इतिहास गवाह है। आसमान पर सिर्फ भारतीय वायु सेना का राज है। भारतीय वायु सेना के एक मैसेज से पाकिस्तान का क्यों छूट रहा है पसीना? ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहा युद्ध अब वर्ल्ड वॉर थ्री की तरफ बढ़ चुका है। वहीं दूसरी तरफ अफगान सेना ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर बार-बार हमले कर रही है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर पांच दिनों से युद्ध जारी है। अफगान सेना ने पाकिस्तान की 25 से ज्यादा चौकियों पर कब्जा करने की बात कही है और 100 से अधिक लोगों के मारने का दावा किया है। इन सबके बीच भारत भी चुप नहीं बैठा है। भारतीय वायु सेना ने एक ऐसा संदेश भेजा है जिसके बाद पाकिस्तान की टेंशन बहुत ज्यादा बढ़ गई है। दुनिया में छिड़ी इस युद्ध की स्थिति के बीच भारतीय वायु सेना भी चौकन्नी है। वह भी लगातार भारतीय सीमा पर गिद्ध की निगाह बनाए हुई है।
भारत ने 5 मार्च से 12 मार्च तक पाकिस्तान की सीमा के दक्षिण सेक्टर के पास भारतीय वायु सेना के बड़े अभ्यास के लिए भारतीय हवाई क्षेत्र आरक्षित करते हुए नोटम जारी कर दिया है। वैसे तो भारत सरकार इस अभ्यास को नियमित सैन्य अभ्यास बता रही है। लेकिन इस कदम ने इस्लामाबाद की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आधिकारिक विमान अधिसूचनाओं के अनुसार यह अस्थाई एयर स्पेस रिजर्वेशन भारतीय वायुसेना के अभ्यास के लिए किया गया है। आमतौर पर ऐसे अभ्यास से पहले यह सूचना दी जाती है ताकि नागरिक हवाई जहाज उस क्षेत्र से दूर रहें और कोई दुर्घटना ना हो। लेकिन इस फैसले ने पाकिस्तान के आकाओं की चिंता बढ़ा दी।
पाकिस्तान इस समय कई मोर्चों पर व्यस्त है। उसे अफगानिस्तान और ईरान की सीमा पर नजर रखनी पड़ रही है। साथ ही मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण उसे अरब सागर में भी अपनी नौसेना को सतर्क रखना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि भारत की इस घोषणा के बाद पाकिस्तान ने भी अपनी तरफ से अतिरिक्त सैन्य और हवाई संसाधन बॉर्डर पर तैनात कर दिए गए हैं। वह भारत पर नजर रखने के लिए चौकन्ना है।
मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक पाकिस्तान की सेना पहले से ही काफी दबाव में काम कर रही है क्योंकि उसे एक साथ कई जगहों पर कई मोर्चों पर सुरक्षा संभालनी पड़ रही है। भारत-पाकिस्तान सीमा का दक्षिणी हिस्सा जो राजस्थान और पाकिस्तान के सिंध इलाके के पास पड़ता है। पहले भी सैन्य अभ्यासों का गवारा है। जब भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता है। इस इलाके में गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं। 5 से 12 मार्च तक होने वाला यह अभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिमी एशिया में हालात ठीक नहीं है। वहां चल रहे संघर्षों का असर हवाई यातायात और सैन्य तैयारियों पर भी पड़ा है। ऑपरेशन से दूर के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच इस तरह के कदम आम हो गए हैं। दोनों देश समय-समय पर सीमा के पास सैन्य अभ्यास करते हैं और उसके लिए हवाई क्षेत्र अस्थाई रूप से बंद करने की सूचना जारी करते हैं। दोनों देश अक्सर अपनी सीमाओं के आसपास सेना अभ्यासों के लिए हवाई क्षेत्रों को सुरक्षित करते हैं। नोटम नोट नोटिस टू एयरमैन जारी करते रहते हैं।
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ईरान के बाद अब अमेरिका ने पाकिस्तान को जवाब देना शुरू कर दिया है। अमेरिका ने पाकिस्तानियों को गोलियों से भून डाला है। जिसकी खबर बाहर आते ही दुनिया में हड़कंप मच गया। वो कहते हैं ना दूसरों के मामले में टांग अड़ाने का अंजाम कभी-कभी बहुत भारी पड़ता है और इस समय अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ ऐसा ही माहौल दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तानियों पर गोलियां क्यों चलाई? आइए इसका खुलासा सबसे पहले आपके सामने करते हैं। फिर आगे यह भी जानेंगे कि कितने पाकिस्तानी मारे गए और अमेरिका ने पाकिस्तान में कैसे गोली चलाई? क्या है नियम? इसका भी खुलासा करेंगे। दरअसल बता दें कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामने से जुड़ी खबरों के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। पाकिस्तान दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी वाला देश माना जाता है। इसलिए भावनात्मक प्रतिक्रियाएं यहां पर तेज हो गई। रविवार को कराची स्थित अमेरिकी कॉन्सल्यूट के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने यह पुष्टि की है कि कंसलेट परिसर के अंदर से भी फायरिंग हुई थी। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मौतें सीधे अमेरिकी मरीन की गोली से हुई या फिर नहीं।
इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसी दूसरे देश की जमीन पर अमेरिकी मरीन गोली चला सकते हैं? इसका जवाब अंतरराष्ट्रीय कानून में है। 1961 की विएना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमेटिक रिलेशंस के तहत दूतावास और कंसोलेट परिसर इनवॉलेबल माने जाते हैं। मेजबान देश की जिम्मेदारी होती है कि वह सुरक्षा सुनिश्चित करें। लेकिन यदि परिसर पर सीधा हमला हो तो अंदर तैनात सुरक्षाकर्मियों को आत्मरक्षा का अधिकार पूरा होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान देश भर में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई है और कई दर्जन घायल होने की खबर सामने आई हैं। कराची में पुलिस थानों और अन्य इमारतों पर भी हमले की घटनाएं सामने आई है। वहीं इन सबके बीच अमेरिका ने एक और बड़ा झटका पाकिस्तान को दे डाला है। स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने नए वीजा अपॉइंटमेंट्स रद्द कर दिए हैं।
इस्लामाबाद, लाहौर और कराची में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। स्टाफ मूवमेंट सीमित किया गया है और यह एक कूटनीतिक संदेश भी माना जाता है कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि दूतावास की जमीन तकनीकी रूप से उस देश की संप्रभु भूमि ही रहती है। लेकिन उस पर विशेष कूटनीतिक संरक्षण लागू होता है। इसका मतलब यह नहीं कि वह अमेरिका की जमीन बन जाती है। बल्कि वहां प्रवेश और कारवाई पर विशेष नियम लागू होते हैं। यह घटना सिर्फ कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है बल्कि अमेरिका पाकिस्तान रिश्तों के लिए एक संवेदनशील मोड़ साबित हो सकती है। पाकिस्तान पहले ही आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से झूंझ रहा है। ऐसे में कूटनीतिक तनाव का असर वीजा, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय रणनीति पर पड़ सकता है। निष्कर्ष साफ है। दूतावास परिसर के भीतर से फायरिंग की पुष्टि स्थानीय स्तर पर हुई। लेकिन मौतों की सीधी जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानून आत्मरक्षा की अनुमति देता है। लेकिन हर ऐसी घटना कूटनीतिक संबंधों पर गहरा असर छोड़ती है।
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