Brij Bhushan Sharan Singh कोर्ट से बरी होने के बाद Gonda पहुंचे, समर्थकों का लगा जमावड़ा
गोंडा (उप्र), छह अगस्त महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की अदालत से बरी होने के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बृहस्पतिवार को पहली बार अपने गृह जनपद पहुंचने पर समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। विशेष विमान से अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचने पर उनके समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ उनका स्वागत किया। हवाई अड्डे से लेकर शहर के विभिन्न रास्तों पर स्वागत द्वार बनाये गये और समर्थकों ने जेसीबी मशीनों की मदद से उन पर फूल बरसाए।
इस दौरान शेर आया के नारे लगाए गए और जमकर आतिशबाजी भी की गई। उनके काफिले में सैकड़ों गाड़ियां शामिल थीं। अयोध्या में बृजभूषण सिंह एक खुली जीप में सवार होकर अयोध्या के सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी पहुंचे और मंदिर में भोग और आरती का समय होने के कारण उन्होंने बाहर से ही दर्शन-पूजन करके संतों का आशीर्वाद लिया।
इस दौरान उनके बड़े बेटे और गोंडा सदर सीट से विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने गाड़ी के ऊपर से गदा लहराकर जीत का जश्न मनाया और कहा कि सत्य की जीत हुई है। हनुमानगढ़ी में दर्शन के बाद बृजभूषण सिंह का काफिला नंदिनी नगर स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम के लिए रवाना हो गया, जहां सत्यमेव जयते नाम से एक विशाल रैली का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले उन्होंने नंदिनी गौमाता मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की।
आयोजकों के अनुसार इस महारैली में लगभग दो लाख समर्थकों के जुटने की उम्मीद है। इस भारी भीड़ के लिए महाभोज की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि करीब 40 क्विंटल लड्डू बनवाए गए हैं, जिन्हें कार्यक्रम में आए लोगों के बीच बांटने की व्यवस्था है।
आयोजकों ने बताया कि उनके स्वागत के लिए संस्कृत की शिक्षा ग्रहण कर रहे 500 से अधिक बटुकों को भी अयोध्या से बुलाया गया है।
UPI पर शुल्क का रास्ता साफ, Congress नेता Jairam Ramesh का सरकार पर निशाना
नयी दिल्ली, छह अगस्त कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के लोकसभा से पारित होने के बाद बृहस्पतिवार को सरकार पर निशाना साधा और दावा किया किया कि केंद्र सरकार ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने अच्छे मित्र डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में यूपीआई को कमजोर कर डिजिटल भुगतान क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना चाहती है? रमेश ने एक्स पर पोस्ट में दावा किया कि कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 उस वैधानिक व्यवस्था को समाप्त कर देता है, जिसके कारण अब तक यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन शुल्क-मुक्त रहे हैं।
उनका कहना था कि इस संशोधन से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का मार्ग प्रशस्त होगा, जिसे भविष्य में सभी प्रकार के डिजिटल भुगतान पर लागू किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और उन्हें यूपीआई के उपयोग के लिए भी शुल्क चुकाना पड़ सकता है। रमेश ने सरकार के इस तर्क को भी खारिज किया कि यूपीआई व्यवस्था को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक है।
उन्होंने दावा किया, भारतीय रिजर्व बैंक के पास बिना व्यापारियों अथवा उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाए इस व्यवस्था को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रखने की पर्याप्त क्षमता है। रमेश ने कहा कि वर्ष 2025-26 में भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष हस्तांतरित किया था और इस राशि का एक छोटा हिस्सा भी यूपीआई जैसी महत्वपूर्ण डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को समर्थन देने के लिए पर्याप्त होता। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस संशोधन के पीछे वास्तविक कारण अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की वर्ष 2026 की उस रिपोर्ट से जुड़ा हो सकता है, जिसमें यूपीआई और रुपे के शुल्क-मुक्त होने की आलोचना की गई थी तथा कहा गया था कि इससे वीज़ा और मास्टरकार्ड जैसे अमेरिकी भुगतान मंचों को नुकसान हुआ है।
रमेश ने सवाल किया, क्या नरेन्द्र मोदी सरकार अपने अच्छे मित्र डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में यूपीआई को कमजोर कर डिजिटल भुगतान क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना चाहती है? कांग्रेस नेता ने यह आरोप भी लगाया कि ट्रंप सार्वजनिक रूप से कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने अमेरिकी शुल्क लगाने की धमकी देकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत पर युद्धविराम के लिए दबाव बनाया था। रमेश ने कहा कि अमेरिका ने रूस से भारत के तेल आयात में की जा रही कटौती को भी ट्रंप के निर्देशों का परिणाम बताया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पहले भी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मामले में अमेरिकी दबाव के आगे झुक चुकी है, जिससे किसानों और छोटे कारोबारियों के हित प्रभावित हुए।
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