'आवारापन 2' का ट्रेलर हुआ रिलीज, धांसू अवतार में दिखे इमरान हाशमी, फिर मोहब्बत के लिए लड़ेंगे जंग
Awarapan 2 Trailer: बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ का शानदार ट्रेलर रिलीज हो चुका है. जी हां, मेकर्स ने फिल्म का ट्रेलर 6 अगस्त, बुधवार को रिलीज किया. ऐसे में अब 'आवारापन 2' की पहली झलक ने ही फैंस को एक्साइटेड कर दिया है. 'आवारापन 2' का ट्रेलर काफी शानदार है और ये आते ही हर तरफ छा गया है. वहीं विशेष फिल्म ने फिल्म का ट्रेलर अपने ऑफिसियल इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, "आपने उसका दर्द महसूस किया है. अब उसका गुस्सा महसूस कीजिए. शिवम पंडित का चैप्टर 2 शुरू हो रहा है आवारापन 2 - ऑफिशियल ट्रेलर अब आ गया है! दुनिया भर के सिनेमाघरों में 14 अगस्त 2026 को."
Kanwar Yatra 2026: कांवड़ियों की सेवा क्यों की जाती है? सावन मास में हर थोड़ी दूर पर बनाए जाते हैं शिविर
Kanwar Yatra 2026: सावन का महीवा हो और शिव भक्त कांवड़ियों की बात न हो, ऐसा हो नहीं सकता है. कांवड़ यात्रा सनातन धर्म की सबसे विशाल और भव्य यात्रा मानी जाती है. इसमें भोले के भक्त कंधे पर कांवड़ रख कर नंगे पैर पैदल यात्रा करते हैं और गंगातट पर जाते हैं. यहां से वे जल भरकर वापस अपने घर नंगे पैर लौटते हैं. उस गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और फिर अपने घर लौटते हैं. इस दौरान उनकी सेवा करने के लिए रास्ते में कांवड़ियों की सेवा हेतु जगह-जगह शिविर लगे होते हैं. रास्ते में चलते हुए लोग भी इनकी खूब सेवा करते हैं, इन्हें जल, फल और दवाएं प्रदान करते हैं. विशाल भंडारे लगाए जाते हैं, जहां ये लोग भोजन कर सके. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्यों इन कांवड़ियों की सेवा के लिए इतने लोग आगे आते हैं? चलिए इस बारे में जानते हैं.
कांवड़ियों के लिए भव्य शिविर और भंडारों का आयोजन
हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक या बिहार-झारखंड में बैद्यनाथ धाम तक, रास्ते में कई सेवा शिविर लगते हैं. इन शिविरों में यात्रा के दौरान थक जाने वाले कांवड़ियों को रुक कर आराम करने की सुविधा मिलती है. यहां वे शरीर को आराम देते हैं. इन शिविरों में इनके लिए मुफ्त भोजन, चाय-नाश्ता और मेडिकल फैसिलिटीज उपलब्ध होती है. सावन के महीने में धार्मिक संस्थाओं के साथ-साथ समाज सेवी लोग भी इन शिविरों का आयोजन करते हैं. कांवड़ियों के लिए शुद्ध शाकाहारी भोजन के लिए भंडारे आयोजित होते हैं.
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क्यों खास होती है इन कांवड़ियों की सेवा?
कांवड़ यात्रा करने वाले लोगों की सेवा करने का खास महत्व होता है. कहते हैं कि इनकी सेवा करने से बहुत ही पुण्य मिलता है. कांवड़ियों की सेवा हमेशा श्रद्धा और भक्ति के साथ करनी चाहिए. कांवड़ यात्रा के लिए जाने वाले लोगों को भोले नाम से बुलाया जाता है. सभी एक-दूसरे से भोले कहते हैं. दरअसल, धार्मिक मान्यता है कि कांवड़ियों की सेवा करना यानि की स्वयं पृथ्वी पर शिव जी के सेवा करना है. कांवड़ियों की सेवा करने से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और इसे महादेव का आशीर्वाद भी मिलता है.
कांवड़ियों की सेवा का महत्व क्या है?
कांवड़ यात्रा करने वाले लोगों की सेवा का लाभ भी कम नहीं होता है. कांवड़िए लंबी यात्रा करते हैं और फिर कई दिनों बाद अपने घर जाते हैं. इस दौरान पैदल यात्रा करते हुए वह थक जाते हैं. इसलिए, सिर्फ धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि इनकी सेवा को सामाजिक रूप से भी महत्व दिया जाता है. इनकी मदद करना और जरूरतों को पूरी करना मानव दृष्टि से भी अच्छा माना जाता है. इन कांवड़ियों की निस्वार्थ भाव से सेवा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं.
कांवड़ियों की सेवा करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
कांवड़ियों की सेवा करते समय हमेशा उनसे सम्मानपूर्वक व्यवहार करें. शिव भक्तों से आदर से बात करनी चाहिए. उन्हें शुद्ध और स्वच्छ भोजन और पानी ही देना चाहिए. कांवड़ियों के पैरों में अक्सर छाले और चोट लग सकती है. कई बार घुटनों में दर्द हो जाता है. ऐसे में उन्हें जरूरत पड़ने पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराएं. उनकी दवा-पट्टी करें. भीड़भाड़ में अनुशासन बनाए रखें और कांवड़ियों को रास्ता दें. सेवा बिना किसी भेदभाव और दिखावे के करें.
क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं?
कांवड़ा यात्रा से जुड़ी धार्मिक मान्यता है कि शिव पुराण और लोकमान्यताओं के अनुसार, सेवा भाव को महादेव की पूजा के समान माना जाता है. निस्वार्थ भाव से की गई सेवा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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