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अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की ओर से दागी जा रही मिसाइलों में 86 प्रतिशत की कमी: पेंटागन

वाशिंगटन, 4 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि चल रहे संघर्ष के पहले चार दिनों में अमेरिकी और सहयोगी बलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। ईरान द्वारा दागी जा रही मिसाइलों में भारी कमी आई है और अमेरिकी बलों ने ईरान में काफी अंदर तक हमले बढ़ा दिए हैं।

पेंटागन में एक प्रेस ब्रीफिंग में बोलते हुए युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान के सैन्य ढांचे को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बारे में आज मैं आपके सामने एक स्पष्ट संदेश लेकर खड़ा हूं। अमेरिका निर्णायक, विनाशकारी और निर्दयता से जीत रहा है। यह अभियान शनिवार तड़के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर शुरू हुआ था और अभी भी अपने शुरुआती चरण में है।

हेगसेथ ने कहा कि पहली बात तो यह है कि इस अभियान को शुरू हुए अभी केवल चार दिन हुए हैं। आंकड़े बदल रहे हैं, स्थिति सामान्य हो रही है और अधिक सेनाएं पहुंच रही हैं। दूसरी बात, इस अभियान को शुरू हुए केवल चार दिन हुए हैं और परिणाम अविश्वसनीय रहे हैं, वास्तव में ऐतिहासिक।

वायु सेना के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान में 2,000 से अधिक ठिकानों पर पहले ही हमला कर चुका है। आज सुबह तक, अमेरिकी केंद्रीय कमान लगातार प्रगति कर रही है। केन ने कहा कि ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या लड़ाई के पहले दिन की तुलना में 86 प्रतिशत कम हो गई है, जिसमें अकेले पिछले 24 घंटों में 23 प्रतिशत की कमी आई है। ईरान के ड्रोन हमलों में भी भारी गिरावट आई है।

उन्होंने कहा कि और उनके एकतरफा हमले वाले ड्रोन लॉन्च शुरुआती दिनों की तुलना में 73 प्रतिशत कम हो गए हैं। पेंटागन के अनुसार, यह अभियान तीन मुख्य उद्देश्यों पर केंद्रित है, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना, उसकी नौसेना को निष्क्रिय करना और तेहरान को अपनी सैन्य शक्ति का पुनर्निर्माण करने से रोकना।

उन्होंने कहा कि पहला, हम ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों को निशाना बनाकर नष्ट कर रहे हैं। केन ने कहा कि दूसरा, हम ईरानी नौसेना को नष्ट कर रहे हैं। तीसरा, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरान अपनी युद्ध क्षमता का तेजी से पुनर्निर्माण या पुनर्गठन न कर सके।

जनरल ने कहा कि अमेरिकी सेना पहले ही एक पनडुब्बी सहित 20 से अधिक ईरानी नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर चुकी है, जिससे युद्ध क्षेत्र में ईरान की नौसैनिक उपस्थिति काफी कमजोर हो गई है। पेंटागन ने संघर्ष के दौरान हुई एक दुर्लभ नौसैनिक कार्रवाई का भी जिक्र किया। केन ने कहा कि 1945 के बाद पहली बार, अमेरिकी नौसेना की एक तीव्र आक्रमणकारी पनडुब्बी ने एक ही मार्क 48 टॉरपीडो का उपयोग करके दुश्मन के युद्धपोत को डुबो दिया है।

पेंटागन ने यह भी पुष्टि की कि संघर्ष के शुरुआती चरणों में छह अमेरिकी सैनिक शहीद हुए। केन ने उनमें से चार के नाम बताए। केन ने बताए कि कैप्टन कोडी कॉर्क, सार्जेंट फर्स्ट क्लास नोआ टीगेन्स, सार्जेंट फर्स्ट क्लास निकोल एमोर और सार्जेंट डेक्लन कोडी शहीद हो गए हैं। ये सभी अमेरिकी सेना रिजर्व की 103वीं सस्टेनमेंट कमांड के थे। केन ने कहा कि हमारे शहीद सैनिकों के परिवारों के साथ हम आज शोक में शामिल हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि कई क्षेत्रीय सहयोगी ईरानी हमलों के खिलाफ रक्षात्मक अभियानों में भाग ले रहे हैं। केन ने कहा कि जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और कुवैत ने पूरे क्षेत्र में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले ड्रोन और मिसाइलों को रोका है। शुरुआती दौर में मिली सफलताओं के बावजूद, दोनों अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष अभी भी खतरनाक और अनिश्चित बना हुआ है।

केन ने कहा कि 100 घंटे बीत चुके हैं। अभी तो शुरुआत ही है। ये अभियान जटिल, खतरनाक हैं और अभी खत्म होने से बहुत दूर हैं। मिसाइल हमलों और तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर ईरान के साथ महीनों से बढ़ते तनाव के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया। वाशिंगटन ने बार-बार कहा है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान के मिसाइल और सैन्य ढांचे को नष्ट करना और उसे परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है।

यह संघर्ष मध्य पूर्व में तेजी से फैल गया है, क्षेत्रीय हवाई रक्षा प्रणालियां ड्रोन और मिसाइलों को रोक रही हैं, जबकि अमेरिकी नौसेना फारस की खाड़ी और आसपास के जलक्षेत्रों में ईरानी ठिकानों पर हमले कर रही है।

--आईएएनएस

एसडी/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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जेन-जी विद्रोह के बाद नेपाल में संसदीय चुनाव, मतदाताओं से निर्भय होकर मतदान करने की अपील

काठमांडू, 4 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल में गुरुवार को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं। इस बीच कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने देशभर के मतदाताओं से बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की है।

देश में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के 275 सदस्यों को चुनने के लिए वोटिंग हो रही है, जो फेडरल पार्लियामेंट का निचला सदन है। कुल सीटों में से 165 फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (एफपीटीपी) प्रणाली के तहत चुने जाएंगे, जबकि 110 सीटें प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम के जरिए भरी जाएंगी।

ये चुनाव पिछले साल 8-9 सितंबर को हुए जेन-जी विद्रोह के बाद हो रहे हैं, जिसमें सरकारी अनुमानों के मुताबिक 77 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 84 अरब नेपाली रुपए से ज्यादा की निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ था।

जेन-जी आंदोलन के बाद हिमालयी देश किस दिशा में जाएगा, इस बारे में शुरू में अनिश्चितता थी। हालांकि, प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने देश को चुनाव की ओर अग्रसर किया और अब नेपाल गुरुवार को होने वाले मतदान के साथ फिर से लोकतांत्रिक रास्ते पर लौटता दिखाई दे रहा है।

राम प्रसाद भंडारी ने अपने संदेश में कहा कि चुनाव के संचालन और प्रबंधन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने मतदाताओं से अपने मताधिकार का उपयोग करने का आग्रह किया।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदान गुरुवार को सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक देशभर में होगा।

उन्होंने कहा, “चुनाव प्रतिनिधिक शासन प्रणाली की नींव हैं और लोगों को अपनी पसंद के प्रतिनिधियों के माध्यम से शासित होने का अधिकार प्रदान करते हैं। इसलिए मैं सभी मतदाताओं से आग्रह करता हूं कि वे अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर आत्मविश्वास के साथ मतदान करें।”

उन्होंने आगे कहा कि कमीशन साफ-सुथरे, स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

एक अलग बयान में निर्वाचन निकाय ने बताया कि मतपत्र और मतपेटियों सहित सभी आवश्यक चुनाव सामग्री देशभर के मतदान केंद्रों तक पहुंचा दी गई है।

मतदान केंद्रों के निर्माण और प्रबंधन, दिव्यांगजनों और महिलाओं के लिए अनुकूल सुविधाओं की व्यवस्था तथा चुनाव कर्मियों की तैनाती जैसी तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, 1 करोड़ 89 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं।

इनमें 96 लाख 60 हजार पुरुष और 92 लाख 40 हजार महिलाएं शामिल हैं।

आयोग ने बताया कि एफपीटीपी प्रणाली के तहत 3,406 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जबकि समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत 3,135 उम्मीदवारों की सूची जारी की गई है।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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