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कतर के ऊर्जा मंत्री की चेतावनी, अगर युद्ध जारी रहा तो कच्चा तेल कुछ हफ्तों में 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा

नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में युद्ध कुछ दिनों तक जारी रहने से खाड़ी देशों के निर्यातकों को अप्रत्याशित स्थिति (फोर्स मेज्योर) घोषित करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे आपूर्ति रुक ​​जाएगी और कुछ ही हफ्तों में तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल और प्राकृतिक गैस की कीमत 40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (मीट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) तक पहुंच जाएगी।

कतर के मंत्री ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा,जिन देशों ने अभी तक फोर्स मेज्योर घोषित नहीं किया है, हमें उम्मीद है कि स्थिति जारी रहने पर वे अगले कुछ दिनों में ऐसा करेंगे। खाड़ी क्षेत्र के सभी निर्यातकों को फोर्स मेज्योर घोषित करना होगा।

उन्होंने आगे कहा, अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें किसी न किसी बिंदु पर कानूनी रूप से उस दायित्व का भुगतान करना होगा, और यह उनकी पसंद है।

मंत्री ने कहा कि अगर टैंकर और अन्य जहाज जलडमरूमध्य से गुजरने में असमर्थ रहे तो कच्चे तेल की कीमतें दो से तीन सप्ताह के भीतर 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जबकि प्राकृतिक गैस की कीमतें चार गुना बढ़ सकती हैं।

ब्रेंट क्रूड वायदा में इस सप्ताह 20 प्रतिशत की तेजी आई है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। शुक्रवार को ब्रेंट 3 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 89 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि डब्ल्यूटीआई 5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 86 डॉलर पर पहुंच गया। दोनों बेंचमार्क अप्रैल 2024 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।

दुनिया में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक कतर, इस सप्ताह ईरान के ड्रोन हमले में अपने रास लाफान एलएनजी प्लांट पर हुए हमले के बाद अप्रत्याशित आपातकाल (फोर्स मेज्योर) घोषित कर चुका है। यह संयंत्र देश का सबसे बड़ा एलएनजी प्लांट है और इसमें हुए नुकसान का आकलन करने के प्रयास जारी हैं।

मंत्री ने बताया कि हमले तुरंत बंद होने पर भी, रसद संबंधी बाधाओं के कारण सामान्य निर्यात परिचालन बहाल करने में हफ्तों से महीनों का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि कतर के 128 एलएनजी वाहक जहाजों में से केवल छह या सात ही वर्तमान में माल लादने के लिए उपलब्ध हैं।

फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, कम से कम 10 जहाजों पर हमले की खबरों और बीमा कंपनियों द्वारा प्रीमियम में भारी वृद्धि के बाद, शिपिंग कंपनियां इस क्षेत्र से जहाज भेजने में हिचकिचा रही हैं।

ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन से हमले करने और बहरीन में एक तेल रिफाइनरी को निशाना बनाने के बाद तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया जा रहा है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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ईरान में मची हाहाकार! इजराइल ने उड़ाए 300 मिसाइल लॉन्चर और 600 सैन्य ठिकाने, यह 100 घंटे की रिपोर्ट

इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग को आज सात दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन दोनों ही देश पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. पिछले 100 घंटों से आसमान से सिर्फ मौत बरस रही है. इजराइल की सेना (IDF) लगातार ईरान के अलग-अलग हिस्सों में मिसाइलों और घातक ड्रोनों से हमले कर रही है. इन हमलों ने ईरान की कमर तोड़ दी है, लेकिन जवाबी कार्रवाई में ईरान भी इजराइल के कई शहरों पर ड्रोन बरसा रहा है. यह जंग अब सिर्फ दो देशों के बीच नहीं रही, बल्कि इसमें अमेरिका के शामिल होने से इसने पूरे विश्व के लिए खतरा पैदा कर दिया है.

100 घंटों का खतरनाक रिपोर्ट कार्ड

इजराइल ने इस युद्ध के 100 घंटे पूरे होने पर रिपोर्ट जारी की है, जिसे उन्होंने 'ऑपरेशन रोअरिंग' (Operation Roaring) का नाम दिया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल ने अपने सबसे बड़े दुश्मन और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को मार गिराया है. यह इस सदी का सबसे बड़ा सैन्य उलटफेर माना जा रहा है. इजराइल का दावा है कि उन्होंने न केवल खामेनेई, बल्कि ईरान की सेना के 40 से ज्यादा बड़े अधिकारियों को भी मौत के घाट उतार दिया है. इन अधिकारियों की मौत से ईरान की सैन्य रणनीति पूरी तरह चरमरा गई है।

सैन्य ठिकानों और मिसाइल लॉन्चरों का खात्मा

इस जंग में इजराइल का निशाना सिर्फ बड़े नेता ही नहीं, बल्कि ईरान की सैन्य ताकत भी है. इजराइली सेना ने बताया है कि उन्होंने अब तक ईरान के 600 से ज्यादा सैन्य ठिकानों और सरकारी इमारतों को खंडहर में तब्दील कर दिया है. इसके साथ ही, ईरान के पास जो सबसे बड़ा खतरा 'मिसाइल लॉन्चर' का था, इजराइल ने उनमें से 300 से ज्यादा लॉन्चरों को हवा में ही उड़ा दिया है. इस कार्रवाई का मकसद ईरान की हमला करने की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है, ताकि वह दोबारा इजराइल की ओर आंख उठाकर न देख सके.

जब मारा गया सुप्रीम लीडर

इस महायुद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब इजराइल और अमेरिका ने मिलकर एक साझा ऑपरेशन चलाया. इस हमले का मुख्य लक्ष्य ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई थे. खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए इस सटीक हमले में खामेनेई की जान चली गई. खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही पूरे मिडिल ईस्ट में आग लग गई. ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर सबसे बड़ा हमला माना और तुरंत बदला लेने की घोषणा कर दी. इसी के बाद से यह जंग एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहां से वापसी का कोई रास्ता नजर नहीं आता.

अमेरिकी बेस और पड़ोसी देशों पर हमला

अपने नेता की मौत से बौखलाए ईरान ने सबसे पहले उन इलाकों को निशाना बनाया जहां अमेरिका का सैन्य अड्डा था. मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेसों पर ईरान ने ताबड़तोड़ मिसाइलें दागीं. इसके बाद ईरान ने इजराइल के रिहायशी इलाकों पर ड्रोन हमले शुरू किए. चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान ने केवल इजराइल को ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और ओमान के रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया है. ईरान का मानना है कि इन देशों ने भी किसी न किसी रूप में इस हमले में साथ दिया है, जिसके चलते उसने पूरे क्षेत्र में तबाही मचा दी है.

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर कब्जा

युद्ध के बीच ईरान ने दुनिया की दुखती रग पर हाथ रख दिया है. ईरान ने समुद्र के उस रास्ते यानी 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर अपनी कड़ी नजर बना ली है, जहां से पूरी दुनिया का तेल सप्लाई होता है. ईरान अब तेल ले जाने वाले बड़े जहाजों (Oil Tankers) को निशाना बना रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने ये रास्त चीन के लिए सिर्फ खुला रखा है, और ईरान ने कहा कि चीन फ्लैग वाली ही जहाज को क्रॉस करने देंगे. 

युद्ध के मैदान से नुकसान का आंकड़ा

ईरान में अब तक इस 7 दिन के जंग में 1200 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. वहीं,  40+ टॉप जनरल और अधिकारी मारे गए. साथ ही 600+ इमारतें और ठिकाने तबाह कर दिए गए हैं. इसके अलावा 300 से अधिक मिसाइल लॉन्चर को खत्म कर दिया गया है. 

लाशों के ढेर में तब्दील होते शहर

हथियारों की इस लड़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की जान जा गई है. इजराइल के शहरों में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है, वहां भी लोग मिसाइल हमलों का शिकार हो रहे हैं. अस्पतालों में घायलों की इतनी भीड़ है कि वहां पैर रखने की जगह नहीं बची है. दवाइयों और इलाज के सामान की कमी होने लगी है। यह युद्ध अब सैनिकों की लड़ाई से आगे बढ़कर आम मासूमों की जान का दुश्मन बन गया है.

इजराइल में कुछ ऐसा ही मंजर

इस जंग ने मिडिल ईस्ट के बड़े शहरों की रौनक छीन ली है. तेल अवीव से लेकर तेहरान तक, हर जगह सन्नाटा पसरा है. सभी स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है. बाजार पूरी तरह ठप हैं और दुकानों पर ताले लटके हैं. लोगों के मन में इतना डर है कि वे अपने घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं.

ये भी पढ़ें- BRICS की चुप्पी पर उठे सवाल, ईरान-इजराइल जंग के बीच क्यों खामोश है दुनिया का बड़ा संगठन?

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