क्रूड की बढ़ती कीमतों के बीच G7 के वित्त मंत्रियों की बैठक, आपातकालीन तेल भंडार को लेकर हो सकता ये फैसला
Crude Oil Emergency Reserve: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच ग्रुप ऑफ सेवन (G7) के वित्त मंत्रियों की बैठक होने जा रही है. जिसमें आपातकालीन भंडार से तेल निकालने को लेकर फैसला लिया जा सकता है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में मामले के जानकारों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस प्रस्ताव में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के माध्यम से रणनीतिक भंडार की संयुक्त रूप से रिहाई शामिल होगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक, अमेरिका समेत तीन जी7 सदस्यों ने इस विचार का समर्थन किया है. बताया जा रहा है कि अन्य सदस्य समन्वित कदम उठाने से पहले बाजार की स्थितियों का आकलन कर रहे हैं.
आपातकालीन रिजर्व से कितना निकल सकता है तेल?
पीएम मोदी की पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर करीब से नजर, भारतीयों की सुरक्षा मुख्य चिंता: एस. जयशंकर
नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। गल्फ देशों में भारी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। ताजा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने का ऑपरेशन तेजी से जारी है।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, इसलिए यह लड़ाई भारत के लिए खास चिंता की बात है।
राज्यसभा में सत्र शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की मौत के मुद्दे को उठाने की कोशिश की, जिस पर विरोध शुरू हो गया। इसके बाद अध्यक्ष सी.पी. राधाकृष्णन ने खड़गे से अपने हस्तक्षेप को समाप्त करने का आग्रह किया और विदेश मंत्री को सदन में अपना बयान देने के लिए आमंत्रित किया।
सदन में जोरदार नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक विनाश और इस्लामी शासन के कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हुई और तब से हालात और खराब हो गए हैं।
उन्होंने बताया कि यह तनाव कई देशों में फैल गया है। सरकार ने 28 फरवरी को एक बयान जारी कर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था।
हमारा मानना था और तनाव कम करने और अंदरूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी अपनाई जानी चाहिए। यह भी जरूरी है कि इस क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान किया जाए।
डॉ. जयशंकर ने बताया, हालात की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की मीटिंग हुई। इसमें ईरान में हुए एयरस्ट्राइक और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों के बारे में जानकारी दी गई। सीसीएस इस इलाके में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी। इसने इलाके की सुरक्षा और आर्थिक और कमर्शियल गतिविधियों पर पड़ने वाले असर पर भी ध्यान दिया।
उन्होंने कहा कि कमेटी को इस इलाके में आने-जाने वाले भारतीय यात्रियों और इन देशों में तय परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों को होने वाली मुश्किलों के बारे में बताया गया। इसने सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को इन समस्याओं से निपटने के लिए सही कदम उठाने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री नए डेवलपमेंट पर करीब से नजर रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय असरदार जवाब देने के लिए सहयोग कर रहे हैं।
भारत के विदेश मंत्री ने कहा, लड़ाई लगातार बढ़ रही है और इलाके में सुरक्षा की हालत काफी खराब हो गई है। हमने देखा है कि असल में, लड़ाई दूसरे देशों में भी फैल गई है और तबाही और मौतें बढ़ रही हैं। पूरे इलाके में सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर साफ असर पड़ा है और कुछ मामलों में तो रुक भी गई हैं।
इसलिए, हमने 3 मार्च को बातचीत और डिप्लोमेसी की अपनी अपील दोहराई और लड़ाई को जल्द खत्म करने की बात कही। मुझे यकीन है कि पूरा सदन भी जानमाल के नुकसान पर दुख जताने में मेरे साथ है।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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