सर्दी-जुकाम से लेकर डायबिटीज तक, कपालभाति के इन 3 प्रकारों से मिलेगी राहत
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। योग को शरीर और मन को स्वस्थ रखने का एक बेहतरीन माध्यम माना जाता है। योग में कई ऐसी क्रियाएं शामिल हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को भी शांत रखने में मदद करती है। इन्हीं में से एक है, कपालभाति प्राणायम। यह एक शुद्धिकरण क्रिया है, जिसमें सांस को तेजी से बाहर छोड़ा जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, कफ दोषों को दूर करने और शरीर के शुद्धीकरण (षट्कर्म) के लिए कपालभाति के तीन प्रकार बताए गए हैं—वातक्रम कपालभाति, व्युत्क्रम कपालभाति और शीतक्रम कपालभाति। आइए जानते हैं इन तीनों प्रकारों के बारे में और इन्हें करने से किस तरह के फायदे होते हैं।
वातक्रम कपालभाति: यह कपालभाति का सबसे प्रचलित और मूल रूप है, जिसे सामान्यतः प्राणायाम की तरह अभ्यास किया जाता है। यह फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाती है और सर्दी, राइनाइटिस, साइनोसाइटिस और अस्थमा जैसी समस्याओं से निजात दिलाने में मदद करती है। नाभि के सक्रिय संकुचन से जठराग्नि प्रदीप्त होती है, जिससे पाचन में सुधार होता है और मोटापा व मधुमेह (डायबिटीज) को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
इसके नियमित अभ्यास से तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है, मानसिक स्पष्टता आती है और डिफॉल्ट मोड नेटवर्क को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
व्युत्क्रम कपालभाति: यह जल-आधारित एक शुद्धीकरण (शोधन) क्रिया है। इसमें गुनगुने नमकयुक्त जल को नाक (नासिका-छिद्रों) से अंदर खींचा जाता है और उसे मुंह के रास्ते बाहर निकाला जाता है। इसके नियमित अभ्यास से साइनस की समस्याओं से निजात मिलने लगती है, जिससे सामान्य सर्दी-जुकाम, साइनोसाइटिस और राइनाइटिस जैसी समस्याओं में आराम मिलता है। साथ ही, यह खोपड़ी के अग्र भाग को उत्तेजित करता है, जिससे मानसिक स्पष्टता बढ़ती है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक (भाति) आती है।
शीतक्रम कपालभाति: यह क्रिया व्युत्क्रम कपालभाति के बिल्कुल विपरीत होती है। इसमें गुनगुना पानी मुंह में लेकर नासिका-छिद्रों के रास्ते बाहर निकाला जाता है। यह क्रिया सिर और श्वसन तंत्र से संबंधित सभी प्रकार के कफ दोषों को दूर करने में बेहद प्रभावी है। योगिक मान्यताओं के अनुसार, इसका नियमित अभ्यास चेहरे की झुर्रियों को दूर करने और त्वचा में प्राकृतिक चमक (कपाल की दमक) लाने में मदद करता है। साथ ही, यह नाक के मार्ग को पूरी तरह साफ करता है और वायुमार्ग में फंसे अतिरिक्त बलगम को बाहर निकाल देती है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, कपालभाति मुख्य रूप से कपाल और ऊपरी श्वसन तंत्र के शोधन के लिए एक बेहतरीन तकनीक है। यह शरीर से 20 प्रकार के कफ दोषों का नाश करती है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाती है और मधुमेह एवं मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
--आईएएनएस
एनएस/एएस
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नागर विमानन क्षेत्र के लिए नए नियम लागू करेगा केंद्र, 2027 से प्रभावी होंगे 'भारतीय वायुयान नियम'
केंद्र सरकार ने देश के नागर विमानन क्षेत्र के लिए एक नया और व्यापक नियामकीय ढांचा अधिसूचित किया है. नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार, 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे और लगभग नौ दशकों से लागू विमान नियम, 1937 का स्थान लेंगे.
विमानन क्षेत्र के सभी क्षेत्रों को कवर करेंगे नए नियम
नए नियम विमानन क्षेत्र के लगभग सभी प्रमुख पहलुओं को कवर करते हैं, जिनमें विमान पंजीकरण, एयरवर्थनेस सर्टिफिकेशन, विमान निर्माण, रखरखाव, उड़ान संचालन, कर्मियों के लाइसेंस और हवाईअड्डा संचालन से जुड़े विस्तृत प्रावधान शामिल किए गए हैं. इसके साथ ही विमान मालिकों, ऑपरेटरों, एयरलाइंस और अन्य विमानन हितधारकों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से तय की गई हैं.
नए ढांचे के तहत विमानों के पंजीकरण और एयरवर्थनेस प्रमाणन से संबंधित नियमों को विस्तार से परिभाषित किया गया है. इसमें यह सुनिश्चित करने के मानदंड शामिल हैं कि कोई विमान संचालन के लिए सुरक्षित और उपयुक्त है या नहीं. नियम विमान डिजाइन, निर्माण मानकों, संशोधनों और मरम्मत से संबंधित स्वीकृतियों को भी कवर करते हैं.
सरकार ने विमानों के निरीक्षण और रखरखाव को बताया अनिवार्य
सरकार ने विमानों के पूरे परिचालन जीवनकाल के दौरान नियमित निरीक्षण और रखरखाव को अनिवार्य बनाया है. एयरलाइंस और विमान संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि विमान लगातार सुरक्षा मानकों का पालन करते रहें और उनकी एयरवर्थनेस बनी रहे. नए नियमों में पायलटों, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों सहित विमानन क्षेत्र के विभिन्न पेशेवरों के लिए योग्यता और लाइसेंसिंग मानकों को भी विस्तार से निर्धारित किया गया है.
केंद्र लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए लागू की ये शर्तें
इसमें प्रशिक्षण, परीक्षा, अनुभव और चिकित्सीय फिटनेस संबंधी आवश्यकताओं के अलावा लाइसेंस के नवीनीकरण, निलंबन और रद्द करने की शर्तें भी शामिल हैं. एयरलाइन संचालन से जुड़े प्रावधानों में फ्लाइट प्लानिंग, परिचालन प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों पर विशेष जोर दिया गया है. पायलटों और केबिन क्रू के लिए फ्लाइट ड्यूटी और विश्राम अवधि से जुड़े नियम भी शामिल किए गए हैं, ताकि थकान से जुड़े जोखिम कम हों और उड़ान सुरक्षा मजबूत हो सके.
यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में टिकट मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता शामिल है. अगले वर्ष से एयरलाइंस को टिकट की कुल कीमत के साथ उसका विस्तृत ब्योरा भी देना होगा, जिसमें बेस फेयर, कर, शुल्क, रद्दीकरण शुल्क और रिफंड नीति की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी. सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरलाइन किराये अब भी नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की निगरानी के दायरे में रहेंगे. इसके अलावा नए नियमों में हवाईअड्डों के लाइसेंस, बुनियादी ढांचे के मानकों और परिचालन आवश्यकताओं से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं.
स्रोत- आईएएनएस
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