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अब Islamabad भी Iran के खिलाफ युद्ध में कूदा! पाकिस्तान-सऊदी का 'नाटो' पैक्ट एक्टिव, पाकिस्तानी विदेश मंत्री Ishaq Dar की सीधी चेतावनी

मध्य-पूर्व (Middle East) में भड़की आग अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहाँ से वापसी का रास्ता केवल महाविनाश की ओर जाता है। अभी तक ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच चल रही जंग में अब एक नया और खतरनाक खिलाड़ी कूद सकता है- पाकिस्तान। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक डार के एक बयान ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है, जिसमें उन्होंने साफ संकेत दिया है कि पाकिस्तान अब ईरान के खिलाफ युद्ध के मैदान में औपचारिक रूप से उतर सकता है।
 
पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने द्विपक्षीय रक्षा समझौते का हवाला देते हुए संकेत दिया है कि उसे बढ़ते ईरान युद्ध में घसीटा जा सकता है। रियाद उन खाड़ी देशों में से एक है, जिन्हें तेहरान ने कई जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों में निशाना बनाया है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक डार ने कहा कि उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष को सऊदी क्षेत्र पर हमले शुरू करने के खिलाफ चेतावनी दी है।

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डार ने कहा, "मैंने उन्हें (ईरान को) समझाया कि हमारे बीच एक रक्षा समझौता है।" यह किसी पाकिस्तानी अधिकारी की ओर से पहली स्पष्ट पुष्टि है कि ईरान युद्ध के संदर्भ में रक्षा समझौता सक्रिय हो सकता है, जो पिछले हफ्ते संयुक्त हमले शुरू करने के बाद अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किया गया था। तब से इस संघर्ष में कई क्षेत्रीय खिलाड़ी शामिल हो गए हैं क्योंकि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों, डिप्लोमैटिक सुविधाओं और महत्वपूर्ण ऊर्जा साइटों पर हमला किया है।
 

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सऊदी अरब सुरक्षा चाहता है

डार ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सुरक्षा समझौते ने एक निवारक के रूप में काम किया और रियाद पर भारी हमलों को रोका। उन्होंने आगे कहा, "दूसरे सभी देशों के उलट, सऊदी अरब पर सबसे कम हमले हुए।" साथ ही, डार ने कहा कि ईरान ने इस्लामाबाद से गारंटी मांगी कि सऊदी इलाके का इस्तेमाल तेहरान के खिलाफ ऑपरेशन शुरू करने के लिए नहीं किया जाएगा। जैसा कि उन्होंने कहा, "उन्होंने कुछ भरोसा मांगा कि उनकी ज़मीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाना चाहिए।"

पिछले साल सितंबर में फॉर्मल हुआ यह समझौता NATO-स्टाइल फ्रेमवर्क पर काम करता है, जिसमें एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाता है। यह सालों के तनावपूर्ण रिश्तों के बाद दोनों मुस्लिम देशों के बीच नए सिरे से सुरक्षा सहयोग का एक अहम पल था।

ईरान-इज़राइल युद्ध तेज़ होने से इलाका तनाव में

गुरुवार सुबह ईरान द्वारा इज़राइल पर मिसाइलें दागे जाने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव तेज़ी से बढ़ गया, जिससे लगातार छठे दिन हवाई हमले हुए। यह हमला उन खबरों के तुरंत बाद हुआ कि एक अमेरिकी सबमरीन ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया था, जिसके बाद तेहरान ने पूरे इलाके में मिलिट्री और इकोनॉमिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी।

इज़राइल ने लेबनान में नए हमलों की घोषणा के तुरंत बाद ईरानी मिसाइलों के आने की पुष्टि की। ये ऑपरेशन दक्षिणी बेरूत में हिज़्बुल्लाह के मज़बूत ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे, जो ईरान के सपोर्ट वाले ग्रुप्स के खिलाफ़ मिलकर किए गए एक्शन का हिस्सा थे। इस बीच, अमेरिका और इज़राइल ने बुधवार को भी भारी बमबारी जारी रखी, जिसमें ईरानी मिलिट्री यूनिट्स और अथॉरिटी के खास सेंटर्स को निशाना बनाया गया।

ईरानी लीडरशिप का संकट सामने आने से अफ़रा-तफ़री और बढ़ गई

ईरान पर हमलों की तेज़ी इतनी तेज़ी से बढ़ी कि सरकारी टेलीविज़न ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शोक समारोह को टालने का ऐलान कर दिया, जो लड़ाई की शुरुआत में मारे गए थे। इस घटना की तुलना 1989 में अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार के दौरान हुए बड़े पैमाने पर सार्वजनिक शोक से की गई।

शनिवार को अमेरिका और इज़राइल द्वारा मिलकर शुरू किए गए इस युद्ध में ईरान की लीडरशिप, मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर और न्यूक्लियर क्षमताओं को निशाना बनाया गया है। हालांकि वॉशिंगटन और तेल अवीव ने इशारा किया है कि शासन बदलना एक लंबे समय का मकसद हो सकता है, लेकिन मकसद और टाइमलाइन पर बदलते बयानों से लगता है कि टकराव लंबा और अनप्रेडिक्टेबल हो सकता है।  

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IND vs ENG: वानखेड़े में रन बरसेंगे या गेंदबाज मचाएंगे कहर? पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी? क्या सही रहेगा

IND vs ENG Semi Final: मुंबई का ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम गुरुवार को एक और बड़े मुकाबले का गवाह बनेगा। टी20 वर्ल्ड कप 2026 का दूसरा सेमीफाइनल भारत और इंग्लैंड के बीच यहीं खेला जाएगा। लगातार तीसरी बार दोनों टीमें इस स्टेज पर आमने-सामने हैं, और पिछली टक्कर की तरह इस बार भी मुकाबला कांटे का रहने की उम्मीद है।

इस टूर्नामेंट में इंग्लैंड को यहां एक मैच ज्यादा खेलने का अनुभव है, लेकिन प्रदर्शन ऐसा नहीं रहा जिसे वे याद रखना चाहें। नेपाल ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी जबकि वेस्टइंडीज से हार भी झेलनी पड़ी। भारत ने भी अमेरिका के खिलाफ शुरुआती झटके खाए थे लेकिन वापसी करते हुए जीत दर्ज की।

वानखेड़े में टी20 रिकॉर्ड पर नजर

  • कुल टी20 इंटरनेशनल मैच: 16
  • पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम की जीत: 8
  • लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम की जीत: 8
  • पहले बल्लेबाजी करते हुए सबसे बड़ा स्कोर: 254/6 (वेस्टइंडीज बनाम जिम्बाब्वे, 2026)
  • सबसे बड़ा सफल रनचेज: 230 (इंग्लैंड बनाम दक्षिण अफ्रीका, 2016)
  • सबसे कम स्कोर जो डिफेंड हुआ: 161/8 (भारत बनाम अमेरिका, 2026)

आंकड़े साफ बताते हैं कि यहां टॉस जीतने वाली टीम को कोई खास फायदा नहीं मिला है। 16 में से 8-8 मुकाबले दोनों ही स्थितियों में जीते गए हैं।

पिच रिपोर्ट और टॉस फैक्टर कितना अहम
वानखेड़े को आमतौर पर फ्लैट और हाई-स्कोरिंग पिच के लिए जाना जाता है। इस टी20 वर्ल्ड कप में यहां खेले गए 7 मैचों में से 4 बार पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम जीती है। इसकी बड़ी वजह है कि यहां ओस का असर कम रहता है, खासकर ईडन गार्डन्स जैसे मैदानों के मुकाबले।

सेमीफाइनल से दो दिन पहले पिच पर हल्की हरी घास दिखी, लेकिन मैच से पहले इसे ट्रिम किया जाएगा। यह लाल मिट्टी की सतह है, जो काली मिट्टी के मुकाबले ज्यादा उछाल देती है। मतलब गेंद बल्ले पर अच्छी आएगी और तेज गेंदबाजों की भूमिका अहम हो सकती है।

हालात ऐसे हैं कि टॉस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाजी करने का फैसला कर सकती है। स्कोरबोर्ड प्रेशर इस स्टेज पर बड़ा फैक्टर बन सकता है, क्योंकि दोनों पारियों में हालात ज्यादा नहीं बदलेंगे।

क्या होगा मुकाबले का रंग?
अगर बल्लेबाज सेट हो गए तो 200+ स्कोर कोई हैरानी नहीं होगी। लेकिन शुरुआती ओवरों में स्विंग और अतिरिक्त उछाल बल्लेबाजों को परख सकता है। भारत और इंग्लैंड दोनों के पास मजबूत पेस अटैक है, इसलिए पावरप्ले बेहद अहम रहेगा। सेमीफाइनल का दबाव अलग होता है। वानखेड़े की पिच तैयार है- अब देखना यह है कि कौन टीम हालात को बेहतर पढ़ती है और फाइनल का टिकट कटाती है।

Thu, 05 Mar 2026 11:14:33 +0530

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