Diwali Soop Beat: दिवाली के अगले दिन महिलाएं क्यों पीटती हैं सूप? जानें मां लक्ष्मी की बहन से जुड़ी खास परंपरा
Diwali Soop Beat Tradition: दिवाली के अगले दिन बिहार और मिथिला के कई इलाकों में महिलाएं सुबह-सुबह पुराना सूप पीटकर दरिद्रता को घर से बाहर भगाने की परंपरा निभाती हैं. जानें इस लोकपरंपरा का महत्व और सूर्योदय से पहले घर में क्यों पीटा जाता है सूप.
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गुजरात में 143 कैदियों को Diwali Parole, 6 नवंबर से 15 दिन के लिए होंगे रिहा
गांधीनगर, एक नवंबर गुजरात सरकार ने कैदियों के कल्याण और जेल सुधार की पहल के तहत, विभिन्न जेल में सजा काट रहे 143 कैदियों को दीपावली के त्योहार के दौरान 15 दिन की पैरोल पर रिहा करने की मंजूरी दी है। राज्य सरकार साल 2003 से ही दीपावली के दौरान पात्र कैदियों को 15 दिन की पैरोल पर रिहा करती आ रही है, ताकि वे अपने परिजन के साथ त्योहार मना सकें। इन कैदियों में महिलाएं और 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष शामिल हैं।
रविवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘‘उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में राज्य भर की विभिन्न जेल में सजा काट रहे 143 पात्र कैदियों को छह नवंबर से 15 दिन की ‘दीपावली पैरोल’ पर रिहा करने का फैसला लिया गया है। इनमें 60 साल या उससे अधिक उम्र के 103 पुरुष कैदी और 40 महिला कैदी शामिल हैं।’’ विज्ञप्ति में पुलिस महानिदेशक (गुजरात जेल और सुधार विभाग) केएलएन राव के हवाले से कहा गया है कि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, गंभीर अपराधों में शामिल कैदी ‘दीपावली पैरोल’ के पात्र नहीं हैं। इसमें कहा गया है कि अनिवासी भारतीय (एनआरआई) कैदियों, दूसरे राज्यों के निवासी कैदियों और उन कैदियों को भी इस लाभ के दायरे से बाहर रखा गया है, जिनकी अपील उच्च न्यायालय में लंबित है।
विज्ञप्ति के अनुसार, स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस), आतंकवादी एवं विघटनकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) और आतंकवाद निवारण अधिनियम (पोटा) के तहत दोषी ठहराए गए कैदियों और आतंकवाद, आर्थिक अपराधों, दुष्कर्म, अपहरण, लूट और जबरन वसूली जैसे गंभीर अपराधों में शामिल कैदियों को भी ‘दीपावली पैरोल’ का लाभ नहीं दिया जाता। इसमें कहा गया है कि निवारक हिरासत आदेशों का सामना कर रहे कैदी भी इसके लिए पात्र नहीं हैं।
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