजना को भी खतरा हो सकता है।
इसी बीच, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध ने एशिया में तेल और गैस की सप्लाई को भी प्रभावित किया है। इससे ऊर्जा और परिवहन की लागत बढ़ गई है, जिससे पाकिस्तान में महंगाई और बढ़ने की आशंका है और उसकी पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ेगा।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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How To File ITR: क्या आप भी हैं इस टैक्स स्लैब में? कौन-कौन भर सकता है ITR-1? आसान है फाइलिंग का तरीका
How To File ITR: आयकर विभाग हर साल टैक्सपेयर्स के लिए अलग-अलग आयकर रिटर्न (ITR) फॉर्म जारी करता है. इनमें से ITR‑1 (Sahaj) सबसे आसान फॉर्म माना जाता है. यह फॉर्म उन लोगों के लिए बनाया गया है जिनकी आय सीमित स्रोतों से होती है और कुल आय 50 लाख तक है.
कौन भर सकता है ITR-1?
ITR-1 सिर्फ रेजिडेंट इंडिविजुअल यानी भारत में रहने वाले व्यक्तियों के लिए है. अगर आपकी सालाना कुल आय 50 लाख से कम है और आय नीचे दिए गए स्रोतों से आती है, तो आप ITR-1 भर सकते हैं-
1. सैलरी या पेंशन से आय – चाहे एक नियोक्ता हो या कई नियोक्ता.
2. एक घर से किराये की आय – लेकिन उस पर पहले के साल का कोई नुकसान (loss) नहीं होना चाहिए.
3. अन्य स्रोतों से आय – जैसे बैंक ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज आदि.
4. पति/पत्नी या नाबालिग बच्चे की क्लब्ड आय – यदि उनकी आय भी इन्हीं श्रेणियों में आती है.
5. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन – अगर शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड से होने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन 1.25 लाख से ज्यादा नहीं है.
पहले कैपिटल गेन होने पर ITR-2 भरना पड़ता था, लेकिन अब छोटी रकम वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को भी ITR-1 में दिखाने की अनुमति दी गई है.
किन लोगों के लिए ITR-1 नहीं है?
कुछ स्थितियों में ITR-1 फाइल नहीं किया जा सकता. जैसे—
- सालाना आय 50 लाख से अधिक हो
- आप किसी कंपनी के डायरेक्टर हों
- आपके पास अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हों
- आप नॉन-रेजिडेंट (NRI) या RNOR हों
- एक से ज्यादा घर से आय हो
- लॉटरी, रेस या जुए से कमाई हुई हो
- शॉर्ट टर्म या ज्यादा कैपिटल गेन हो
- कृषि आय 5,000 से ज्यादा हो
- बिजनेस या प्रोफेशन से आय हो
- विदेश में संपत्ति या बैंक अकाउंट हो
- क्रिप्टो जैसी Virtual Digital Assets से आय हो
इन मामलों में आमतौर पर ITR-2 या अन्य फॉर्म भरना पड़ता है.
ITR-1 भरने की आखिरी तारीख
वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए ITR-1 भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है. अगर कोई व्यक्ति इस तारीख तक रिटर्न नहीं भर पाता, तो वह 31 दिसंबर 2026 तक बेलटेड रिटर्न भर सकता है. हालांकि इस स्थिति में लेट फीस और ब्याज देना पड़ सकता है.
ITR-1 फॉर्म की संरचना
ITR-1 फॉर्म को कई हिस्सों में बांटा गया है—
- Part A – General Information (व्यक्तिगत जानकारी)
- Part B – Gross Total Income (कुल आय)
- Part C – Deductions (कटौतियां)
- Part D – Tax Computation (टैक्स की गणना)
- Part E – Bank Details
- Schedule IT (एडवांस टैक्स या सेल्फ असेसमेंट टैक्स)
- Schedule TDS (TDS/TCS जानकारी)
- Verification
ITR-1 भरने के लिए जरूरी दस्तावेज
रिटर्न फाइल करते समय कुछ जरूरी दस्तावेज रखने चाहिए—
- Form 16 – नियोक्ता द्वारा जारी
- Form 26AS – TDS की जानकारी चेक करने के लिए
- PAN कार्ड
- बैंक पासबुक या FD सर्टिफिकेट
- टैक्स बचत से जुड़े प्रमाण जैसे 80C या 80D की रसीदें
ऑनलाइन ITR-1 कैसे फाइल करें?
रिटर्न फाइल करने के लिए Income Tax e‑Filing Portal पर जाना होगा.
फाइलिंग के मुख्य स्टेप इस प्रकार हैं—
1. पोर्टल पर लॉग-इन या रजिस्टर करें
2. E-File फिर Income Tax Return पर जाकर File Income Tax Return पर क्लिक करें
3. असेसमेंट ईयर चुनें
4. फॉर्म टाइप में ITR-1 चुनें
5. व्यक्तिगत जानकारी और आय के स्रोत भरें
6. टैक्स डिडक्शन (80C, 80D आदि) जोड़ें
7. टैक्स कैलकुलेशन चेक करें
8. रिटर्न सबमिट करके आधार OTP से ई-वेरिफाई करें
ITR-1 में हुए बड़े बदलाव
हाल के अपडेट में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं—
- 1.25 लाख तक के LTCG की रिपोर्टिंग की अनुमति
- डिडक्शन चुनने के लिए ड्रॉप-डाउन सिस्टम
- आधार एनरोलमेंट आईडी हटाई गई, अब सिर्फ 12 अंकों का आधार नंबर मान्य
- Schedule-TDS में नया कॉलम, जिसमें TDS की धारा बतानी होगी
कुल मिलाकर, ITR-1 उन टैक्सपेयर्स के लिए सबसे आसान विकल्प है जिनकी आय सीमित स्रोतों से है और जिनकी कुल कमाई 50 लाख से कम है.
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