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युद्ध में क्या रूस भी कूद पड़ा है? अराघची का दावा- अभी तक जानबूझकर मिसाइलों की मारक क्षमता को सीमित रखा

ईरान में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर भारी तबाही मचाई है. इसके कारण पूरे विश्व में बड़ी हलचल पैदा हो चुकी है. इस बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में रूस के साथ अपने देश के रिश्तों को लेकर बयान  दिया है. अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के आरोप हैं, रूस ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों और संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए ईरान की मदद की है. उससे सूचनाएं दे रहा है. इस पर अराघची ने कहा कि ईरान और रूस के बीच सैन्य सहयोग किस तरह की नई बात नहीं है. यह भविष्य में जारी रहने वाला है. उन्होंने कहा कि ईरान और रूस के बीच बेहतर साझेदारी है.

आत्मरक्षा को लेकर ईरान जवाब दे रहा

हालांकि, विदेश मंत्री ने खास खुफिया जानकारी होने से पूरी तरह से इनकार कर दिया है. अराघची का कहना है कि ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता को जानबूझकर 2,000 किलोमीटर तक ही सीमित रखा है. यह बताना कि ईरान ने अमेरिका तक की रेंज वाली मिसाइलें तैयार कर ली हैं. यह पूरी तरह से गलत है. उन्होंने कहा कि यह ईरान पर थोपा गया युद्ध है. आत्मरक्षा को लेकर ईरान जवाब दे रहा है. 

लंबी दूरी की मिसाइलों पर काम करने के कोई सबूत नहीं 

अराघची का कहना है कि ईरान अपनी मिसाइल क्षमतों को 2,000 किलोमीटर (1,240 मील) तक सीमित रखा हुआ है. अराघची के मुताबिक, इस सीमा को बढ़ाने की किसी तरह की योजना नहीं है और न ही लंबी दूरी की मिसाइलों पर काम करने के कोई सबूत हैं. अभी तक मिसाइलों की रेंज पूरे मिडिल ईस्ट और पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्से तक ही है.  उन्होंने कहा कि ईरान नहीं चाहता है कि दुनिया का कोई भी देश को किसी तरह का खतरा उठाना पड़े. अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलों के दावे पूरी तरह से खोखले हैं. 

ईरान अपने लोगों और सुरक्षा के लिए लड़ना जारी रखेगा

स्थायी शांति की मांग युद्ध विराम के बजाय ईरान जंग के स्थायी अंत की तलाश में है. अराघची ने कहा कि किसी भी समझौते से पहले हमलावरों को यह बताना होगा कि उन्होंने यह आक्रामकता क्यों शुरू की. उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर युद्ध थोपने का आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान अपने लोगों और सुरक्षा के लिए लड़ना जारी रखेगा. उनके मुताबिक, ईरान जो कुछ भी कर रहा है, वह आत्मरक्षा के तहत किए जा रहे कानूनी कार्य हैं और देश को ऐसा करने का पूरा अधिकार है.

स्कूल धमाके पर अमेरिका को घेरा 

अब्बास अराघची ने 28 फरवरी को एक स्कूल में हुए धमाके के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाए गए आरोपों का कड़ा विरोध किया. इस धमाके में 165 से ज्यादा लोग, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे, मारे गए थे. अराघची का कहना है कि सबूत इसे अमेरिकी हवाई हमला बताते हैं. सैटेलाइट इमेज और विशेषज्ञ विश्लेषण भी संकेत देते हैं कि धमाका अमेरिकी हवाई हमलों के कारण हुआ था, जिसने रिवोल्यूशनरी गार्ड परिसर को भी निशाना बनाया था. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका नहीं, तो इस हमले के पीछे और कौन हो सकता है.

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