53 साल पुराना ब्लॉकबस्टर गाना, आज भी अपनी महबूबा को सुनाते हैं आशिक, पिता का कर्ज चुकाने लिए एक्टर बना था हीरो
साल 1973 में राज कपूर एक फिल्म लेकर आए थे, जिसका नाम है 'बॉबी'. इसी फिल्म से डिंपल कपाड़िया ने अपने करियर की शुरुआत की थी.फिल्म में ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया दोनों की जोड़ी काफी हिट हुई थी.फिल्म के गाने भी काफी पसंद किए गए थे. लेकिन फिल्म का एक गाना तो काफी हिट हुआ था. वो गान है, मैं शायर तो नहीं, मगर ऐ हंसी..' इस गाने में ऋषि कपूर और अरुणा ईरानी नजर आए थे. गाने को आवाज शेलेंद्र सिहं ने दी है. फिल्म को बनाते समय राज कपूर बुरी तरह कर्ज में डूबे हुए थे. लेकिन उन्होंने रिस्क लेकर फिल्म बनाई और फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. इस फिल्म का बजट की वजह से राज कपूर के बेटे ही फिल्म में हीरो के तौर पर नजर आए थे. ऋषि ने पिता का डूबता हुआ करियर बचाया था. आज भी आशिक ये गाना अपनी महबूबा को सुनाते हैं.
चांदी के बारीक तारों का जादू! करीमनगर की 200 साल पुरानी सिल्वर फिलीग्री कला, जिसकी नक्काशी दुनिया को करती है हैरान
Karimnagar Silver Filigree Art : तेलंगाना के करीमनगर जिले की सदियों पुरानी सिल्वर फिलीग्री कला अपनी बारीक और अद्भुत कारीगरी के लिए दुनिया भर में मशहूर है. चांदी के बेहद महीन तारों से तैयार की जाने वाली यह अनूठी हस्तकला देखने वालों को हैरान कर देती है. इस कला में कारीगर चांदी को पिघलाकर पतले तार बनाते हैं और उन्हें हाथों से बुनकर जालीदार डिजाइन तैयार करते हैं, जिससे भगवान की मूर्तियां, पानदान, इत्रदान और ऐतिहासिक स्मारकों के मॉडल बनाए जाते हैं. करीब 200 साल पहले एलगांडल से करीमनगर पहुंची यह कला आज भी अपनी खास पहचान बनाए हुए है और इसे वर्ष 2007 में भारत सरकार से जीआई टैग भी मिल चुका है. हालांकि बढ़ती लागत और मशीन से बनने वाले सस्ते उत्पादों के कारण यह पारंपरिक कला चुनौतियों का सामना कर रही है. इसके बावजूद सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए इस कला को फिर से नई पहचान दिलाने की कोशिशें तेज हो गई हैं.
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