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Russian Oil पर US की 'छूट' से भड़का विपक्ष, Rahul Gandhi ने संप्रभुता पर उठाए बड़े सवाल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को भारतीय विदेश नीति को "एक भ्रष्ट व्यक्ति का शोषण" बताया। यह बयान तब आया जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों में व्यवधान के बीच भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट दे दी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार (स्थानीय समय) को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान ईरान का मुकाबला करने के लिए 30 दिन के इस उपाय की घोषणा की, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले खाड़ी देशों पर गंभीर असर पड़ा है।
 

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संप्रभुता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि नई दिल्ली की विदेश नीति देश के इतिहास और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। गांधी ने लिखा कि भारत की विदेश नीति हमारे लोगों की सामूहिक इच्छा से उत्पन्न होती है। यह हमारे इतिहास, हमारे भूगोल और सत्य एवं अहिंसा पर आधारित हमारे आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। आज हम जो देख रहे हैं वह नीति नहीं है। यह एक भ्रष्ट व्यक्ति के शोषण का परिणाम है।

आज सुबह कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी सवाल उठाया कि क्या भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों पर निर्णय लेने के लिए अमेरिका से अनुमति की आवश्यकता है? अमेरिका के नव-साम्राज्यवादी अहंकार की आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता ने लिखा कि 30 दिन की छूट जारी करना' - यह खोखली भाषा नव-साम्राज्यवादी अहंकार से भरी है। क्या हम कोई ऐसा देश हैं जिसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका की अनुमति की आवश्यकता है?"
 

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अमेरिका के बयान पर नई दिल्ली की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए तिवारी ने आगे कहा कि एक अति-वाक्पटु सरकार की यह चुप्पी चौंकाने वाली है। क्या इसे संप्रभुता का अर्थ नहीं पता? कांग्रेस की यह टिप्पणी अमेरिकी वित्त मंत्री के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि विभाग ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देते हुए 30 दिन की छूट जारी की है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। वाशिंगटन ने कहा कि वह इस अल्पकालिक छूट के बाद नई दिल्ली से अमेरिकी तेल की खरीद में "वृद्धि" की उम्मीद करता है।

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West Asia Crisis पर राजनाथ सिंह का बड़ा बयान, 'महासागरों में Leadership देने को तैयार रहे India'

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का जिक्र करते हुए शुक्रवार को कहा कि बदलती भू-राजनीति के इस दौर में महासागर एक बार फिर दुनिया के शक्ति संतुलन के केंद्र में आ गए हैं और भारत की जिम्मेदारी है कि वह आत्मविश्वास एवं क्षमता के साथ नेतृत्व प्रदान करे। सिंह ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम ‘‘बेहद असामान्य’’ हैं और क्षेत्र की स्थिति का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में जो हो रहा है, वह बेहद असामान्य है। इस समय इस पर कोई ठोस टिप्पणी करना कठिन है कि पश्चिम एशिया में परिस्थितियां आगे किस दिशा में जाएंगी।’’

अन्य क्षेत्रों में भी आपूर्ति शृंखला में व्यवधान देख रहे हैं 

उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी के पूरे क्षेत्र को देखें तो यह दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जब इस क्षेत्र में अशांति या व्यवधान होता है तो इसका सीधा असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज हम केवल ऊर्जा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी आपूर्ति शृंखला में व्यवधान देख रहे हैं। इन अनिश्चितताओं का सीधा प्रभाव अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।’’ सिंह ने कहा कि मौजूदा स्थिति ने महासागरों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘बदलती वैश्विक भू-राजनीति के इस दौर में महासागर एक बार फिर दुनिया के शक्ति संतुलन के केंद्र में आ गए हैं। ऐसे समय में एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में भारत की जिम्मेदारी है कि वह आत्मविश्वास, क्षमता और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ नेतृत्व प्रदान करे।’’

रक्षा मंत्री ने हालांकि दो दिन पहले श्रीलंका के तट के पास अमेरिका द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई जिक्र नहीं किया। ईरानी युद्धपोत ‘आईरिस देना’ भारत की मेजबानी में आयोजित ‘मिलन’ बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी सैन्यकर्मी मारे गए। यह घटना फारस की खाड़ी से बाहर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष को दर्शाती है।

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए थे जिनमें ईरान के सर्वोच्चा नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। इस सैन्य हमले के बाद ईरान ने मुख्य रूप से इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन तथा सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए। पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों की ओर से हमलों और जवाबी हमलों के बीच यह संघर्ष काफी बढ़ गया है।

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अयोध्या में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन की तैयारियां शुरू, रामलला का करेंगी दर्शन, मंदिर निर्माण करने वाले श्रमिकों से भी करेंगी मुलाकात

राम मंदिर ट्रस्ट अब फोकस बदल रहा है निर्माण से संचालन की ओर। अयोध्या में शनिवार को भवन निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन यह साफ संकेत मिला कि आने वाले महीनों में श्रद्धालुओं की सुविधाएं, दर्शन प्रबंधन और रखरखाव सबसे बड़े एजेंडे में रहेंगे। बैठक से पहले समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र … Sat, 07 Mar 2026 17:29:34 GMT

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