विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह से मुलाकात की और एक दिन बाद ईरानी विदेश मंत्री अराकची से भी बातचीत की। भारत ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच शांति के लिए सभी पक्षों से तनाव कम करने और संयम बरतने का आग्रह किया। इस बीच, अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने पर 30 दिनों की छूट की पेशकश की है, जिसका उद्देश्य अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति में व्यवधान के बीच वैश्विक तेल बाजारों पर दबाव कम करना है। यह कदम ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन ठप हो गया है, जिसमें 200 से अधिक जहाज फारस की खाड़ी के अंदर फंसे हुए हैं, 150 जलडमरूमध्य के बाहर इंतजार कर रहे हैं और 38 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। सरकारी सूत्रों ने बताया कि व्यवधानों के बावजूद, भारत की ऊर्जा स्थिति मजबूत बनी हुई है, पर्याप्त भंडार प्रतिदिन भरा जा रहा है और एलपीजी या एलएनजी की कोई कमी नहीं है।
भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर शोक व्यक्त किया। यह शोक संवेदना ऐसे समय में व्यक्त की गयी जब विपक्षी दलों ने सरकार की इस हत्या पर चुप्पी और श्रीलंका के तट पर अमेरिका द्वारा एक ईरानी जहाज को डुबोए जाने पर प्रतिक्रिया न व्यक्त करने पर उसकी कड़ी आलोचना की थी। अमेरिका और इजराइल द्वारा तेहरान पर किए गए संयुक्त हमले में खामेनेई की हत्या के छह दिन बाद, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी दूतावास का दौरा किया और भारत सरकार की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। मिसरी ने ईरानी दूत मोहम्मद फताली से संक्षिप्त बातचीत भी की। इसके अलावा, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची को फोन किया और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के शुरूआत के बाद से दोनों विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर दूसरी बार बातचीत हुयी। मिसरी ने खामेनेई की मृत्यु पर शोक पुस्तिका में लिखा, भारत सरकार और जनता की ओर से हार्दिक संवेदना। हम दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। इसे कई लोग संघर्ष पर नयी दिल्ली के रुख में एक बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
मई 2024 के विपरीत, जब जयशंकर तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए ईरानी दूतावास गए थे, इस बार सर्वोच्च नेता की मृत्यु पर नयी दिल्ली की तरफ से विदेश सचिव शोक व्यक्त करने पहुंचे। पिछले कुछ दिनों में, सरकार विपक्ष के तीखे हमलों का सामना कर रही है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कहा कि खामेनेई की लक्षित हत्या पर सरकार की चुप्पी ने भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा किया है। भारत ने हालांकि पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का आह्वान किया, लेकिन उसने खामेनेई की हत्या पर प्रतिक्रिया न देने का विकल्प चुना। खामेनेई की हत्या पर नयी दिल्ली की संवेदना उस घटना के एक दिन बाद आई है जब अमेरिका ने श्रीलंका के तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को डुबो दिया था। आईआरआईएस देना वह भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय युद्ध अभ्यास ‘मिलन’ नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी सैन्यकर्मी मारे गए। मिलन अभ्यास में भाग लेने के अलावा, इस जहाज ने पिछले महीने विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ में भी हिस्सा लिया था। भारतीय नौसेना ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना से संकटकालीन सूचना मिलने के बाद उसने खोज और बचाव अभियान में हिस्सा लिया। भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने अमेरिकी कार्रवाई को “बेतुका” और “भड़काऊ कृत्य” बताया।
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बॉलीवुड इंडस्ट्री में पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस मंदाना करीमी ने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में कहा था कि वो इंडिया छोड़ना चाहती है। एक्ट्रेस ईरान शिफ्ट होना चाहती है। इजरायल- अमेरिका और ईरान में चल रहे तनाव के बीच मंदाना का ये बयान काफी वायरल हो रहा है। गौरतलब है कि मंदाना कई सालों से भारत में रह रही है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मंदाना ने कहा है कि वो अपने देश लौटना चाहती हैं। इस बयान के बाद उन्हें काफी ट्रोल भी किया गया है। इसके बाद उन्होंने ईरान के मौजूद हालातों पर बात रखी। मंदाना करीमी ने बताया है कि उन्हें 14 साल की उम्र में जेल हो गई थी, जिसकी वजह से वो ईरान छोड़कर भाग गई थीं।
US-इजरायल-ईरान वॉर पर क्यों बोली मंदाना
इंडियन एक्सप्रेस के संग बातचीत के दौरान मंदाना ने कहा कि मेरा पूरा परिवार ईरान में है। उनसे बहुत कम बात होती है, कभी कुछ मिनट या सेकंड्स की कॉल्स, वो ठीक हैं, लेकिन कम्युनिकेशन बहुत कम है। देश अभी भी ब्लैकआउट में हैं।
खामेनई की मौत पर काफी खुश है मंदाना
आपको बता दें कि, मंदाना ने रिजीम के अत्याचार याद किए। वो कहती हैं कि लोग समझें ये हमने मांगा था। 48 साल बाद हमें हेल्प मिली है। हां, खामेनेई मर गया है, वो एक अलग सेलिब्रेशन है। अब ईरान रजा शाह पहलवी को लीडर चाहता है। वो ईरान और दुनिया भर के ईरानियों का सपोर्ट रखते हैं। ये सरकार नहीं टिकेगी, खामेनेई की जगह जो भी लाएंगे, कुछ नहीं बदलेगा।
आगे उन्होंने कहा कि, लोग कहते है उनका बेचा मोजतबा होसेनी खामेनेई आएगा। उसके पिता के ऑर्डर पर हजारों मारे गए। बेटा क्या बदलेगा? न्यूक्लियर वेपन्स पर दूसरे देशों से बातें टाइम वेस्ट करने के लिए थीं। मिसाइलें को मजबूत करने, हथियार बनाने और टेरर ग्रुप्स को फंड करने के लिए ईरान जैसे अमीर देश की सोसाइटी सबसे गरीब क्यों? उन्हें ईरानियों की परवाह नहीं है।
भारत क्यों छोड़ना चाहती हैं मंदाना?
हालिए इंटरव्यू में मंदाना ने भारत छोड़ने की बात कही थी। इस पर उन्होंने कहा कि भारत में ईरानी हालातों पर कम बात हो रही है। मुझे सपोर्ट नहीं मिला। जनवरी में सड़क पर जाना चाहती थी, लेकिन परमिशन नहीं मिली। 14 फरवरी को शाह ने दुनिया भर के ईरानियों को बुलाया, मैंने कुछ लोगों को इक्ट्ठा करने की परमिशन ली, लेकिन कोई नहीं आया। लोगों को चुप रहने को कहा। ईरानी फोन करके बोले, सेफ नहीं है। 15 फरवरी को कैंडल मार्च के लिए गई, लेकिन किसी ने लीक कर दिया, पुलिस इंतजार कर रही थी।
भारत ने मुझे सेफ रखा। यहां करियर, रिलेशनशिप्स, लाइफ बनीं। भाषा-संस्कृति समझती हूं, लेकिन धोखा फील कर रही हूं। अपनी ओपिनियन शांति से नहीं बोल पा रही हूं। ईरान से डेड बॉडीज-मर्डर की फोटोज-वीडियोज आते हैं। कल न्यूज चैनल पर गई, चैलेंज किया तो अटैक कर काट दिया।
मंदाना ने कहा, मैं वो ईरानी औरत हूं जिसने ये सरकार देखी है। अपनी लाइफ बर्बाद की। ईरान से भागी, भारत मिला, लकी हूं।
मुझे ईरान में बैन कर दिया गया है
अभिनेत्री ने कहा, "मुझे 10 साल पहले ईरान में घुसने के लिए बैन कर दिया गया था। मैं ईरान वापस नहीं जा सकती। हां, मैं भारत छोड़ रही हूं; मैं भारत से बाहर जा रही हूं, लेकिन मैं ईरान वापस नहीं जा रही हूं। मैं भारत से नाराज हूं क्योंकि पिछले कुछ महीनों से मुझे भारत में कोई समर्थन नहीं मिला, और अचानक, जब खामेनेई की मृत्यु हुई, जब इजरायल और अमेरिका का नाम सामने आया, तो भारत में हर किसी की अपनी राय है। हर कोई सड़कों पर उतर आया है और वे वास्तव में खामेनेई के लिए शोक मना सकते हैं, जो मैं नहीं कर सकी और मैं अभी भी नहीं कर सकती।"
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