राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान सुरक्षा और प्रोटोकॉल में हुई कथित कमियों को लेकर विवाद गहरा गया है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती से इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। केंद्र ने विशेष रूप से चार बिंदुओं, राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के समय मुख्यमंत्री और डीजीपी की अनुपस्थिति, वॉशरूम में पानी की कमी, रास्ते में गंदगी और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी पर जवाब मांगा है।
राष्ट्रपति ने जताई नाराजगी
दौरे के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने खुद कार्यक्रमों के इंतजामों पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनसे मिलने क्यों नहीं आईं। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल में बदलाव और लोगों की कम मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'आमतौर पर राष्ट्रपति के आगमन पर मुख्यमंत्री को स्वागत करना चाहिए, लेकिन वे नहीं आईं। शायद राज्य सरकार आदिवासियों की भलाई नहीं चाहती, इसीलिए उन्हें कार्यक्रम में आने से रोका गया।' हालांकि, उन्होंने ममता बनर्जी को अपनी छोटी बहन जैसा भी बताया।
ममता बनर्जी का पलटवार
इन आरोपों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया के जरिए सफाई दी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने पहले ही राष्ट्रपति सचिवालय को इंतजामों की कमी के बारे में सूचित कर दिया था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत प्लान के अनुसार सिलीगुड़ी के मेयर और जिला मजिस्ट्रेट ने राष्ट्रपति का स्वागत किया था और वह खुद उस प्लान का हिस्सा नहीं थीं। ममता बनर्जी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए राष्ट्रपति के पद का गलत इस्तेमाल कर रही है।
प्रधानमंत्री ने घटना को बताया शर्मनाक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरी घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक करार दिया है। उन्होंने कहा कि एक आदिवासी राष्ट्रपति का इस तरह अपमान करना लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वालों को दुखी करता है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इसकी गरिमा का सम्मान होना चाहिए।
चुनाव से पहले बढ़ी तल्खी
बंगाल में आगामी चुनावों को देखते हुए बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रधानमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जब पूरा सिस्टम और केंद्रीय एजेंसियां बंगाल के खिलाफ खड़ी हो जाती हैं, तो बंगाल और भी मजबूती से उनका मुकाबला करता है।
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चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य अभियान की निंदा करते हुए कहा कि यह तनाव "कभी होना ही नहीं चाहिए था"। अल जज़ीरा के अनुसार, वरिष्ठ राजनयिक ने मौजूदा शत्रुता को तत्काल समाप्त करने और राजनयिक वार्ता की ओर शीघ्र लौटने का आह्वान किया।
बीजिंग में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में वांग यी ने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य शक्ति का प्रयोग क्षेत्र में गहरे संकट का "कभी समाधान नहीं करेगा"। उन्होंने चेतावनी दी कि बल प्रयोग स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करता है, और कहा कि मजबूत मुट्ठी का मतलब मजबूत तर्क नहीं होता। दुनिया जंगल के कानून की ओर नहीं लौट सकती।
अल जज़ीरा ने आगे बताया कि विदेश मंत्री ने ईरानी सरकार को अस्थिर करने के उद्देश्य से किए गए किसी भी प्रयास का चीन द्वारा कड़ा विरोध व्यक्त किया। वांग ने कहा कि उनका मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए कोई जनसमर्थन नहीं है, और उनका सुझाव है कि ऐसे उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को और भड़काएंगे।
बीजिंग की ओर से संयम बरतने का यह आह्वान ऐसे समय आया है जब इज़राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने घोषणा की है कि इज़राइली वायु सेना (आईएएफ) ने राजधानी में कई ईरानी सैन्य ठिकानों पर लक्षित हमले किए हैं। एक पोस्ट में, सैन्य अधिकारी के खाते ने कहा कि तेहरान में आईआरजीसी से संबंधित कई ईंधन भंडारण परिसरों पर हमला किया गया।
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