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Kanwar Yatra 2026: कांवड़ियों की सेवा क्यों की जाती है? सावन मास में हर थोड़ी दूर पर बनाए जाते हैं शिविर

Kanwar Yatra 2026: सावन का महीवा हो और शिव भक्त कांवड़ियों की बात न हो, ऐसा हो नहीं सकता है. कांवड़ यात्रा सनातन धर्म की सबसे विशाल और भव्य यात्रा मानी जाती है. इसमें भोले के भक्त कंधे पर कांवड़ रख कर नंगे पैर पैदल यात्रा करते हैं और गंगातट पर जाते हैं. यहां से वे जल भरकर वापस अपने घर नंगे पैर लौटते हैं. उस गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और फिर अपने घर लौटते हैं. इस दौरान उनकी सेवा करने के लिए रास्ते में कांवड़ियों की सेवा हेतु जगह-जगह शिविर लगे होते हैं. रास्ते में चलते हुए लोग भी इनकी खूब सेवा करते हैं, इन्हें जल, फल और दवाएं प्रदान करते हैं. विशाल भंडारे लगाए जाते हैं, जहां ये लोग भोजन कर सके. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्यों इन कांवड़ियों की सेवा के लिए इतने लोग आगे आते हैं? चलिए इस बारे में जानते हैं.

कांवड़ियों के लिए भव्य शिविर और भंडारों का आयोजन

हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक या बिहार-झारखंड में बैद्यनाथ धाम तक, रास्ते में कई सेवा शिविर लगते हैं. इन शिविरों में यात्रा के दौरान थक जाने वाले कांवड़ियों को रुक कर आराम करने की सुविधा मिलती है. यहां वे शरीर को आराम देते हैं. इन शिविरों में इनके लिए मुफ्त भोजन, चाय-नाश्ता और मेडिकल फैसिलिटीज उपलब्ध होती है. सावन के महीने में धार्मिक संस्थाओं के साथ-साथ समाज सेवी लोग भी इन शिविरों का आयोजन करते हैं. कांवड़ियों के लिए शुद्ध शाकाहारी भोजन के लिए भंडारे आयोजित होते हैं.

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क्यों खास होती है इन कांवड़ियों की सेवा?

कांवड़ यात्रा करने वाले लोगों की सेवा करने का खास महत्व होता है. कहते हैं कि इनकी सेवा करने से बहुत ही पुण्य मिलता है. कांवड़ियों की सेवा हमेशा श्रद्धा और भक्ति के साथ करनी चाहिए. कांवड़ यात्रा के लिए जाने वाले लोगों को भोले नाम से बुलाया जाता है. सभी एक-दूसरे से भोले कहते हैं. दरअसल, धार्मिक मान्यता है कि कांवड़ियों की सेवा करना यानि की स्वयं पृथ्वी पर शिव जी के सेवा करना है. कांवड़ियों की सेवा करने से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और इसे महादेव का आशीर्वाद भी मिलता है.

कांवड़ियों की सेवा का महत्व क्या है?

कांवड़ यात्रा करने वाले लोगों की सेवा का लाभ भी कम नहीं होता है. कांवड़िए लंबी यात्रा करते हैं और फिर कई दिनों बाद अपने घर जाते हैं. इस दौरान पैदल यात्रा करते हुए वह थक जाते हैं. इसलिए, सिर्फ धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि इनकी सेवा को सामाजिक रूप से भी महत्व दिया जाता है. इनकी मदद करना और जरूरतों को पूरी करना मानव दृष्टि से भी अच्छा माना जाता है. इन कांवड़ियों की निस्वार्थ भाव से सेवा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं.

कांवड़ियों की सेवा करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

कांवड़ियों की सेवा करते समय हमेशा उनसे सम्मानपूर्वक व्यवहार करें. शिव भक्तों से आदर से बात करनी चाहिए. उन्हें  शुद्ध और स्वच्छ भोजन और पानी ही देना चाहिए. कांवड़ियों के पैरों में अक्सर छाले और चोट लग सकती है. कई बार घुटनों में दर्द हो जाता है. ऐसे में उन्हें जरूरत पड़ने पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराएं. उनकी दवा-पट्टी करें. भीड़भाड़ में अनुशासन बनाए रखें और कांवड़ियों को रास्ता दें. सेवा बिना किसी भेदभाव और दिखावे के करें.

क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं?

कांवड़ा यात्रा से जुड़ी धार्मिक मान्यता है कि शिव पुराण और लोकमान्यताओं के अनुसार, सेवा भाव को महादेव की पूजा के समान माना जाता है. निस्वार्थ भाव से की गई सेवा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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28 साल तक पुलिस को चकमा देता रहा 'डॉ. झटका', हरियाणा पुलिसकर्मी की हत्या का आरोपी दिल्ली क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा

Delhi Crime: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 28 साल से फरार चल रहे एक ऐसे कुख्यात घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) को गिरफ्तार किया है, जिसने पुलिस से बचने के लिए अपनी पूरी पहचान ही बदल डाली थी। हरियाणा पुलिस के जवान की हत्या, हत्या के प्रयास के कई मामलों और पुलिस हिरासत से फरार होने का आरोपी राजिंदर बैरागी उर्फ राजिंदर सिंह यादव उर्फ 'डॉ. झटका' (53) को मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले के मुंगावली से गिरफ्तार किया गया है।

क्राइम ब्रांच के डीसीपी चंदर कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी वर्ष 1999 में यूपी पुलिस की हिरासत से गन्नौर रेलवे स्टेशन पर हथकड़ी लगे होने के बावजूद फरार हो गया था। इसके बाद उसने अपना नाम बदलकर मध्य प्रदेश में नई जिंदगी शुरू कर दी। वह वहां एक छोटे क्लीनिक का संचालन करता था, प्रॉपर्टी डीलिंग और ठेकेदारी का काम करता था तथा स्थानीय लोगों के बीच "डॉ. झटका" के नाम से जाना जाता था।

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ऐसे पहुंची पुलिस आरोपी तक

डीसीपी चंदर कुमार सिंह के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की नॉर्दर्न रेंज-1 टीम लंबे समय से पुराने घोषित अपराधियों की तलाश में अभियान चला रही थी। जांच के दौरान आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट, तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के जरिए उसकी नई पहचान और लोकेशन का पता लगाया गया।

एसीपी सुरेश कुमार की निगरानी में इंस्पेक्टर संजय कौशिक के नेतृत्व में एसआई दीपक कुमार, एसआई नरेंद्र सिंह, एएसआई रमेश राणा, हेड कांस्टेबल संजीव कुमार और हेड कांस्टेबल संजीव जाखड़ की टीम ने मध्य प्रदेश के मुंगावली में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके बाद ट्रांजिट रिमांड पर उसे दिल्ली लाया गया।

शादी समारोह में की थी पुलिसकर्मी की हत्या

पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि 10 मई 1998 को सोनीपत के गांव सैयां खेड़ा में एक शादी समारोह के दौरान विवाद के बाद उसने अपने साथियों के साथ अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस गोलीबारी में हरियाणा पुलिस के जवान जय भगवान की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। इस मामले में गन्नौर थाने में हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था।

पुलिस से बचने के लिए बदल ली पहचान

जेल से फरार होने के बाद आरोपी पहले महाराष्ट्र गया और फिर मध्य प्रदेश में बस गया। वहां उसने राजेंद्र सिंह यादव के नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज बनवा लिए। वर्ष 2003 में उसने शादी की और पिछले दो दशक से सामान्य नागरिक की तरह रह रहा था।

आठ आपराधिक मामलों में वांछित

पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में हत्या, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, चोरी और पुलिस हिरासत से फरार होने सहित आठ आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह दिल्ली के दो मामलों और हरियाणा के हत्या व फरारी के मामलों में घोषित अपराधी था।

डीसीपी चंदर कुमार सिंह ने कहा कि 28 साल बाद इस आरोपी की गिरफ्तारी क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि कानून से बचने के लिए कोई कितनी भी नई पहचान बना ले, लेकिन अंततः कानून का शिकंजा उस तक पहुंच ही जाता है। फिलहाल आरोपी से आगे की पूछताछ जारी है।

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  Sports

WTC Points Table: West Indies को हराकर Pakistan ने लगाई लंबी छलांग, टॉप 8 में की धमाकेदार वापसी

पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने त्रिनिदाद में खेले गए दूसरे टेस्ट मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए वेस्टइंडीज को आठ विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला 1-1 से बराबर कर ली। इतना ही नहीं, इस जीत का असर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 की अंक तालिका पर भी देखने को मिला, जहां पाकिस्तान एक स्थान ऊपर चढ़कर आठवें पायदान पर पहुंच गया। वहीं वेस्टइंडीज हार के बाद सबसे निचले स्थान पर खिसक गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान पहले टेस्ट में 90 रन से हार गया था, जिसके बाद वह अंक तालिका में सबसे नीचे पहुंच गया था। हालांकि दूसरे मुकाबले में टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वापसी की और महत्वपूर्ण जीत हासिल कर अपनी स्थिति में सुधार किया।

बता दें कि त्रिनिदाद के क्वींस पार्क ओवल मैदान पर खेले गए दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान को जीत के लिए 77 रन का लक्ष्य मिला था। टीम ने चौथे दिन दो विकेट खोकर यह लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया। अब्दुल्ला शफीक 24 रन बनाकर नाबाद लौटे, जबकि कप्तान बाबर आजम ने भी 24 रन की नाबाद पारी खेली। बाबर आजम ने बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज जोमेल वारिकन की लगातार दो गेंदों पर छक्के लगाकर पाकिस्तान को यादगार जीत दिलाई।

गौरतलब है कि इस मुकाबले में पहली पारी में शतक लगाने वाले अब्दुल्ला शफीक ने भी अहम भूमिका निभाई। वहीं पाकिस्तान के स्पिन गेंदबाज सजिद खान और अली उस्मान ने क्वींस पार्क ओवल की स्पिन के अनुकूल पिच का भरपूर फायदा उठाया और वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। उनकी प्रभावी गेंदबाजी ही पाकिस्तान की जीत की सबसे बड़ी वजहों में से एक रही।

इस जीत के साथ पाकिस्तान ने विदेशी सरजमीं पर टेस्ट क्रिकेट में लगातार आठ हार का सिलसिला भी समाप्त कर दिया। बता दें कि वर्ष 2000 के बाद से पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज के खिलाफ कोई भी टेस्ट श्रृंखला नहीं गंवाई है और इस बार भी टीम ने यह रिकॉर्ड कायम रखा।

मौजूद जानकारी के अनुसार, विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 की अंक तालिका में ऑस्ट्रेलिया पहले स्थान पर बना हुआ है। ऑस्ट्रेलिया ने आठ में से सात टेस्ट जीते हैं और उसके पास 84 अंक तथा 87.50 प्रतिशत अंक प्रतिशत है। दक्षिण अफ्रीका चार मैचों में तीन जीत के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि न्यूजीलैंड चार जीत, एक हार और एक ड्रॉ के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद है।

बांग्लादेश चौथे स्थान पर है। टीम ने चार में से दो मुकाबले जीते, एक हारा और एक ड्रॉ खेला है। भारत पांचवें स्थान पर है। शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने अब तक नौ टेस्ट खेले हैं, जिनमें चार जीत, चार हार और एक मुकाबला ड्रॉ रहा है। भारत के पास 52 अंक और 48.15 प्रतिशत अंक प्रतिशत है।

श्रीलंका छठे स्थान पर है, जबकि इंग्लैंड 13 मुकाबलों में चार जीत, आठ हार और एक ड्रॉ के साथ सातवें स्थान पर बना हुआ है। पाकिस्तान अब छह टेस्ट में दो जीत और चार हार के साथ 16 अंक तथा 22.22 प्रतिशत अंक प्रतिशत लेकर आठवें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं वेस्टइंडीज 12 मुकाबलों में दो जीत, आठ हार और दो ड्रॉ के साथ 30 अंक और 20.83 प्रतिशत अंक प्रतिशत के साथ नौवें स्थान पर है। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के शुरुआती चरण में यह जीत पाकिस्तान के लिए आगे की चुनौती को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
Thu, 06 Aug 2026 19:51:18 +0530

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