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अमेरिका-इज़रायल, ईरान के भीषण युद्ध से तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर दुनिया

जिस दौर में पूरी दुनिया में हर देश के हुक्मरान अपने-अपने देश का सर्वांगीण विकास करने  का ढिंढोरा पीट रहे हो, उस दौर में विकास के नाम पर हथियारों की एक ऐसी तेज़ दौड़ दुनिया में चल रही है, जिसने अभी तक तो कई देशों में भीषण युद्ध तक भी करवा दिया है और कई देशों को युद्ध के मुहाने पर लाकर के खड़ा कर दिया है, दुनिया भर में आधुनिक हथियारों व तकनीक के दम पर 21वीं सदी में युद्ध की तरह-तरह की पटकथाएं लिखी जा रही है। लेकिन 21वीं सदी के आधुनिक युग में दुनिया में एक सबसे बड़े सैन्य टकराव की मज़बूत नींव रखने वाले ईरान, इज़रायल और अमेरिका का महायुद्ध अगर जल्द ही नहीं रुका तो यह पूरी दुनिया के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है, यह युद्ध एकबार फिर से दुनिया का नक्शा बदलने वाला साबित हो सकता है। यह युद्ध शुरुआती चंद घंटों के बाद ही भीषण युद्ध के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है, मीडिया सूत्रों के अनुसार इस युद्ध में सभी पक्षों को पहले दिन से ही जान-माल का भारी नुक़सान हुआ था, जो एक हफ्ता बीतने के बाद अब भी निरंतर जारी है। युद्ध क्षेत्र से बड़े पैमाने पर लोग बहुत ही तेज़ी के साथ से विस्थापित होते जा रहे हैं, विस्थापित होते हुए इन सभी लोगों के लिए राहत व पुनर्वास कैंपों के साथ-साथ रोटी, आवास व इलाज़ आदि की व्यवस्था करना दुनिया के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अभी तक के छः दिनों के इस युद्ध में ईरान में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के साथ-साथ सेना के सर्वोच्च कमांडरों, सैन्यकर्मियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आम लोग भी इस भीषण युद्ध की विभिषिका की भेंट चढ़ चुके हैं, वहीं इज़रायल व अमेरिका के साथ-साथ अन्य देशों को भी जान-माल की भारी क्षति उठानी पड़ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से दुनिया के सामने आये इन मौत के आंकड़ो पर नज़र डालें तो मात्र छः दिनों के अब-तक के इस भीषण युद्ध में ईरान में 1045, लेबनान में 50, इजरायल में 11, जॉर्डन में 5, कुवैत में 4, यूएई में 3, बहरीन में 1 और ओमान में 1 मौतें हो चुकी हैं। साथ ही ईरान के प्रचंड हमले से कुवैत में स्थित अमेरिका एंबेसी में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है और जिस तेज़ी गति से यह युद्ध चल रहा है आने वाले दिनों में ईरान, इजरायल-अमेरिका के साथ-साथ यह भीषण युद्ध वैश्विक स्तर पर समीकरणों के बदलाव की एक नई नींव रख सकता है। 

दुनिया के साथ-साथ आगामी दिनों में इस युद्ध का भारत पर भी जबरदस्त प्रभाव पड़ने की पूरी संभावना हैं क्योंकि युद्ध से प्रभावित अलग-अलग देशों में लगभग 1 करोड़ से भी अधिक भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, जिन लोगों को सुरक्षित निकाल कर भारत लाना बड़ी चुनौती है। वहीं खाड़ी देशों से जिस तरह से भारतीय बिजनेसमैन व कामगार हर माह भारी-भरकम धनराशि कमाकर भारत भेजते हैं, आने वाले दिनों में उस धनराशि में भारी कमी होने की संभावना है। वहीं तेल की कीमतों में लगती तेज़ी की आग से दुनिया के साथ भारत में भी मंहगाई का वेग बढ़ने की पूरी संभावना है और युद्ध की विभीषिका से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में में कमी होने की पूरी संभावना है, जो विकास के पथ पर बहुत ही तेज़ी से अग्रसरित भारत के लिए उचित नहीं है। वहीं जिस तरह से आधुनिक हथियारों से सुसज्जित अमेरिका सेना की एक पनडुब्बी ने हिन्द महासागर क्षेत्र में आकर के ईरानी नौसेना के जहाज़ को निशाना बनाकर के ईरान के सैकड़ों नौसेनिकों को मार डाला है, वह भारत की संप्रभुता के लिए एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण स्थिति है और भारत को भी इस युद्ध में शामिल करने की एक बड़ी साज़िश लगती है।

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हालांकि भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर लगी हुई हैं कि क्या आने वाले दिनों में ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच कूटनीति की मेज पर इस युद्ध का कोई तात्कालिक या दीर्घकालिक समाधान निकलेगा या फिर एक दर्जन से अधिक देशों में ड्रोन व  बैलिस्टिक मिसाइलों के जलते हुए घातक बारूद की तीक्ष्ण गंध आने वाले दिनों प्रतिशोध की प्रचंड ज्वाला के साथ एक और भीषण विश्वयुद्ध की पटकथा को इतिहास में दर्ज करेगी। इस युद्ध क्षेत्र के हालातों को देखकर के लगता है कि हथियारों की होड़ व प्रतिशोध की आग में मानवीय संवेदनाएं व इंसानियत का बहुत ही तेज़ी से त्याग होता जा रहा है। 

हालांकि इन घातक हमलों पर ईरान कह रहा है कि मध्य-पूर्व के यह सभी इस्लामिक देश उसकी बैलिस्टिक मिसाइलों के निशाने पर इसलिए आ गए हैं, क्योंकि इन सभी देशों में अमेरिका के सैन्य बेस व जंगी जहाज मौजूद हैं, इन सभी सैन्य बेसों का उपयोग ईरान के ख़िलाफ़ इज़रायल व अमेरिका के द्वारा की गई साझा सैन्य कार्रवाई में हुआ है, इसलिए ईरान भी आत्मरक्षा के लिए खाड़ी देशों में बने इन सभी सैन्य बेसों व जंगी जहाज़ों के बेड़ों को निशाना बना रहा है, ना कि उन देशों को निशाना बना रहा है। लेकिन ईरानी हमलों के पीछे की कटु सच्चाई यह भी है कि वह अमेरिका व इज़रायल के खाड़ी देशों में बने हुए बड़े-बड़े आर्थिक प्रतिष्ठानों, डाटा सेंटरों व एंबेसी आदि को निशाना बनाकर के दुश्मन देशों को आर्थिक रूप से भारी क्षति पहुंचाने की मंशा रखता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरानी सेना भी कह रही है कि अमेरिका और इज़रायल के द्वारा ईरान पर किए जा रहे बड़े पैमाने पर हमलों के जवाब में ईरान सेना ने भी अमेरिका व इज़रायल के पिट्ठू बने हुए कुछ खाड़ी देशों के क्षेत्र में हमले शुरू कर दिए हैं। वहीं जान-माल की भारी क्षति के बावजूद भी ईरान युद्ध भूमि में अपने घातक ड्रोन व घातक बैलिस्टिक मिसाइलों से जमकर सटीक निशाने लगा रहा है। जिन हमलों पर ईरान का शासन-प्रशासन, विदेश व रक्षा मंत्रालय और सेना के शीर्ष कमांडर लगातार कह रहे हैं कि ईरान अपनी आत्मरक्षा के लिए युद्ध भूमि में सभी सैन्य तरीक़ों का इस्तेमाल ऐसी ही करता रहेगा। जिससे ख़फ़ा होकर के ताकत के मद में चूर अमेरिका व इज़रायल ईरान के भूगोल को बदल कर के धरा से उसका अस्तित्व ही मिटाने पर अमादा है।

वहीं भीषण युद्ध के हालात में ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने अपने बयान में कहा कि ईरान अमेरिका-इज़रायल के हमलों की जवाबी कार्रवाई में 'प्रॉमिस 4' अभियान के तहत इज़रायल व अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बना रहा है। मीडिया सूत्रों के अनुसार ईरान के शीर्ष नेतृत्व के दिशा निर्देशों व मंशा के अनुरूप ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दुनिया भर में तेल खपत का पांचवां हिस्सा तेल पहुंचाने के एक महत्वपूर्ण मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद करने की घोषणा भी कर दी है। 'आईआरजीसी' ने कहा है कि ओमान और ईरान के बीच से गुजरने वाले समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने वाले किसी भी जहाज को आग लगा दी जाएगी। क्योंकि ईरान अच्छे से जानता हैं कि इस मार्ग के बंद होने से तेल की वैश्विक कीमतें बहुत तेज़ी से दुनिया भर में बढ़ सकती है। जिसके चलते अमेरिका व इज़रायल पर युद्ध रोकने का दवाब बढ़ेगा। 'आईआरजीसी' के कमांडर के सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जबारी ने दुनिया को चेतावनी देते हुए कहा है कि 'तेल की कीमत 81 डॉलर तक पहुंच गई है और दुनिया इसके कम से कम 200 डॉलर तक पहुंचने का इंतजार कर रही है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' अब बंद है, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर नेवी और आर्मी में हमारे हीरो 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने की इच्छा रखने वाले किसी भी जहाज को आग लगा देंगे।' जो चेतावनी युद्ध से ग्रस्त क्षेत्र में उठ रही आग की प्रचंड लपटों में घी डालने का कार्य कर रही है और वैश्विक स्तर पर तीसरे विश्वयुद्ध के लिए भूमिका तैयार करने का काम कर रही है। इस भीषण युद्ध की भयावहता का अंदाजा हम मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से आ रहे कुछ आंकड़ों से लगा सकते हैं, अमेरिका व इज़रायल ने छठे दिन तक ईरान के लगभग 2000 ठिकानों को निशाना बनाया है और उनके एक दिन के युद्ध में लगभग 9 हज़ार करोड़ रुपए स्वाहा हो रहे हैं। जो स्थिति दुनिया भर में  मानवता व इंसानियत शांति के लिए बेहद चिंताजनक है।

- दीपक कुमार त्यागी
अधिवक्ता, स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार व राजनीतिक विश्लेषक 

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