Sarbanand Sonowal ने पुरी में International Cruise Terminal बनाने का किया ऐलान
पुरी, तीन नवंबर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को पुरी में 1,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल विकसित करने की घोषणा की। तटीय और क्रूज पोत परिवहन को मजबूत करने पर अपने मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि पारादीप पत्तन प्राधिकरण (पीपीए) ओडिशा सरकार के साथ साझेदारी में इस प्रस्तावित टर्मिनल को विकसित करेगा। इस दौरान सोनोवाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत के माल परिवहन में तटीय और अंतर्देशीय जलमार्ग पोत-परिवहन की हिस्सेदारी को वर्तमान छह प्रतिशत से दोगुना करना और 2029 तक 10 लाख समुद्री क्रूज यात्रियों को आकर्षित करना है।
ये लक्ष्य दो प्रस्तावित पहलों तटीय माल ढुलाई (कार्गो) प्रोत्साहन योजना और क्रूज भारत मिशन का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत के समुद्री क्षेत्र में व्यापक बदलाव आए हैं। बैठक में पत्तन, पोत-परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर और आठ सांसदों ने भाग लिया।
Climate Change और भूजल संकट से निपटने को वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी: विशेषज्ञ
लखनऊ, तीन नवंबर लखनऊ में जलवायु शिखर सम्मेलन में विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने मंगलवार को भूजल की कमी, मिट्टी की घटती उर्वरता, अनियमित मानसून और ऊर्जा की बढ़ती मांग जैसी समस्याओं से निपटने के लिए एकीकृत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि एक-दूसरे से जुड़ी ये समस्याएं कृषि उत्पादन और ग्रामीण लोगों की आजीविका के लिए खतरा पैदा कर रही हैं। यहां आयोजित सम्मेलन में विशेषज्ञों ने खेती पर निर्भर समुदायों को इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाने के लिए पुनर्योजी कृषि (रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर), सौर ऊर्जा, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जल संरक्षण के उपायों और मौसम के बेहतर पूर्वानुमान को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर, पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ साइंसेज और पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज ने संयुक्त रूप से इस सम्मेलन का आयोजन किया। ‘जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पुनर्योजी कृषि, जल और ऊर्जा पर क्षेत्रीय ग्रामीण-भारत शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ साइंसेज के अध्यक्ष प्रो. जोआकिम वॉन ब्रौन ने कहा कि जलवायु संकट पहले ही सामने आ चुका है और इससे निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें तत्काल कदम उठाने की जरूरत है क्योंकि जलवायु संकट हमारे सामने है।
स्थानीय और वैश्विक स्तर पर समाधान तलाशने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को अधिक समर्थन देने की आवश्यकता है।’’ आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के डीन प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने कहा कि सिधु-गंगा के मैदान देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इस क्षेत्र में मिट्टी की घटती गुणवत्ता, भूजल की कमी, मौसम में बदलाव और ऊर्जा की बढ़ती मांग जैसी एक-दूसरे से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इन चुनौतियों से निपटने के लिए हमें अलग-अलग उपाय करने के बजाय ऐसे एकीकृत और वैज्ञानिक समाधान अपनाने होंगे, जिन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके।’’ आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि उपजाऊ भूमि होने के बावजूद इस क्षेत्र में कृषि जोत का आकार घटने, जल संसाधनों की कमी तथा फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इनका असर फसल उत्पादन और ग्रामीण आय पर पड़ रहा है।
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