दो जांबाज ईरानी महिलाओं ने साझा किया दमन का दौर:न झुकीं, न डरीं; ईरान में अपने हक के लिए महिलाओं की जंग 47 साल से जारी है
ईरानी महिला अधिकार एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद कहती हैं- ईरान में जारी युद्ध और संघर्ष पर हमें दर्द भी है और उम्मीद भी। मैं नहीं चाहती कि किसी निर्दोष नागरिक को नुकसान पहुंचे। ईरानी लोगों का संदेश है कि हमें इस घायल और खूंखार शासन के भरोसे अकेला न छोड़ें। इस काम को पूरा करें (शासन परिवर्तन), वरना ये लोग निहत्थे मासूमों से बदला लेंगे। यह ईरान के लिए ‘बर्लिन की दीवार’ गिरने जैसा पल है। ईरान की ‘मॉरैलिटी पुलिस’ के डीएनए में ही महिलाओं को पीटना शामिल है। अनिवार्य हिजाब सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि महिलाओं के दमन का प्रतीक है। अगर हम इस दीवार को गिरा देते हैं, तो यह कट्टरपंथी शासन खत्म हो जाएगा। मैं हिजाब के खिलाफ नहीं हूं, बल्कि ‘जबरदस्ती’ के खिलाफ हूं। महिलाओं को चुनने का हक होना चाहिए। निडर हैं ईरानी महिलाएं मुझे 1994 में 18 की उम्र में सरकार विरोधी पर्चे बांटने पर गिरफ्तार किया गया था। 2007 में देश छोड़ना पड़ा। 2014 में मैंने ‘माई स्टेल्थी फ्रीडम’ नाम से फेसबुक पेज शुरू किया, जहां ईरानी महिलाएं बिना हिजाब और अपने संघर्ष की तस्वीरें निडर होकर साझा करती हैं। 80% ईरानी बदलाव चाहते हैं। इस्लामी गणराज्य ने हमसे सब कुछ छीन लिया है, सिवाय उम्मीद के। संसद की 299 सीटों में से 9 पर ही महिलाएं हैं और वे भी शासन की समर्थक हैं, न कि महिलाओं की रक्षक। इस बार शासन के खिलाफ प्रदर्शनों में मध्यम वर्ग और छात्र शामिल हैं। वर्तमान बदलाव उम्मीद जगाता है। सिर्फ मैं ही नहीं, ज्यादातर ईरानी खुश हैं। इस शासन ने मेरे लोगों को मारा और फांसी पर लटकाया है। ईरान में लोग खुशी से नाच रहे थे और उन प्रियजनों की कब्रों पर गए, जिन्हें शासन ने मार दिया था। मेरी दो बहनें, जिन्हें शासन ने अंधा कर दिया था, वे भी सड़कों पर खुशी से झूम उठीं। मैं और मेरी जैसी लाखों महिलाएं न झुकीं और न ही डरीं। संघर्ष जारी है और रहेगा। पहले दिन से विरोध ईरानी एक्टिविस्ट और आर्टिस्ट फरीबा नजेमी कहती हैं- ईरान में इस्लामी क्रांति के पहले महिलाएं स्वतंत्र थीं। 1979 से ही अनिवार्य हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया था। 2017 में एक महिला ने सफेद दुपट्टा लहराकर विरोध दर्ज किया तो 2022 में ‘वुमन लाइफ फ्रीडम’ में महिलाएं सड़कों उतरीं। हकों की यह लड़ाई जारी रहेगी। क्रांति से पहले ईरान की पहचान धर्म के आधार पर तय नहीं होती थी। अधिकतर लोग खुद को सबसे पहले मुसलमान के रूप में पेश नहीं करते थे। समाज खुला था और जीवन शैली में विविधता थी, लेकिन 47 साल पहले 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद समाज पर शरीयत कानून लागू कर दिया गया। उस समय मैं बहुत युवा थी और कट्टरपंथियों के उभार से खुश नहीं थी, हालांकि समाज के एक हिस्से ने नई व्यवस्था को स्वीकार भी कर लिया था। सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ा है। एक समय ऐसा था जब विश्वविद्यालयों में लगभग 66% छात्राएं थीं, लेकिन धीरे-धीरे अवसर कम हो गए। रोजगार में भी रुकावटें आईं। अब तो अगर किसी महिला के सिर पर डाले गए दुपट्टे से बाल का एक हिस्सा भी दिख जाए तो उसे परेशान किया जाता है या हिरासत में ले लिया जाता है। महिलाओं को रोका जाता है, धक्का दिया जाता है, पीटा जाता है या जबरन वैन में बैठाकर ले जाया जाता है। गश्त-ए-इरशाद जैसे संगठन सड़कों पर गश्त करते हैं और ड्रेस कोड के उल्लंघन पर महिलाओं को गिरफ्तार कर सकते हैं। हिरासत में लेते समय सुरक्षा गार्ड महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, युवा लड़कियों को ही निशाना बनाया जाता है। कानून महिलाओं की निजी जिंदगी पर भी पाबंदियां लगाता है। कानून इस तरह बनाए गए हैं कि वे महिलाओं को तलाक लेने से हतोत्साहित करते हैं। विदेश यात्रा के लिए भी महिलाओं को पति की अनुमति चाहिए होती है। अब यह हालात बदलने चाहिए।
देश में पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं होगी:भारत के पास 4,000 करोड़ लीटर कच्चा तेल, सरकार बोली ये 8 हफ्तों के लिए काफी
अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के दौरान भारत को कच्चे तेल की कमी नहीं होगी। भारत के पास अभी में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का 25 करोड़ बैरल (लगभग 4,000 करोड़ लीटर) से ज्यादा का स्टॉक है। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार यह बैकअप इतना है कि अगर सप्लाई पूरी तरह रुक भी जाए, तो देश की पूरी सप्लाई चेन 7 से 8 हफ्तों तक आसानी से चल सकती है। यानी आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कमी की कोई टेंशन नहीं है। यह रिपोर्ट उन दावों को खारिज करती है जिनमें कहा गया था कि भारत के पास केवल 25 दिनों का रिजर्व बचा है। सरकार ने साफ किया है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा अब किसी एक रूट या देश पर निर्भर नहीं है। 10 साल में 27 से बढ़कर 40 देशों तक पहुंच बढ़ी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की एनर्जी खरीद पूरी तरह से 'राष्ट्रहित' पर आधारित है। पिछले 10 सालों में भारत ने अपने तेल सोर्सिंग के दायरे को काफी बढ़ाया है। एक दशक पहले भारत केवल 27 देशों से तेल खरीदता था, जो अब बढ़कर 40 हो गए हैं। वैश्विक स्तर पर तनाव के बावजूद भारत ने अपनी जरूरतों के लिए नए रास्ते तलाशे हैं। हॉर्मुज पर निर्भरता कम हुई दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर अक्सर चिंता जताई जाती है, लेकिन भारत ने अपनी रणनीति बदल ली है। अब भारत का केवल 40% कच्चा तेल इस रास्ते से आता है। बाकी 60% तेल रूस, पश्चिमी अफ्रीका, अमेरिका और मध्य एशिया जैसे वैकल्पिक रास्तों से आता है। रिपोर्ट के मुताबिक वे दिन अब नहीं रहे जब भारत की एनर्जी सिक्योरिटी किसी एक समुद्री रास्ते पर निर्भर थी।" रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ये लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा। इससे भारत में कच्चे तेल की कमी की संभावना नहीं है। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है। 4 साल से स्थिर हैं कीमतें: पाकिस्तान में 55% तो जर्मनी में 22% बढ़ा दाम पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि भारत में पिछले चार सालों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में 0.67% की मामूली गिरावट आई है। इसके विपरीत, इसी दौरान पाकिस्तान में पेट्रोल 55% और जर्मनी में 22% महंगा हुआ है। सरकारी कंपनियों ने झेला 64,500 करोड़ का बोझ आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने भारी नुकसान उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार, पब्लिक सेक्टर की कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल पर 24,500 करोड़ रुपये और एलपीजी (LPG) पर करीब 40,000 करोड़ रुपये का घाटा खुद सहा, ताकि रिटेल कीमतें न बढ़ें। सरकार का दावा है कि पिछले 12 सालों में देश का एक भी पेट्रोल पंप ड्राई नहीं हुआ है। घरेलू सिलेंडर के दाम 60 रुपए बढ़े सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा किया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिल रहा है। पहले यह 853 रुपए की थी। वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई है। ------------------------------------------------------------------------------------- कच्चे तेल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे:सरकार ने होर्मुज रूट प्रभावित होने पर नए रास्तों से कच्चे तेल की सप्लाई 10% बढ़ाई मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने की चिंता खत्म हो गई है। क्योंकि, होर्मुज रूट बंद होने के बाद सरकार ने कुल इम्पोर्ट का 10% कच्चा तेल नए रूट से मंगाना शुरू कर दिया है। सरकार ने ये फैसला सप्लाई प्रभावित होने के कारण लिया है। पूरी खबर पढ़ें
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