Explainer: सत्ता से बेदखली से वापसी के ऐलान तक... बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना के कैसे गुजरे दो साल, देखें पूरी टाइम, दर्ज हुए 663 मुकदमे
Sheikh Hasina Two Year Timeline: भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में साल 2024 में राजनीतिक उथल पुथल हुई थी. कई सप्ताह तक चले हिंसक छात्र आंदोलन और देशभर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बीच शेख हसीना ने 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया. इसके तुरंत बाद वह अपनी बहन शेख रेहाना के साथ हेलीकॉप्टर से ढाका छोड़कर भारत आ गईं.
दरअसल, 5 जून 2024 को बांग्लादेश हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में कोटा व्यवस्था बहाल करने का फैसला दिया, जिसके विरोध में छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ. जुलाई तक यह आंदोलन सरकार विरोधी अभियान में बदल गया और हिंसक झड़पों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई. 3-4 अगस्त को "नॉन-कोऑपरेशन मूवमेंट" शुरू होने के बाद हालात और बिगड़ गए. 5 अगस्त 2024 को प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री आवास गणभवन की ओर बढ़ने लगे, जिसके बाद शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी बहन शेख रेहाना के साथ भारत आ गईं. 8 अगस्त को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी. बीते दिन हसीना ने नई दिल्ली में प्रेस वार्ता आयोजित की. सत्ता से हटने के 2 साल बाद प्रेस वार्ता के रूप पहली बार शेख हसीना कैमरे के सामने आईं.
Former Bangladeshi PM Sheikh Hasina announced via audio call at a press conference in Delhi that she will return to Bangladesh — after initially saying she wasn’t expecting to take questions, she couldn’t help stepping in to answer one from the lone Bangladeshi journalist in… pic.twitter.com/0vlVPFYxLa
— Vandana (@vandana_menon) August 5, 2026
कैसे 61 दिनों में चली गई सरकार?
5 जून 2024 को बांग्लादेश हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए कोटा बहाल करने का फैसला सुनाया, जिसके विरोध में छात्रों ने देशभर में प्रदर्शन शुरू कर दिए. देखते ही देखते यह आंदोलन सरकार विरोधी अभियान में बदल गया. 4 अगस्त 2024 को प्रदर्शनकारियों ने "लॉन्ग मार्च टू ढाका" का ऐलान किया, जबकि बिगड़ते हालात को देखते हुए सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को चेतावनी दी कि बल प्रयोग से देश गृहयुद्ध जैसी स्थिति में पहुंच सकता है. अगले ही दिन, 5 अगस्त को लाखों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री आवास 'गणभवन' की ओर बढ़ने लगे. बढ़ते दबाव के बीच सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान के आग्रह पर शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी बहन शेख रेहाना के साथ भारत आ गईं. इसके बाद सेना ने अंतरिम सरकार के गठन की घोषणा कर दी.
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इस्तीफे के बाद क्या हुआ?
शेख हसीना के इस्तीफे के बाद 8 अगस्त 2024 को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया. इसके बाद शेख हसीना भारत में रहने लगीं. बांग्लादेश में उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए और अंतरिम सरकार ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी की. नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक बदले की कार्रवाई हैं. उन्होंने दावा किया कि उचित समय आने पर वह बांग्लादेश लौटेंगी और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगी.
नई दिल्ली में प्रेस वार्ता में क्या बोलीं हसीना?
नई दिल्ली में दो साल बाद पहली सार्वजनिक मौजूदगी के दौरान शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हैं और उन्हें राजनीति से बाहर करने के लिए न्यायपालिका का इस्तेमाल किया जा रहा है. हसीना ने अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग करते हुए कहा कि किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर रखना उचित नहीं है.
उन्होंने दावा किया कि उनके शासनकाल में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही थी, लेकिन मौजूदा सरकार के दौरान विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई है, निवेश घटा है और बेरोजगारी बढ़ी है. उन्होंने राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की और आरोप लगाया कि सरकार विरोधी नेताओं और कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में जेल भेजा गया है. हसीना ने यह भी कहा कि 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच नहीं होने दी गई.
उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाएं और कानून का राज कमजोर हुआ है. साथ ही, उन्होंने ऐलान किया कि वह दिसंबर 2026 में हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी, क्योंकि उन्हें देश की जनता के समर्थन पर पूरा भरोसा है.
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शेख हसीना पर कितने केस दर्ज हैं?
शेख हसीना के खिलाफ कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ अब तक 663 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें 453 हत्या के मामले शामिल हैं, जबकि बाकी मामलों में मानवता के खिलाफ अपराध, भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग, जबरन लोगों को गायब कराने, राजद्रोह और अंतरिम सरकार को अस्थिर करने की कथित साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इनमें से कई मामले 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े हैं. हालांकि, शेख हसीना इन सभी आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताती हैं. नई दिल्ली में 5 अगस्त 2026 को आयोजित अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले राजनीति से प्रेरित हैं और उन्हें सत्ता से दूर रखने के उद्देश्य से बनाए गए हैं.
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PM से प्रेस कॉन्फ्रेंस तक... 2 साल की पूरी टाइमलाइन
5 जून 2024: कोटा विवाद से आंदोलन की शुरुआत
- बांग्लादेश हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए कोटा बहाल किया.
- फैसले के विरोध में छात्रों ने देशव्यापी आंदोलन शुरू किया.
जुलाई 2024: छात्र आंदोलन बना सरकार विरोधी अभियान
- प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए.
- कई जगह हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत और घायल होने की खबरें आईं.
आंदोलन का केंद्र सरकार से इस्तीफे की मांग बन गया.
3-4 अगस्त 2024: सरकार पर बढ़ा दबाव
- प्रदर्शनकारियों ने 'नॉन-कोऑपरेशन मूवमेंट' शुरू किया.
- 'लॉन्ग मार्च टू ढाका' का ऐलान किया गया.
- सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को हालात गंभीर होने की चेतावनी दी.
5 अगस्त 2024: 15 साल का शासन खत्म
- लाखों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री आवास 'गणभवन' की ओर बढ़े.
- शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया.
- वह अपनी बहन शेख रेहाना के साथ हेलीकॉप्टर से भारत आ गईं.
- सेना ने अंतरिम सरकार बनाने की घोषणा की.
8 अगस्त 2024: नई सत्ता की शुरुआत
- नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली.
अगस्त 2024–जुलाई 2026: निर्वासन और कानूनी कार्रवाई
- शेख हसीना भारत में रहीं.
- उनके खिलाफ हत्या, मानवता के खिलाफ अपराध और भ्रष्टाचार समेत सैकड़ों मामले दर्ज हुए.
- बांग्लादेश ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की.
- अवामी लीग पर कार्रवाई हुई और भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ा.
4 अगस्त 2026: भारत सरकार की सफाई
- विदेश मंत्रालय ने कहा कि शेख हसीना के कार्यक्रम का आयोजन एक निजी संस्था कर रही है.
- सरकार ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम में व्यक्त विचार भारत सरकार के नहीं हैं.
5 अगस्त 2026: दो साल बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस
- नई दिल्ली में शेख हसीना पहली बार सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने आईं.
- उन्होंने दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटने का दावा किया.
- अपने खिलाफ दर्ज मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया.
- अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग की.
- अंतरिम सरकार पर लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया.
- राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की.
सीएएस सिस्टम लागू होने के बाद सेंसेक्स की पहली एक्सपायरी, देखने को मिल सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव
BSE Sensex बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के मुख्य सूचकांक सेंसेक्स के डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की गुरुवार को वीकली एक्सपायरी है और बीएसई कैश मार्केट में कम तरलता के बीच हाल ही में लागू हुए नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (सीएएस) के कारण बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव देखने मिल सकता है. मंगलवार को निफ्टी की एक्सपायरी के बाद बाजार भागीदार ट्रेडिंग में सावधानी बरत रहे हैं. उस दिन क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान बेंचमार्क इंडेक्स में 150 अंक से अधिक की तेजी आई थी, जिससे डेरिवेटिव्स में जबरदस्त हलचल हुई और कई ट्रेडर्स हैरान रह गए थे.
निफ्टी स्पॉट और फ्यूचर्स की कीमतों के बीच अंतर हुआ कम
कई विश्लेषकों का मानना है कि सेंसेक्स को लेकर चिंताएं अधिक हैं, क्योंकि इंडेक्स से जुड़े कैश मार्केट में एनएसई के मुकाबले ऑक्शन विंडो के दौरान काफी कम भागीदारी होती है. इससे इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि फाइनल सेटलमेंट प्राइस पर बड़े ट्रेड का असर अधिक पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि इस सिस्टम की कामयाबी बाजार में व्यापक भागीदारी पर निर्भर करती है. मार्केट एक्सपर्ट्स ने यह भी बताया कि हाल के सत्र में एनएसई पर ऑक्शन वॉल्यूम में सुधार हुआ है और निफ्टी स्पॉट और फ्यूचर्स की कीमतों के बीच का अंतर कम हुआ है, लेकिन सेंसेक्स क्लोजिंग ऑक्शन में भागीदारी अभी भी तुलनात्मक रूप से कम है.
अनिश्चितता को देखते हुए, गुरुवार की एक्सपायरी से पहले सेंसेक्स कॉल ऑप्शन पर इम्प्लाइड वोलैटिलिटी तेजी से बढ़ी, जिससे पता चलता है कि ट्रेडर्स सेशन के आखिर में कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की अधिक संभावना मानकर चल रहे हैं. इसके अलावा, सीएएस के तहत, स्टॉक एक्सचेंज एक तय ऑक्शन विंडो के दौरान खरीदने और बेचने के ऑर्डर इकट्ठा करते हैं और एक सिंगल इक्विलिब्रियम प्राइस तय करते हैं जिस पर ज्यादा से ज्यादा ऑर्डर मैच हो सकें. हालांकि, यह सिस्टम मार्केट बंद होने के समय कीमत का सही पता लगाने में सुधार के लिए शुरू किया गया था.
अपना एक्सपोजर कम कर सकते हैं ट्रेडर्स
इस बीच, कुछ लोगों ने चेतावनी दी कि कम लिक्विडिटी के कारण सेटलमेंट प्राइस को प्रभावित करना आसान हो सकता है, खासकर अगर ऑक्शन के दौरान कुछ बड़े स्टॉक्स (हेवीवेट स्टॉक्स) में जोरदार खरीदारी या बिकवाली होती है. उनके अनुसार, इंडेक्स के बड़े स्टॉक्स की कीमतों में मामूली बदलाव का भी सेंसेक्स के क्लोजिंग लेवल और नतीजतन, ऑप्शन सेटलमेंट पर बहुत अधिक असर पड़ सकता है. दूसरी ओर, कुछ जानकारों का मानना है कि ऐसी चिंताएं शायद बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही हैं. उनका कहना है कि नए सिस्टम के तहत पहली सेंसेक्स एक्सपायरी से पहले आक्रामक पोजीशन लेने के बजाय, मंगलवार की निफ्टी एक्सपायरी के दौरान देखी गई अस्थिरता के बाद ट्रेडर्स अपना एक्सपोजर कम कर सकते हैं. हालांकि अभी कुछ चिंताएं हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम से होने वाली कोई भी अस्थिरता अस्थायी होगी, क्योंकि समय के साथ बाजार में भागीदारी बढ़ेगी और कीमत तय करने की प्रक्रिया बेहतर होगी.
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