ईरान की आईआरजीसी ने शुक्रवार को कहा कि उसके वायु सेना बलों ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस का 21वां चरण शुरू किया है, जिसमें आत्मघाती ड्रोनों के झुंड और क्लस्टर वारहेड से लैस उन्नत खैबर मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य ज़ायोनी शासन की बहुस्तरीय वायु सुरक्षा को भेदना और उसे पार करना है। आईआरजीसी ने कहा कि इस समन्वित हमले का कोडनेम "या मुइज़ अल-मुमिनिन" था। ईरान ने आगे कहा कि आने वाले दिनों में उसका जवाबी अभियान तेज होगा, और सैन्य अधिकारियों ने व्यापक हमलों का संकल्प लिया है, जबकि वायु सुरक्षा बल पूरे देश में इजरायली और अमेरिकी विमानों और ड्रोनों को रोकना जारी रखेंगे।
खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फ़ागरी ने प्रेस टीवी को बताया कि इजरायल ने अपने सैन्य संसाधनों को नागरिक क्षेत्रों में छिपाने का प्रयास किया है, लेकिन ईरानी सेनाएं उन्हें ढूंढकर उन पर हमला करना जारी रखे हुए हैं। ज़ोल्फ़ागरी ने कहा कि ज़ायोनी शासन की कायर सैन्य ताकतें और ठिकाने आम नागरिकों और सार्वजनिक क्षेत्रों में छिपे हुए हैं। लेकिन हमलावरों का पता लगाना और उन पर हमला करना जारी रहेगा, और आने वाले दिनों में हमलों का सिलसिला और भी तेज़ और व्यापक हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि ईरानी वायु रक्षा ने देश के कई क्षेत्रों में दुश्मन के उन्नत विमानों को रोककर नष्ट कर दिया है। ज़ोल्फ़ागरी के अनुसार, इन नवीनतम हमलों के साथ, पिछले शनिवार को अमेरिका-इजरायल के आक्रमण की शुरुआत के बाद से ईरानी सशस्त्र बलों द्वारा मार गिराए गए दुश्मन ड्रोनों की कुल संख्या 75 से अधिक हो गई है।
नई दिल्ली में ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने ज़ोर देकर कहा कि तेहरान के पास अमेरिकी और इजरायली आक्रमण" के खिलाफ वीरतापूर्ण राष्ट्रवादी रक्षा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, और उन्होंने कसम खाई कि राष्ट्र आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक प्रतिरोध करेगा। रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान एएनआई से बातचीत में खातिबजादेह ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान वर्तमान में पूर्ण युद्ध की स्थिति से गुजर रहा है।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह से मुलाकात की और एक दिन बाद ईरानी विदेश मंत्री अराकची से भी बातचीत की। भारत ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच शांति के लिए सभी पक्षों से तनाव कम करने और संयम बरतने का आग्रह किया। इस बीच, अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने पर 30 दिनों की छूट की पेशकश की है, जिसका उद्देश्य अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति में व्यवधान के बीच वैश्विक तेल बाजारों पर दबाव कम करना है। यह कदम ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन ठप हो गया है, जिसमें 200 से अधिक जहाज फारस की खाड़ी के अंदर फंसे हुए हैं, 150 जलडमरूमध्य के बाहर इंतजार कर रहे हैं और 38 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। सरकारी सूत्रों ने बताया कि व्यवधानों के बावजूद, भारत की ऊर्जा स्थिति मजबूत बनी हुई है, पर्याप्त भंडार प्रतिदिन भरा जा रहा है और एलपीजी या एलएनजी की कोई कमी नहीं है।
भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर शोक व्यक्त किया। यह शोक संवेदना ऐसे समय में व्यक्त की गयी जब विपक्षी दलों ने सरकार की इस हत्या पर चुप्पी और श्रीलंका के तट पर अमेरिका द्वारा एक ईरानी जहाज को डुबोए जाने पर प्रतिक्रिया न व्यक्त करने पर उसकी कड़ी आलोचना की थी। अमेरिका और इजराइल द्वारा तेहरान पर किए गए संयुक्त हमले में खामेनेई की हत्या के छह दिन बाद, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी दूतावास का दौरा किया और भारत सरकार की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। मिसरी ने ईरानी दूत मोहम्मद फताली से संक्षिप्त बातचीत भी की। इसके अलावा, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची को फोन किया और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के शुरूआत के बाद से दोनों विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर दूसरी बार बातचीत हुयी। मिसरी ने खामेनेई की मृत्यु पर शोक पुस्तिका में लिखा, भारत सरकार और जनता की ओर से हार्दिक संवेदना। हम दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। इसे कई लोग संघर्ष पर नयी दिल्ली के रुख में एक बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
मई 2024 के विपरीत, जब जयशंकर तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए ईरानी दूतावास गए थे, इस बार सर्वोच्च नेता की मृत्यु पर नयी दिल्ली की तरफ से विदेश सचिव शोक व्यक्त करने पहुंचे। पिछले कुछ दिनों में, सरकार विपक्ष के तीखे हमलों का सामना कर रही है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कहा कि खामेनेई की लक्षित हत्या पर सरकार की चुप्पी ने भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा किया है। भारत ने हालांकि पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का आह्वान किया, लेकिन उसने खामेनेई की हत्या पर प्रतिक्रिया न देने का विकल्प चुना। खामेनेई की हत्या पर नयी दिल्ली की संवेदना उस घटना के एक दिन बाद आई है जब अमेरिका ने श्रीलंका के तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को डुबो दिया था। आईआरआईएस देना वह भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय युद्ध अभ्यास ‘मिलन’ नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी सैन्यकर्मी मारे गए। मिलन अभ्यास में भाग लेने के अलावा, इस जहाज ने पिछले महीने विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ में भी हिस्सा लिया था। भारतीय नौसेना ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना से संकटकालीन सूचना मिलने के बाद उसने खोज और बचाव अभियान में हिस्सा लिया। भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने अमेरिकी कार्रवाई को “बेतुका” और “भड़काऊ कृत्य” बताया।
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