भीषण गर्मी की चपेट में दिल्ली समेत पूरा उत्तर भारत, मार्च के पहले हफ्ते में टूटा 50 साल का रिकॉर्ड
राजधानी दिल्ली में गर्मी ने इस बार पिछले 50 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. शनिवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो मार्च के पहले हफ्ते में पिछले पांच दशकों में सबसे ज्यादा है. इससे पहले 5 मार्च 1999 को तापमान 34.8 डिग्री दर्ज किया गया था. आलम यह है कि मार्च की शुरुआत में ही लोगों को जून जैसी तपती गर्मी झेलनी पड़ रही है. आज भी दिल्ली में अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 17 डिग्री रहने का अनुमान है.
उत्तर भारत के राज्यों का हाल
सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी पारा सामान्य से काफी ऊपर चल रहा है. कई शहरों में तापमान सामान्य से 4 से 8 डिग्री तक ज्यादा दर्ज किया गया है. मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ सकती है. हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में 'हीटवेव' यानी लू चलने की आशंका भी जताई गई है.
क्या बारिश से मिलेगी राहत?
भीषण गर्मी के बीच एक अच्छी खबर भी है. 9 से 12 मार्च के आसपास एक 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है. इसकी वजह से दिल्ली, यूपी और आसपास के इलाकों में बादल छा सकते हैं और हल्की बारिश हो सकती है. मौसम विभाग का कहना है कि 9 और 10 मार्च को तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ फुहारें पड़ सकती हैं, जिससे बढ़ते तापमान से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज
यूपी की राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में भी सूरज की तपिश बढ़ गई है. यहां तापमान सामान्य से 3 से 7 डिग्री तक ज्यादा चल रहा है. हालांकि, 9 और 10 मार्च को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं और हल्की बारिश होने के आसार हैं. इससे उमस भरी गर्मी से कुछ समय के लिए निजात मिल सकती है.
पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, 7 से 13 मार्च के बीच जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है. वहीं, मैदानी इलाकों में कहीं-कहीं लू (Heatwave) चलने की स्थिति बनी हुई है. पहाड़ों पर होने वाली इस हलचल का असर मैदानी इलाकों के तापमान पर भी पड़ेगा, जिससे पारा कुछ डिग्री नीचे गिर सकता है.
देश के अन्य हिस्सों की स्थिति
मौसम का यह बदलाव सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं है. 9 से 11 मार्च के बीच ओडिशा, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी मौसम बिगड़ सकता है. इन राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है. बिहार में 9 और 10 मार्च को, जबकि झारखंड में 11 मार्च तक हल्की बारिश की संभावना जताई गई है.
कुल मिलाकर, आने वाले कुछ दिन मौसम के उतार-चढ़ाव भरे रहने वाले हैं. एक तरफ जहां सूरज की गर्मी परेशान करेगी, वहीं दूसरी तरफ बीच-बीच में होने वाली बारिश राहत का झोंका लेकर आएगी.
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ईरान से युद्ध के बीच ट्रंप ने तेल संकट की चिंताओं को किया नजरअंदाज
वाशिंगटन, 8 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ जारी युद्ध के बावजूद उन्हें ईंधन की बढ़ती कीमतों की चिंता नहीं है। वैश्विक तेल बाजारों में पर्याप्त आपूर्ति है और कीमतों में कोई भी उछाल अस्थायी होगा।
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने इस संघर्ष को अल्पकालिक अभियान बताया और इसके आर्थिक प्रभाव को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा, मुझे अभी तेल की कीमतों की चिंता नहीं है।
वहीं, ट्रंप ने सैन्य अभियान को लंबे समय से लंबित हस्तक्षेप बताया। उन्होंने कहा, यह एक ऐसा छोटा सा प्रयास है, जो 47 वर्षों से होना चाहिए था। किसी भी राष्ट्रपति में इसे करने का साहस नहीं था।
ट्रंप ने भविष्यवाणी की कि तेल बाजार अल्पावधि में प्रतिक्रिया दे सकते हैं, लेकिन जल्दी ही स्थिर हो जाएंगे। उन्होंने कहा, हमने अनुमान लगाया था कि तेल की कीमतें बढ़ेंगी, वे नीचे भी आएंगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बावजूद तेल की वैश्विक आपूर्ति मजबूत बनी हुई है। हमारे देश में बहुत अधिक मात्रा में तेल है और दुनिया में भी तेल का बड़ा भंडार मौजूद है।
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वाशिंगटन वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव कम करने के लिए अतिरिक्त कदम उठा सकता है, तो उन्होंने कहा, अगर जरूरत पड़ी, तो मैं थोड़ा दबाव कम करने के लिए ऐसा करूंगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उपयोग करने पर भी विचार कर सकती है।
साथ ही, ट्रंप ने पिछली सरकार की अमेरिकी आपातकालीन तेल भंडार को कम करने के लिए आलोचना की। उन्होंने कहा, मैंने इसे भरा था और उन्होंने इसे अब तक के सबसे निचले स्तर पर ला दिया। बाजार की परिस्थितियों के आधार पर अमेरिका भंडार को फिर से भरने का निर्णय लेगा। हम उचित समय पर शुरुआत करेंगे।
राष्ट्रपति ने विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले जहाजरानी संबंधी चिंताओं पर प्रतिक्रिया दी। जलमार्ग से यातायात कम होने के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, यह जहाजों की मर्ज़ी है। उन्होंने तर्क दिया कि संघर्ष के दौरान ईरान की नौसैनिक क्षमता पहले ही बुरी तरह कमजोर हो चुकी थी।
ट्रंप ने कहा, हमने उनकी नौसेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। नौसेना अब समुद्र की तलहटी में है।
--आईएएनएस
ओपी/एएस
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