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आतंकवाद 'अस्तित्व' के लिए खतरा! भारत ने UN में ISIS और Al-Qaeda के खिलाफ सामूहिक युद्ध का किया आह्वान

भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दोहराते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद किसी सीमा या राष्ट्रीयता को नहीं मानता और यह अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए एक "अस्तित्वगत खतरा" (Existential Threat) बन चुका है।

 भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के ‘‘अस्तित्व’’ के लिए खतरा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने बुधवार को कहा, ‘‘आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। यह सीमाओं, राष्ट्रीयता या जातीयता को नहीं जानता और यह एक ऐसी चुनौती है जिसका सामना अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सामूहिक रूप से मिलकर करना होगा।’’

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पहलगाम हमले का जिक्र: पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद बेनकाब 

यूएनओसीटी (UNOCT) के वार्षिक संबोधन के दौरान भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले का मुद्दा उठाया। इस हमले को 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) ने अंजाम दिया था, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही एक चेहरा है। इस कायराना हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी। भारत ने इस उदाहरण के जरिए दुनिया को बताया कि कैसे आतंकवादी संगठन अपने सहयोगियों के साथ मिलकर निर्दोषों को निशाना बना रहे हैं।

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उन्होंने कहा, ‘‘हमें आईएसआईएस और अल कायदा तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करनी होगी।’’ भारत ने बहुपक्षीय सहयोग के लिए एक केंद्रीय साधन के रूप में वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति (जीसीटीएस) के महत्व पर जोर दिया। पुरी ने कहा कि भारत जीसीटीएस की 9वीं समीक्षा के लिए परामर्श में सक्रियता से हिस्सा लेगा तथा उन्होंने इस प्रक्रिया में वार्ता के दौरान सह-सहायकों फिनलैंड और मोरक्को को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। पुरी ने कहा, ‘‘न्यूयॉर्क और दुनिया भर में (आतंकवादी घटनाओं के बाद) भारत की सभी पहल हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं,’’ जिसमें ‘दिल्ली घोषणा’ भी शामिल है।

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आतंक फैलाने के उद्देश्य से संचालित गतिविधियों में नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने के मुद्दे पर ‘दिल्ली घोषणा’ एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी उद्देश्यों में नयी एवं उभरती प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का मुद्दा कई सदस्य देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अक्टूबर 2022 में भारत की अध्यक्षता में गठित सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-विरोधी समिति (सीटीसी) ने ‘आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला’ विषय पर नयी दिल्ली और मुंबई में एक विशेष बैठक का आयोजन किया था।

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विशेष बैठक के बाद समिति ने आतंकवादी उद्देश्यों में इस्तेमाल होने वाली नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने के लिए ‘दिल्ली घोषणा’ को अपनाया था। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के लगातार विकसित हो रहे खतरे से निपटने के लिए अपने साझेदारों की क्षमता निर्माण और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने के वास्ते संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से उसके साथ मिलकर काम करना जारी रखे हुए है।

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अब Islamabad भी Iran के खिलाफ युद्ध में कूदा! पाकिस्तान-सऊदी का 'नाटो' पैक्ट एक्टिव, पाकिस्तानी विदेश मंत्री Ishaq Dar की सीधी चेतावनी

मध्य-पूर्व (Middle East) में भड़की आग अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहाँ से वापसी का रास्ता केवल महाविनाश की ओर जाता है। अभी तक ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच चल रही जंग में अब एक नया और खतरनाक खिलाड़ी कूद सकता है- पाकिस्तान। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक डार के एक बयान ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है, जिसमें उन्होंने साफ संकेत दिया है कि पाकिस्तान अब ईरान के खिलाफ युद्ध के मैदान में औपचारिक रूप से उतर सकता है।
 
पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने द्विपक्षीय रक्षा समझौते का हवाला देते हुए संकेत दिया है कि उसे बढ़ते ईरान युद्ध में घसीटा जा सकता है। रियाद उन खाड़ी देशों में से एक है, जिन्हें तेहरान ने कई जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों में निशाना बनाया है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक डार ने कहा कि उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष को सऊदी क्षेत्र पर हमले शुरू करने के खिलाफ चेतावनी दी है।

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डार ने कहा, "मैंने उन्हें (ईरान को) समझाया कि हमारे बीच एक रक्षा समझौता है।" यह किसी पाकिस्तानी अधिकारी की ओर से पहली स्पष्ट पुष्टि है कि ईरान युद्ध के संदर्भ में रक्षा समझौता सक्रिय हो सकता है, जो पिछले हफ्ते संयुक्त हमले शुरू करने के बाद अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किया गया था। तब से इस संघर्ष में कई क्षेत्रीय खिलाड़ी शामिल हो गए हैं क्योंकि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों, डिप्लोमैटिक सुविधाओं और महत्वपूर्ण ऊर्जा साइटों पर हमला किया है।
 

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सऊदी अरब सुरक्षा चाहता है

डार ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सुरक्षा समझौते ने एक निवारक के रूप में काम किया और रियाद पर भारी हमलों को रोका। उन्होंने आगे कहा, "दूसरे सभी देशों के उलट, सऊदी अरब पर सबसे कम हमले हुए।" साथ ही, डार ने कहा कि ईरान ने इस्लामाबाद से गारंटी मांगी कि सऊदी इलाके का इस्तेमाल तेहरान के खिलाफ ऑपरेशन शुरू करने के लिए नहीं किया जाएगा। जैसा कि उन्होंने कहा, "उन्होंने कुछ भरोसा मांगा कि उनकी ज़मीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाना चाहिए।"

पिछले साल सितंबर में फॉर्मल हुआ यह समझौता NATO-स्टाइल फ्रेमवर्क पर काम करता है, जिसमें एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाता है। यह सालों के तनावपूर्ण रिश्तों के बाद दोनों मुस्लिम देशों के बीच नए सिरे से सुरक्षा सहयोग का एक अहम पल था।

ईरान-इज़राइल युद्ध तेज़ होने से इलाका तनाव में

गुरुवार सुबह ईरान द्वारा इज़राइल पर मिसाइलें दागे जाने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव तेज़ी से बढ़ गया, जिससे लगातार छठे दिन हवाई हमले हुए। यह हमला उन खबरों के तुरंत बाद हुआ कि एक अमेरिकी सबमरीन ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया था, जिसके बाद तेहरान ने पूरे इलाके में मिलिट्री और इकोनॉमिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी।

इज़राइल ने लेबनान में नए हमलों की घोषणा के तुरंत बाद ईरानी मिसाइलों के आने की पुष्टि की। ये ऑपरेशन दक्षिणी बेरूत में हिज़्बुल्लाह के मज़बूत ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे, जो ईरान के सपोर्ट वाले ग्रुप्स के खिलाफ़ मिलकर किए गए एक्शन का हिस्सा थे। इस बीच, अमेरिका और इज़राइल ने बुधवार को भी भारी बमबारी जारी रखी, जिसमें ईरानी मिलिट्री यूनिट्स और अथॉरिटी के खास सेंटर्स को निशाना बनाया गया।

ईरानी लीडरशिप का संकट सामने आने से अफ़रा-तफ़री और बढ़ गई

ईरान पर हमलों की तेज़ी इतनी तेज़ी से बढ़ी कि सरकारी टेलीविज़न ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शोक समारोह को टालने का ऐलान कर दिया, जो लड़ाई की शुरुआत में मारे गए थे। इस घटना की तुलना 1989 में अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार के दौरान हुए बड़े पैमाने पर सार्वजनिक शोक से की गई।

शनिवार को अमेरिका और इज़राइल द्वारा मिलकर शुरू किए गए इस युद्ध में ईरान की लीडरशिप, मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर और न्यूक्लियर क्षमताओं को निशाना बनाया गया है। हालांकि वॉशिंगटन और तेल अवीव ने इशारा किया है कि शासन बदलना एक लंबे समय का मकसद हो सकता है, लेकिन मकसद और टाइमलाइन पर बदलते बयानों से लगता है कि टकराव लंबा और अनप्रेडिक्टेबल हो सकता है।  

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बुमराह भी इंसान हैं...फाइनल से पहले ग्लेन फिलिप्स का बड़ा बयान, जस्सी के खराब दिन का इंतजार कर रहा न्यूजीलैंड

Glenn Phillips Statement on Bumrah bowling: टी20 वर्ल्ड कप फाइनल की दहलीज पर खड़े ग्लेन फिलिप्स ने टीम इंडिया के सबसे बड़े हथियार जसप्रीत बुमराह पर मनोवैज्ञानिक हमला बोल दिया है. फिलिप्स का मानना है कि बुमराह भले ही विश्व स्तरीय गेंदबाज हों, लेकिन आखिरकार 'गलती करना इंसान का स्वभाव' है. उन्होंने साफ संकेत दिया कि कीवी टीम बुमराह के किसी एक खराब दिन या एक गलत ओवर का फायदा उठाने की ताक में है. Fri, 6 Mar 2026 21:45:45 +0530

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