'15वीं पंचवर्षीय योजना' की शुरुआत पर विदेशी मीडिया का ध्यान चीन के दो सत्रों पर केंद्रित
बीजिंग, 6 मार्च (आईएएनएस)। इन दिनों चीन में चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा (एनपीसी) और चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (सीपीपीसीसी) के वार्षिक सम्मेलन (इन्हें दो सत्र कहा जाता है) राजधानी पेइचिंग में आयोजित किए जा रहे हैं। चीन में 15वीं पंचवर्षीय योजना के पहले वर्ष में आयोजित दो सत्रों पर विदेशी मीडिया का ध्यान केंद्रित हुआ है।
5 मार्च को एनपीसी वार्षिक सम्मेलन उद्घाटित हुआ, जिसमें चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने सरकारी कार्य रिपोर्ट पेश की। उस दिन, रूसी रेडियो मेट्रो की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल और रसद श्रृंखलाओं के पुनर्गठन का सामना करते हुए चीन ने बाहरी दुनिया के लिए अपने खुलेपन की नीति को दोहराया है। सरकारी कार्य रिपोर्ट में उच्च-स्तरीय खुलेपन को और आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है, जिसका अर्थ है कि चीन वैश्वीकरण को बढ़ावा देना जारी रखेगा, लेकिन विश्वसनीयता और सुरक्षा पर अधिक जोर देगा।
वहीं, पाकिस्तान ऑब्जर्वर में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि चीन के दो सत्र वैश्विक महत्व का एक विश्व प्रसिद्ध राजनीतिक आयोजन हैं। आर्थिक विकास, औद्योगिक विकास और व्यापार निर्यात के संबंध में बैठकों द्वारा निर्धारित लक्ष्य, साथ ही डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार और हरित एवं निम्न-कार्बन परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में लिए गए प्रमुख निर्णय और कार्यान्वयन, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डालेंगे।
उधर, डेलोवॉय कजाकस्तान अखबार में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि आर्थिक क्षेत्र में, चीन का विकास फोकस तीव्र गति से विकास से हटकर उच्च गुणवत्ता वाले, टिकाऊ विकास की ओर बढ़ रहा है। चीन एक नया तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है। कजाकस्तान और अन्य मध्य एशियाई देशों के लिए, यह एक नया अवसर खोलता है, जो औद्योगिक परियोजनाओं, विज्ञान और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग के अवसरों के विस्तार का संकेत देता है।
इनके अलावा, केन्या और किर्गिजस्तान जैसे देशों की मीडिया संस्थाओं की नजर भी चीन में हो रहे दो सत्रों पर टिकी हुई है। कहते हैं कि दो सत्रों का एक प्रमुख पहलू स्थिर और सतत विकास पर जोर देना था। उच्च गुणवत्ता वाले विकास, तकनीकी नवाचार और घरेलू खपत को चीन की निरंतर प्राथमिकता वैश्विक बाजारों को आश्वस्त करने वाला संकेत देती है। चीन के दो सत्र न केवल अपने आप में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाएँ हैं, बल्कि पड़ोसी देशों के भविष्य के आर्थिक पथ पर भी इनका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच कतर ने फोर्स मेज्योर की चेतावनी दी, तेल और गैस की आपूर्ति रुकने का खतरा
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष कुछ दिनों तक और जारी रहता है तो खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातकों को ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ सकता है। इससे तेल और गैस की आपूर्ति रुक सकती है और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
दरअसल अगर कोई तेल कंपनी किसी युद्ध या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल की सप्लाई नहीं कर पाती, तो वह फोर्स मेज्योर घोषित कर सकती है और उसे अनुबंध के उल्लंघन का दोष नहीं माना जाएगा।
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में साद अल-काबी ने कहा कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो खाड़ी क्षेत्र के सभी निर्यातकों को आने वाले दिनों में फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी, उन्हें कानूनी रूप से भारी जिम्मेदारी और नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टैंकर और अन्य जहाज जलडमरूमध्य से गुजरने में असमर्थ रहते हैं, तो अगले दो से तीन हफ्तों में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं प्राकृतिक गैस की कीमतें चार गुना तक बढ़कर 40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) तक जा सकती हैं।
इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में करीब 20 प्रतिशत और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) में लगभग 25 प्रतिशत की तेजी देखी गई है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 89 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा था, जबकि डब्ल्यूटीआई 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दोनों बेंचमार्क अप्रैल 2024 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर हैं।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादक कतर इस सप्ताह फोर्स मेज्योर घोषित कर चुका है, जब ईरानी ड्रोन हमले में उसके रस लाफान एलएनजी संयंत्र को नुकसान पहुंचा। यह संयंत्र कतर का सबसे बड़ा एलएनजी प्लांट है और हमले के बाद हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अगर हमले तुरंत बंद भी हो जाएं, तब भी निर्यात संचालन सामान्य होने में हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है, क्योंकि लॉजिस्टिक्स में गंभीर बाधाएं आई हैं। उन्होंने बताया कि कतर के 128 एलएनजी कैरियर जहाजों में से फिलहाल केवल छह या सात ही कार्गो लोड करने के लिए उपलब्ध हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में कम से कम 10 जहाजों पर हमले हुए हैं और बीमा कंपनियों ने प्रीमियम काफी बढ़ा दिया है। इसके चलते शिपिंग कंपनियां इस इलाके से जहाज भेजने में हिचक रही हैं।
इस बीच ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई है। इन हमलों में बहरीन के एक तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया।
डीबीएस बैंक की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भले ही ईरानी नौसेना के युद्धपोत सीधे तौर पर बड़ा खतरा न हों, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों के कारण शिपमेंट धीमे पड़ सकते हैं। इससे बीमा, शिपिंग लागत और ऊर्जा कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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