Bangladesh में परिधान श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के बाद सरकार ने बनाया Wage Board
ढाका, एक नवंबर बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग से जुड़े कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर रविवार को राजधानी ढाका और उसके आसपास के इलाकों में हिंसक प्रदर्शन किया, जिसके बाद सरकार ने वेतन बोर्ड के गठन की घोषणा की। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नारेबाजी करते प्रदर्शनकारियों ने ढाका में पुलिस के एक वाहन और गाजीपुर स्थित पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया। उन्होंने ढाका-तंगेल राजमार्ग को भी अवरुद्ध कर दिया।
प्रदर्शनकारी लंबे समय से 30,000 बांग्लादेशी टका (लगभग 23,000 भारतीय रुपये) का न्यूनतम मासिक वेतन निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, प्राधिकारियों ने अर्धसैनिक बल ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ (बीजीबी) की पांच प्लाटून तैनात कीं, ताकि उपनगरीय औद्योगिक जिले में स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके, क्योंकि गाजीपुर से गुजरने वाले राजमार्ग पर कई जगहों पर हाथ में लाठियां लिए श्रमिकों ने कब्जा कर लिया था। ‘बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन’ (बीजीएमईए) के अनुसार, बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग में लगभग 4,000 पंजीकृत कारखाने हैं और इनमें 40 लाख से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।
बीजीएमईए के मुताबिक, चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा परिधान निर्यातक है और वित्त वर्ष 2025-26 में देश का परिधान निर्यात 38.70 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। बांग्लादेश से 150 से अधिक देशों को परिधानों का निर्यात किया जाता है। खबरों के अनुसार, रविवार का विरोध-प्रदर्शन कपड़ा उद्योग के श्रमिकों की ओर से हाल के महीनों में किया गया सबसे हिंसक विरोध-प्रदर्शन है, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने पुलिस संपत्ति को निशाना बनाया और सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी कई जगहों पर झड़पें हुईं।
खबरों में कहा गया है कि ढाका के मीरपुर और आशुलिया इलाके तथा गाजीपुर के कालाकोइर औद्योगिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा हिंसा दर्ज की गई। खबरों के मुताबिक, कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पत्थर और ईंटें फेंकीं, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज के साथ-साथ आंसू गैस के गोलों, पानी की बौछारों और ध्वनि ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। ‘डेली स्टार’ और ‘प्रोथोम’ जैसे अखबारों ने खबर दी कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में कम से कम 50 लोग घायल हो गए, जिनमें लगभग 15 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
खबरों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने ढाका में मेट्रो रेल सेवाओं के साथ-साथ मीरपुर इलाके और ढाका-तंगेल राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही को भी बड़े पैमाने पर बाधित किया। प्रधानमंत्री कार्यालाय (पीएमओ) के अधिकारियों ने बताया कि स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने शाम को गृह मंत्री, श्रम मंत्री और कई अन्य मंत्रियों के साथ आपात बैठक बुलाई, जिसमें बढ़ती अशांति पर चर्चा की गई। इससे पहले, श्रम और रोजगार मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने मौजूदा वेतन ढांचे की समीक्षा के लिए एक वेतन बोर्ड के गठन की घोषणा की।
इस बोर्ड की अध्यक्षता वरिष्ठ जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेख अशफाकुर रहमान करेंगे। चौधरी ने प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील भी की। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि बोर्ड जल्द से जल्द बैठक करेगा और इसे आगे एक मुकाम तक ले जाएगा।”
Iran की शर्तें US ने मानी तो 2 दिन में बहाल होगा Strait of Hormuz पर जहाजों का आवागमन
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं। ईरान का कहना है कि अगर वॉशिंगटन उसकी मांगों को मान लेता है, तो वह इस अहम समुद्री रास्ते पर आवाजाही 2 दिनों के भीतर बहाल कर सकता है। इस मुद्दे पर कतर के जरिए दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। ईरान ने पहले इस प्रक्रिया के लिए 5 दिनों का समय प्रस्तावित किया था, लेकिन अब इसे घटाकर 2 दिन करने की बात कही है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि कतर के मध्यस्थों ने प्रस्ताव लागू करने की समयसीमा 5 दिन से कम करने का सुझाव दिया था। बातचीत के बाद ईरान ने इसे 2 दिन करने का प्रस्ताव रखा है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, अराघची ने कहा कि यह समयसीमा तभी लागू होगी, जब अमेरिका ईरान की शर्तों को पूरा करने के लिए तैयार होगा।
ईरान की मांगों में इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के बाद लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना, क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की संख्या कम करना, तेल निर्यात से जुड़ी छूट बहाल करना और विदेशों में जमा ईरानी धन को जारी करना शामिल है। इसमें कतर में जमा ईरान की रोकी गई रकम भी शामिल है।
इसके अलावा तेहरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही के लिए ओमान के साथ बातचीत के जरिए तय किए गए नए समुद्री मार्ग को मान्यता दी जाए। ईरान की मांग है कि पुराने या दूसरे रास्तों को बंद कर दिया जाए और समुद्री यातायात उसके प्रस्तावित मार्ग के अनुसार संचालित हो। अराघची का कहना है कि ईरान की शर्तों पर इस रास्ते को खोलने से अमेरिका के साथ बाकी विवादों पर बातचीत का रास्ता भी बन सकता है।
इससे पहले ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने कहा था कि जब तक तेहरान की 7 शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक अमेरिका के साथ बातचीत नहीं होगी और होर्मुज स्ट्रेट भी बंद रहेगा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान की मांगें मान ली जाती हैं तो कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान पर दोबारा हमला हुआ तो उसका जवाब दिया जाएगा।
रेजाई की मांगों में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना भी शामिल है। खास तौर पर उन्होंने लेबनान में इजरायल के हमलों को रोकने पर जोर दिया है। ईरान का मानना है कि क्षेत्र में शांति स्थापित किए बिना केवल अमेरिका के साथ समझौता करना पर्याप्त नहीं होगा।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में कतर दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाने और बातचीत आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का एक पत्र कतर के मध्यस्थों के जरिए मोहसेन रेजाई तक पहुंचाया गया। रेजाई ने इस पत्र में अमेरिकी रुख के बदले हुए अंदाज को सकारात्मक संकेत बताया। ईरान के सरकारी प्रसारणकर्ता आईआरआईबी के अनुसार, उन्होंने कहा कि अमेरिका के बातचीत करने के तरीके में काफी बदलाव आया है और यह ईरानी जनता की जीत का संकेत है।
बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। ऐसे में ईरान की नई शर्तों और अमेरिका के जवाब पर कई देशों की नजरें टिकी हुई हैं।
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