पंजाब सरकार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन: भगवंत मान की सरकार पर लगाए वादाखिलाफी के आरोप, वड़िंग समेत कई नेता हिरासत में
कांग्रेस ने आज शुक्रवार को पंजाब विधानसभा का घेराव करने का प्रयास किया, लेकिन चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते ही रोक दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों का उत्साह इतना ज्यादा था कि बैरिकेडिंग को भी पार करने लगे। ऐसे में पुलिस ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिदंर सिंह राजावड़िंग समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया है। बता दें कि राहुल गांधी की पंजाब रैली के करीब छह दिन बाद कांग्रेस ने चंडीगढ़ में यह बड़ा प्रदर्शन किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी की भगवंत मान की सरकार के खिलाफ वादाखिलाफी के आरोप लगाए हैं। पंजाब कांग्रेस ने ऐलान किया था कि छह मार्च को चंडीगढ़ में पंजाब विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आज सुबह चंडीगढ़ के सेक्टर 15 स्थित पंजाब कांग्रेस कार्यालय में बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता पहुंचने लगे। तय समय पर प्रदर्शनकारी विधानसभा की तरफ बढ़ने लगे, लेकिन बीच रास्ते ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजावड़िंग समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया है। कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए पंजाब विधानसभा के पास भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
#WATCH चंडीगढ़: कांग्रेस ने पंजाब सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि सरकार जनता से किए वादे पूरे नहीं कर रही है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। pic.twitter.com/2rEUgHHcbC
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 6, 2026
पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने लगाए ये आरोप
प्रदर्शन से पहले पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। अमरिंदर सिंह राजावड़िंग ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने 2022 में कई चुनाव किए और ज्यादातर अधूरे हैं। प्रदेश की कानून व्यवस्था भी लगातार बिगड़ रही है। कांग्रेस के संगठन महामंत्री कैप्टन संदीप संधू ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार सो रही है। उसे उठाने के लिए कांग्रेस पंजाब विधानसभा का घेराव करने जा रही है। वहीं कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि अगर सरकार ने कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया तो आंदोलन तो और तेज किया जाएगा।
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राहुल गांधी ने किया था पंजाब का दौरा
बता दें कि राहुल गांधी ने 28 फरवरी को पंजाब के बरनाला में रैली करके स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ाने का काम किया था। उन्होंने कहा कि सभी टीम प्लेयर रहना होगा वरना उसे रिजर्व खिलाड़ी बना दिया जाएगा। प्रताप सिंह बाजवा ने इसे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए मजबूत संदेश बताया था, वहीं केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने तंज कसते हुए कहा था कि अगर अपनी ही पार्टी के नेताओं की खिंचाई करनी थी तो रैली करने का क्या फायदा, उन्हें दिल्ली बुलाकर फटकार लगानी चाहिए थी। लेकिन उनके इस तंज से इतर पंजाब कांग्रेस ने जिस तरह से भगवंत मान की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है, उसके मद्देनजर कहना गलत नहीं होगा कि आम आदमी पार्टी की सरकार को नींद से उठाने के लिए पंजाब कांग्रेस ने भी नींद तोड़ दी है।
India-Iran Diplomatic Surge: 24 घंटे में तीसरी मुलाकात, जयशंकर और ईरानी उप-विदेश मंत्री के बीच अहम वार्ता
नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत और ईरान के शीर्ष राजनयिकों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। राजधानी दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलॉग 2026' के इतर शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के उप-विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। पिछले 24 घंटों में दोनों देशों के बीच यह तीसरा बड़ा कूटनीतिक संपर्क है, जिसे क्षेत्र में शांति बहाली की कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है।
रायसीना डायलॉग में वैश्विक चुनौतियों पर मंथन
नई दिल्ली में गुरुवार से शुरू हुए तीन दिवसीय 'रायसीना डायलॉग' के 11वें संस्करण में वैश्विक नेताओं, नीति निर्माताओं और रणनीतिक विशेषज्ञों का जमावड़ा लगा हुआ है। इस मंच पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न केवल ईरान, बल्कि यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी और तंजानिया के प्रतिनिधियों से भी द्विपक्षीय मुलाकातें की हैं। जयशंकर और ईरानी उप-विदेश मंत्री खतीबजादेह की इस बैठक का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देना रहा।
28 फरवरी के हमलों के बाद बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता
यह कूटनीतिक सक्रियता 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद काफी बढ़ गई है। उन हमलों का मुख्य उद्देश्य तेहरान की मिसाइल क्षमता और सैन्य बुनियादी ढांचे को कमजोर करना था, जिसमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ नेता मारे गए थे। इसके जवाब में तेहरान ने भी अमेरिकी संपत्तियों और क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बनाकर ड्रोन व मिसाइल हमले किए हैं, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं।
विदेश सचिव की शोक संवेदना और फोन पर वार्ता
सईद खतीबजादेह से मुलाकात से पहले, गुरुवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर लंबी बातचीत की थी। उसी दिन भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का दौरा किया और दिवंगत सुप्रीम लीडर खामेनेई के निधन पर भारत सरकार की ओर से आधिकारिक शोक संवेदना व्यक्त की। भारत लंबे समय से ईरान के साथ मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए हुए है, इसलिए इस संकट में भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है।
शांति और संवाद पर भारत का अडिग स्टैंड
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर ने लगातार क्षेत्र में शांति की अपील की है। भारत का स्पष्ट मानना है कि किसी भी जटिल समस्या का समाधान केवल सैन्य टकराव से संभव नहीं है। रायसीना डायलॉग के मंच से भी यह संदेश दिया गया कि संवाद और कूटनीति के रास्ते ही किसी भी युद्ध को रोका जा सकता है और स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
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