सालभर रहता है इंतजार...मानसून आते ही बाजारों में छा जाती हैं ये पहाड़ी सब्जियां, शरीर को देती है गजब फायदे
Seasonal Pahadi Vegetable: मानसून की पहली बारिश के साथ ही उत्तराखंड के जंगलों और खेतों में कई पारंपरिक पहाड़ी सब्जियां निकलने लगती हैं, जिनका लोग पूरे साल इंतजार करते हैं. लिंगुड़ा, कंडाली, गेठी, पहाड़ी ककड़ी, चौलाई, सेम, तोरई और लौकी जैसी ये मौसमी सब्जियां अपने अनोखे स्वाद और भरपूर पोषण के लिए जानी जाती हैं. स्थानीय बाजारों में इनकी अच्छी मांग रहती है और इन्हें बेचकर किसानों को अतिरिक्त आमदनी भी होती है. यही वजह है कि ये सब्जियां सिर्फ पहाड़ की थाली का स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका और उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति का भी अहम हिस्सा हैं.
109 साल पुराने War Loan पर ब्रिटेन का जवाब, सीहोर के नगर सेठ परिवार से मांगे गए अतिरिक्त दस्तावेज, जानिए क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश के सीहोर के नगर सेठ रुठिया परिवार के 109 साल पुराने वार लोन मामले में नया अपडेट सामने आया है। दरअसल परिवार का दावा है कि ब्रिटेन के लोन मैनेजमेंट ऑफिस से उन्हें जवाब मिला है, जिसमें दावे की आगे की प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त दस्तावेज और प्रमाण मांगे गए हैं। वहीं अब परिवार जरूरी रिकॉर्ड जुटाकर ब्रिटिश अधिकारियों को भेजने की तैयारी कर रहा है।
दरअसल रुठिया परिवार के अनुसार पुराने दस्तावेजों की जांच के दौरान वर्ष 1917 से जुड़े रिकॉर्ड मिले। उस समय प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था और भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था। परिवार का दावा है कि उनके पूर्वजों ने ब्रिटिश सरकार को युद्ध के दौरान सैनिकों और अन्य जरूरी खर्चों के लिए 35 हजार रुपए वार लोन के रूप में दिए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर परिवार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से ब्रिटेन के लोन मैनेजमेंट ऑफिस को कानूनी नोटिस भेजा। यह नोटिस ईमेल और हार्ड कॉपी दोनों माध्यमों से भेजा गया था। अब ब्रिटिश कार्यालय की ओर से मिले जवाब के बाद इस मामले की प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है।
परिवार करेगा दस्तावेज जमा
वहीं परिवार के मुताबिक, यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस ने अपने जवाब में कहा है कि यदि दावेदार को किसी अप्राप्त भुगतान का अधिकार होने की संभावना है तो संबंधित होल्डिंग से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड के साथ Gilt Registrar – Computershare Investor Services PLC से संपर्क किया जाए। कार्यालय ने यह भी बताया कि अब तक भेजे गए दस्तावेज संबंधित विभाग को भेज दिए गए हैं। साथ ही परिवार से कहा गया है कि यदि उनके पास प्रमाण-पत्र, पुराने पत्र, रसीदें या अन्य दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं तो उनकी प्रतियां भी भेजी जाएं, ताकि दावे की जांच आगे बढ़ाई जा सके। रुठिया परिवार का कहना है कि वे सभी उपलब्ध रिकॉर्ड तैयार कर जल्द ही ब्रिटिश अधिकारियों को भेजेंगे, जिससे आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी हो सके।
फरवरी में भेजा था लीगल नोटिस
दरअसल रुठिया परिवार के सदस्य विवेक रुठिया के अनुसार, ब्रिटिश शासन के साथ हुए लेन-देन से जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद फरवरी 2026 में ब्रिटेन को कानूनी नोटिस भेजा गया था। परिवार का कहना है कि उस समय दिए गए 35 हजार रुपए की वर्तमान कीमत काफी अधिक हो सकती है। उनका दावा है कि उनके दादा सेठ जुम्मा लाल के निधन के बाद यह दस्तावेज परिवार को वसीयत के जरिए मिले। परिवार का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पुराने कर्ज से जुड़े मामलों की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। फिलहाल ब्रिटेन की ओर से केवल अतिरिक्त दस्तावेज और साक्ष्य मांगे गए हैं। दावे को स्वीकार या अस्वीकार करने संबंधी कोई अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है। परिवार अब मांगे गए रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की तैयारी में जुटा है, जिसके बाद मामले की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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