Donald Trump: खाड़ी में जारी भीषण युद्ध के बीच रूस से तेल खरीदेगा भारत! ट्रंप बोले- 'दबाव कम करने के लिए दी 30 दिनों की छूट'
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PPF में निवेश करें या नहीं? जानिए 2026 में पब्लिक प्रोविडेंट फंड का पूरा गणित
मार्च का महीना आते ही नौकरीपेशा लोगों के बीच टैक्स बचाने की दौड़ शुरू हो जाती है. कंपनियों के एचआर विभाग निवेश से जुड़े दस्तावेज मांगने लगते हैं और कई लोग जल्दबाजी में पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF में पैसा डाल देते हैं.
हालांकि आज के समय में निवेश के कई ऑप्शंन मौजूद हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि PPF वास्तव में कितना फायदेमंद है और किन लोगों के लिए यह निवेश सही माना जाता है.
PPF का EEE टैक्स फायदा
पब्लिक प्रोविडेंट फंड को निवेश की दुनिया में खास माना जाता है क्योंकि यह EEE यानी Exempt-Exempt-Exempt कैटेगरी में आता है. इसका मतलब है कि निवेश से जुड़े तीनों चरणों पर टैक्स छूट मिलती है. सबसे पहले, जो पैसा आप PPF में जमा करते हैं उस पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है.
दूसरा फायदा यह है कि इस निवेश पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है. वर्तमान में PPF पर लगभग 7.1 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जा रहा है. तीसरा बड़ा फायदा यह है कि 15 साल की मैच्योरिटी पूरी होने पर मिलने वाली पूरी राशि भी टैक्स से मुक्त होती है.
15 साल का लॉक-इन पीरियड
PPF की सबसे बड़ी शर्त इसका 15 साल का लॉक-इन पीरियड है. इसका मतलब यह है कि आपका निवेश लंबी अवधि के लिए फिक्स रहता है. हालांकि इसे पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जाता. यह निवेशक को लंबे समय तक बचत करने का अनुशासन सिखाता है और रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए फंड बनाने में मदद करता है.
फिर भी अगर अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए तो कुछ सीमित सुविधाएं उपलब्ध हैं. निवेशक तीसरे साल से लोन ले सकता है और छठे साल के बाद आंशिक निकासी की अनुमति भी मिलती है.
15 साल में कितना बन सकता है फंड
अगर कोई निवेशक हर साल PPF में अधिकतम 1.5 रुपये लाख जमा करता है और ब्याज दर करीब 7.1 प्रतिशत बनी रहती है, तो 15 साल में एक बड़ा फंड तैयार हो सकता है.
इस स्थिति में मैच्योरिटी के समय कुल राशि लगभग 40 से 42 रुपये लाख तक पहुंच सकती है. यही कारण है कि इसे सुरक्षित और लंबी अवधि के निवेश का मजबूत विकल्प माना जाता है.
नई टैक्स व्यवस्था में क्या बदला
नई टैक्स व्यवस्था लागू होने के बाद निवेश से जुड़े कई समीकरण बदले हैं. अगर कोई व्यक्ति नई टैक्स व्यवस्था चुनता है तो उसे धारा 80C के तहत मिलने वाली टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलता.
इस स्थिति में PPF का मुख्य फायदा केवल सुरक्षित निवेश और टैक्स-फ्री ब्याज तक सीमित रह जाता है. इसलिए निवेश का फैसला करते समय अपनी टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखना जरूरी है.
किन लोगों के लिए सही है PPF?
PPF उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है जो अपने पैसे की सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं. इसमें सरकार की गारंटी होती है, इसलिए जोखिम लगभग नहीं के बराबर होता है.
इसके अलावा यह उन लोगों के लिए भी अच्छा विकल्प है जो रिटायरमेंट के लिए टैक्स-फ्री फंड बनाना चाहते हैं या जिनके पोर्टफोलियो में पहले से ही शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश अधिक हैं.
स्मार्ट निवेश की रणनीति क्या होती है?
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश करते समय हमेशा डाइवर्सिटी बनाए रखना जरूरी है. एक संतुलित निवेशक अपनी बचत का कुछ हिस्सा PPF जैसे सुरक्षित विकल्पों में रखता है और कुछ हिस्सा म्यूचुअल फंड जैसे ग्रोथ-ओरिएंटेड निवेश में लगाता है.
टैक्स बचाने वाले म्यूचुअल फंड यानी ELSS में लॉक-इन अवधि सिर्फ 3 साल होती है और लंबे समय में इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है.
मतलब PPF आज भी एक भरोसेमंद निवेश विकल्प बना हुआ है. हालांकि इसमें निवेश करने से पहले अपनी आय, टैक्स व्यवस्था और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है. सही योजना के साथ यह भविष्य के लिए मजबूत और सुरक्षित फंड तैयार करने में मदद कर सकता है.
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