मार्च के महीने में बस करें ये काम, फलों से लद जाएंगे अमरूद के पेड़, जानें खास टिप्स
पश्चिम चम्पारण जिले के मझौलिया प्रखंड के बनकट मुसहरी गांव निवासी कृषक एवं शांभवी बायोटेक के संस्थापक रविकांत पांडे बताते हैं कि अमरूद के पौधों में वर्ष में तीन बार फूल और फल आते हैं. पहली बार फरवरी-मार्च में फूल लगते हैं और जून-जुलाई में फल आना शुरू होता है. दूसरी बार जून-जुलाई में फूल आते हैं, जिनके फल सर्दियों में तैयार होते हैं. तीसरे चरण को हस्त बहार कहा जाता है
अनपढ़ रामजी मांझी की पहल, भीख मांगने वाले बच्चे सीख रहे तिब्बती और नेपाली भाषा
इस स्कूल में बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ तिब्बती और नेपाली भाषा बोलना भी सिखाया जाता है. यहां पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे महादलित टोले से आते हैं. ये बच्चे पहले गांव के सुजातागढ़ और अन्य बौद्ध धार्मिक स्थलों के पास विदेशी पर्यटकों से भीख मांगते थे या फिर चरवाहा का काम करते थे. लेकिन अब वे भीख मांगना और चरवाही छोड़कर स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं और विदेशी भाषाएं सीख रहे हैं.
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