JDU कार्यकर्ताओं ने PM के पोस्टर पर कालिख पोती:नीतीश से मिले सम्राट-विजय सिन्हा; CM ने बुलाई सांसदों, विधायकों की मीटिंग
बिहार के सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन करने के बाद जदयू कार्यकर्ता गुस्से में हैं। वो इसे साजिश बता रहे हैं। इसको लेकर जदयू दफ्तर के बाहर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। शुक्रवार को जदयू कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी के पोस्टर पर कालिख पोती। इसके साथ ही पटना में जगह-जगह पोस्टर लगाए हैं। जिस पर लिखा है, 'नीतीश सेवक कर रहा पुकार, नेता करें अपने निर्णय पर विचार।' आज शाम 5 बजे सीएम नीतीश कुमार ने जदयू के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों की मीटिंग बुलाई है। वहीं डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने बारी से बारी से मुख्यमंत्री मुलाकात की है। अब जदयू ऑफिस में प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें देखिए खबर के हाईलाइट्स अब बिहार का घटनाक्रम कार्टूनिस्ट मंसूर नकवी की नजर से बिहार की नई सरकार को पूरा सपोर्ट करूंगा नामांकन से पहले नीतीश कुमार ने अपने X पर लिखा था कि, ‘संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूं। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं। बिहार की नई सरकार को मेरा सपोर्ट रहेगा।' नीतीश के ऐलान पर तेजस्वी यादव ने कहा है कि, बिहार में महाराष्ट्र मॉडल बीजेपी ने लागू किया है। भाजपा ने नीतीश कुमार को इतना टॉर्चर किया कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ रहा है। बीजेपी अपनी सहयोगी पार्टी को खत्म कर देती है। बीजेपी ने नीतीश को हाईजैक किया है। बिहार की सियासी हलचल की अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए...
Video: 20 साल पहले खाली हाथ आए थे गुमला! आज लाखों में कमाई, बच्चों को बनाया अफसर
Success Story: जहां आज के युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं. वहीं लोहरदगा के एक अनपढ़ किसान बिलेंद्र साहू ने अपनी मेहनत से सफलता की नई इबारत लिख दी है. कभी छोटे से खेत से शुरुआत करने वाले बिलेंद्र आज गुमला के टोटाम्बी में 20 एकड़ जमीन पर आधुनिक खेती कर रहे हैं. पारिवारिक मजबूरियों के कारण कभी स्कूल न जा सके बिलेंद्र पिछले 20 वर्षों से मटर, गोभी और सरसों जैसी फसलों के जरिए सालाना लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं. इस साल उन्होंने अकेले 12 एकड़ में मटर की बंपर पैदावार की है. उनकी इस कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खेती की कमाई से ही उन्होंने न सिर्फ जमीन खरीदी और घर बनाया, बल्कि अपने 5 बच्चों को उच्च शिक्षा भी दिलाई जिनमें से दो अब सरकारी सेवा में हैं. बिलेंद्र का कहना है कि खेती में जोखिम जरूर है, लेकिन अगर लगन और अनुभव हो तो यह किसी भी नौकरी से बेहतर है. उनकी यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने गांव-घर में ही रहकर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News18
























