दिल्ली: दो महीने में 4,500 किलो अनुपयुक्त खाद्य भंडार नष्ट, स्वास्थ्य मंत्री ने निरीक्षण बढ़ाने का निर्देश दिया
नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने मंगलवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को राष्ट्रीय राजधानी में खाद्य भंडारों के निरीक्षण को तेज करने का निर्देश दिया ताकि मिलावट के जघन्य कृत्यों को बिना रोक-टोक और सजा के न छोड़ा जा सके।
स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में खाद्य विभाग की यह समीक्षा बैठक दूध, पनीर, चाप और अन्य उत्पादों सहित भारी मात्रा में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बरामदगी के बाद हुई।
दिल्ली सरकार के एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि पिछले दो महीनों में, प्रवर्तन अभियानों के परिणामस्वरूप 4,500 किलो से अधिक असुरक्षित और अनुपयुक्त खाद्य भंडार नष्ट किए गए हैं, जिनमें लगभग 3,440 किलो खोया, चाप और मक्खन, 658 किलो पनीर और 139 किलो एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद शामिल हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले दो महीनों में कुल 429 खाद्य नमूनों की जांच की, जिनमें 307 प्रवर्तन नमूने और 122 निगरानी नमूने शामिल हैं।
राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा जांच अभियान चलाए गए। खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ दिल्ली पुलिस की टीमें भी मौजूद थीं।
विभाग ने पनीर, खोया और घी में मिलावट के खिलाफ विशेष अभियान चलाए और साथ ही मिठाई निर्माताओं, डेयरी प्रतिष्ठानों और फास्ट फूड निर्माताओं पर भी छापेमारी की।
विभाग द्वारा की गई प्रवर्तन गतिविधियों की समीक्षा करते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को चौबीसों घंटे सतर्कता बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि निरीक्षण अभियान केवल त्योहारों तक सीमित न रहकर पूरे वर्ष जारी रहें।
स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि खाद्य सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। खाद्य पदार्थों में मिलावट के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और पूरे वर्ष चौबीसों घंटे निरीक्षण जारी रहेंगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को खोया, पनीर, छेना, मिठाई, नमकीन, घी, खाद्य तेल और सूखे मेवों सहित प्राथमिकता वाली खाद्य श्रेणियों पर विशेष सतर्कता बनाए रखने का भी निर्देश दिया, विशेष रूप से त्योहारों के मौसम में।
बैठक के दौरान दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। खाद्य पदार्थों में मिलावट एक गंभीर अपराध है जो सीधे तौर पर जन स्वास्थ्य के लिए खतरा है, और ऐसे कृत्यों में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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दिल्ली में दिवाली से पहले प्रदूषण का डबल अटैक, AQI 350 के करीब; GRAP-2 लागू
दिवाली से पहले दिल्ली-NCR की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है. राजधानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-2 को लागू कर दिया है. मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 331 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है. वहीं, राजधानी के कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंचने से स्थिति और चिंताजनक हो गई है.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, जहांगीरपुरी में AQI 449 दर्ज किया गया. रोहिणी में 429, पंजाबी बाग में 424, अलीपुर में 413 और विवेक विहार में 410 का स्तर दर्ज हुआ. इन इलाकों में हवा 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गई है.
दिवाली से पहले तेजी से बिगड़ी हवा
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से वायु गुणवत्ता लगातार गिर रही है. 31 अक्टूबर को राजधानी का AQI 117 था, जो 'मध्यम' श्रेणी में आता है. 1 नवंबर को यह बढ़कर 261 और 2 नवंबर को 324 तक पहुंच गया. इसके बाद 3 नवंबर की सुबह औसत AQI 331 दर्ज किया गया.
दिल्ली के अलावा नोएडा में भी प्रदूषण बढ़ा है. यहां औसत AQI 307 दर्ज किया गया, जबकि गुरुग्राम में 284 और गाजियाबाद में 259 का स्तर रहा. इससे साफ है कि प्रदूषण का असर केवल राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के शहर भी प्रभावित हो रहे हैं.
GRAP-2 के तहत क्या-क्या प्रतिबंध लागू?
CAQM ने हवा की गुणवत्ता में गिरावट और अगले कुछ दिनों तक 'बहुत खराब' स्थिति बने रहने के अनुमान को देखते हुए GRAP-2 लागू किया है. इसके तहत सरकारी एजेंसियों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कदम उठाने होंगे.
- सड़कों की रोजाना मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग की जाएगी.
- धूल कम करने के लिए पानी और डस्ट सप्रेसेंट का छिड़काव बढ़ाया जाएगा.
- प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट पर विशेष अभियान चलाए जाएंगे.
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा.
- निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जाएगा.
- कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर निर्धारित पाबंदियां लागू रहेंगी.
- लोगों को सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने और संभव होने पर वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी गई है.
- दिल्ली मेट्रो ने भी यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की ओर प्रोत्साहित करने के लिए सप्ताह के दिनों में 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप चलाने की घोषणा की है.
पराली का धुआं और मौसम भी बढ़ा रहे परेशानी
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं, हवा की धीमी गति और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां प्रदूषकों को वातावरण में जमा कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा में 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच 1,394 खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें पंजाब की 1,249 और हरियाणा की 145 घटनाएं शामिल हैं. हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषण के कण वातावरण से तेजी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. इससे सुबह और रात के समय धुंध तथा स्मॉग की स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है.
रेखा गुप्ता सरकार के सामने प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार के लिए दिवाली से पहले प्रदूषण पर नियंत्रण बड़ी चुनौती बन गया है. सरकार की शीतकालीन कार्ययोजना 1 नवंबर से लागू हो चुकी है. इसके तहत प्रदूषण के स्रोतों पर निगरानी, सड़क की सफाई, धूल नियंत्रण और यातायात प्रबंधन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं.
हालांकि, GRAP-2 लागू होने के बाद भी कई इलाकों में AQI 400 से ऊपर बना हुआ है. ऐसे में सरकारी एजेंसियों के सामने इन उपायों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की चुनौती है.
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की सलाह
301 से 400 के बीच AQI को 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी में रखा जाता है. प्रदूषण के इस स्तर पर सांस संबंधी परेशानी, आंखों में जलन और खांसी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
मौसम और वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में रह सकती है. ऐसे में दिवाली से पहले प्रदूषण नियंत्रण के सरकारी प्रयासों और लोगों की सतर्कता दोनों की अहम भूमिका होगी.
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