दिल्ली में दिवाली से पहले प्रदूषण का डबल अटैक, AQI 350 के करीब; GRAP-2 लागू
दिवाली से पहले दिल्ली-NCR की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है. राजधानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-2 को लागू कर दिया है. मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 331 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है. वहीं, राजधानी के कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंचने से स्थिति और चिंताजनक हो गई है.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, जहांगीरपुरी में AQI 449 दर्ज किया गया. रोहिणी में 429, पंजाबी बाग में 424, अलीपुर में 413 और विवेक विहार में 410 का स्तर दर्ज हुआ. इन इलाकों में हवा 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गई है.
दिवाली से पहले तेजी से बिगड़ी हवा
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से वायु गुणवत्ता लगातार गिर रही है. 31 अक्टूबर को राजधानी का AQI 117 था, जो 'मध्यम' श्रेणी में आता है. 1 नवंबर को यह बढ़कर 261 और 2 नवंबर को 324 तक पहुंच गया. इसके बाद 3 नवंबर की सुबह औसत AQI 331 दर्ज किया गया.
दिल्ली के अलावा नोएडा में भी प्रदूषण बढ़ा है. यहां औसत AQI 307 दर्ज किया गया, जबकि गुरुग्राम में 284 और गाजियाबाद में 259 का स्तर रहा. इससे साफ है कि प्रदूषण का असर केवल राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के शहर भी प्रभावित हो रहे हैं.
GRAP-2 के तहत क्या-क्या प्रतिबंध लागू?
CAQM ने हवा की गुणवत्ता में गिरावट और अगले कुछ दिनों तक 'बहुत खराब' स्थिति बने रहने के अनुमान को देखते हुए GRAP-2 लागू किया है. इसके तहत सरकारी एजेंसियों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कदम उठाने होंगे.
- सड़कों की रोजाना मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग की जाएगी.
- धूल कम करने के लिए पानी और डस्ट सप्रेसेंट का छिड़काव बढ़ाया जाएगा.
- प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट पर विशेष अभियान चलाए जाएंगे.
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा.
- निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जाएगा.
- कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर निर्धारित पाबंदियां लागू रहेंगी.
- लोगों को सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने और संभव होने पर वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी गई है.
- दिल्ली मेट्रो ने भी यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की ओर प्रोत्साहित करने के लिए सप्ताह के दिनों में 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप चलाने की घोषणा की है.
पराली का धुआं और मौसम भी बढ़ा रहे परेशानी
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं, हवा की धीमी गति और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां प्रदूषकों को वातावरण में जमा कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा में 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच 1,394 खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें पंजाब की 1,249 और हरियाणा की 145 घटनाएं शामिल हैं. हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषण के कण वातावरण से तेजी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. इससे सुबह और रात के समय धुंध तथा स्मॉग की स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है.
रेखा गुप्ता सरकार के सामने प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार के लिए दिवाली से पहले प्रदूषण पर नियंत्रण बड़ी चुनौती बन गया है. सरकार की शीतकालीन कार्ययोजना 1 नवंबर से लागू हो चुकी है. इसके तहत प्रदूषण के स्रोतों पर निगरानी, सड़क की सफाई, धूल नियंत्रण और यातायात प्रबंधन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं.
हालांकि, GRAP-2 लागू होने के बाद भी कई इलाकों में AQI 400 से ऊपर बना हुआ है. ऐसे में सरकारी एजेंसियों के सामने इन उपायों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की चुनौती है.
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की सलाह
301 से 400 के बीच AQI को 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी में रखा जाता है. प्रदूषण के इस स्तर पर सांस संबंधी परेशानी, आंखों में जलन और खांसी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
मौसम और वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में रह सकती है. ऐसे में दिवाली से पहले प्रदूषण नियंत्रण के सरकारी प्रयासों और लोगों की सतर्कता दोनों की अहम भूमिका होगी.
पश्चिम बंगाल सीएम ने स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन क्षेत्रों के विकास की घोषणा की
कोलकाता, 3 नवंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को राज्य के उत्तरी क्षेत्र में दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए कई घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कलिम्पोंग मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की आधारशिला 9 दिसंबर, 2027 को रखी जाएगी। इसके अलावा, हमने दार्जिलिंग, कर्सियांग, कलिम्पोंग, मिरिक और सिलीगुड़ी के सब-डिवीजन और जिला अस्पतालों में बड़े पैमाने पर मरम्मत, आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे में सुधार करने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तर बंगाल में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने से इस क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी। उन्हें उचित इलाज के लिए कहीं और जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने दार्जिलिंग और कर्सियांग को जोड़ने वाली 21 किलोमीटर लंबी रोपवे परियोजना को भी मंजूरी देने की घोषणा की।
उनके मुताबिक, पहाड़ी इलाकों में इस रोपवे परियोजना के शुरू होने से न केवल भारी ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय निवासियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए यात्रा कहीं अधिक आसान और सुखद हो जाएगी।
प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र के सभी सरकारी पर्यटक लॉज की मरम्मत और नवीनीकरण का काम जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने लेबोंग ग्राउंड को अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले आधुनिक स्टेडियम में बदलने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों के खेल प्रेमी युवाओं की प्रतिभा को निखारा जा सके।
मुख्यमंत्री ने दार्जिलिंग स्थित पवित्र और ऐतिहासिक महाकाल मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, बुनियादी ढांचे में बदलाव और नियमित रखरखाव के लिए 19 करोड़ रुपए आवंटित करने की भी घोषणा की।
इन घोषणाओं के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए दार्जिलिंग से भाजपा के लोकसभा सांसद राजू बिस्टा ने कहा कि संचार प्रणालियों, स्वास्थ्य सेवाओं, खेल और आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे उत्तर बंगाल की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
--आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
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