RSSB 4th Grade DV Schedule 2026: राजस्थान ग्रेड 4 डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का शेड्यूल जारी, यहां देखें पूरी लिस्ट
RSSB 4th Grade Vacancy 2026: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने चतुर्थ श्रेणी (4th ग्रेड)) भर्ती परीक्षा 2024-25 के सफल उम्मीदवारों के लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है।
US-Iran युद्ध का असर: शेयर बाजार में हलचल, जानिए सोना-चांदी की कीमतों पर क्या पड़ा प्रभाव
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। युद्ध जैसे हालात के बीच दुनिया भर के शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। साथ ही सोना-चांदी और कच्चे तेल की कीमतों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है।
युद्ध के लगभग 10वें दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। वहीं निवेशकों की चिंता के चलते बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
इंटरनेशनल मार्केट में सोने का ताजा भाव
भारतीय समयानुसार सुबह करीब 8:32 बजे इंटरनेशनल मार्केट (कॉमेक्स) में सोने की कीमत लगभग 5099.10 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती दिखाई दी। इसमें करीब 59.60 डॉलर प्रति औंस की गिरावट दर्ज की गई। अगर भारतीय रुपये में देखें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1,66,708 रुपये के आसपास आंकी जा रही है।
चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव
सोने के साथ-साथ चांदी के दामों में भी हलचल देखी जा रही है। इंटरनेशनल मार्केट में चांदी की कीमत करीब 82.66 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत लगभग 2,69,229 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आंकी जा रही है।
मजबूत डॉलर बना बुलियन के लिए दबाव
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद सोना और चांदी में अपेक्षित तेजी देखने को नहीं मिल रही है। केडिया एडवाइजरी के अनुसार, इसका एक बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है।
जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना-चांदी खरीदना महंगा हो जाता है। इससे बुलियन की मांग कुछ हद तक कम हो जाती है और कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
निवेशकों का रुख अभी सतर्क
बाजार में यह भी चर्चा रही कि कुछ केंद्रीय बैंक तरलता बढ़ाने के लिए सोना बेच सकते हैं। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इस तरह की खबरों से निवेशकों के भरोसे पर असर पड़ा है। इसके अलावा शेयर बाजार में आई गिरावट के कारण कई निवेशकों ने नकदी बनाए रखने के लिए अपने सोने-चांदी के निवेश को भी बेच दिया।
पहले ही आ चुकी है बड़ी तेजी
विशेषज्ञों का कहना है कि 2008 या 2020 जैसे संकटों के मुकाबले इस बार बुलियन में पहले ही काफी तेजी आ चुकी थी। इसलिए नए निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई है। इस समय बाजार में निवेशकों के बीच ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार करने की रणनीति ज्यादा देखने को मिल रही है।
आगे क्या हो सकता है असर
अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ता है, तो सोना और चांदी दोबारा सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत हो सकते हैं। लेकिन फिलहाल डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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