Weather Forecast 06 Aug : उत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय, जानिए आपके यहां कैसा रहेगा आज मौसम का हाल
उत्तर भारत के आसमान पर घिरे बादलों और झमाझम बारिश ने पूरे क्षेत्र का मिजाज बदल दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून अब अपने पूरे परवान पर है और उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में इसकी सक्रियता काफी बढ़ गई है।
पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक लगातार हो रही बारिश से जहां एक ओर लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर कुछ इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। आइए जानते हैं 6 अगस्त 2026 को आपके अपने इलाके में मौसम का ताजा हाल कैसा रहेगा।
पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश का तांडव और चेतावनी
मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का रेड/ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते इन क्षेत्रों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है।
प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को पूरी तरह सतर्क रहने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की सख्त हिदायत दी है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भी गरज के साथ बारिश होने की पूरी संभावना जताई गई है।
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और यूपी में तेज हवाओं के साथ बारिश के आसार
मैदानी राज्यों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बादल छाए रहने के साथ-साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं और रुक-रुक कर बौछारें पड़ सकती हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे उमस से काफी राहत मिली है।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों ही हिस्सों में व्यापक वर्षा का अनुमान है, जहां कुछ चुनिंदा जिलों में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी दी गई है।
बिहार में वज्रपात का खतरा और प्रशासनिक तैयारियां
बिहार में भी मानसूनी गतिविधियां काफी तेज बनी हुई हैं, जिसके कारण कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने किसानों को खेतों में काम करते समय मौसम की ताजा जानकारी रखने और खराब मौसम में खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है।
लगातार हो रही बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सभी संबंधित विभागों और आपदा प्रबंधन टीमों को पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
India Myanmar Border Dispute: म्यांमार से जमीन की अदला-बदली करेगा भारत? जानिए क्या है पूरा मामला
भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के एक अनसुलझे हिस्से को तय करने के लिए अब क्षेत्रीय अदला-बदली के प्रस्ताव पर कूटनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी पत्रिका 'द डिप्लोमैट' की एक रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह मामला तूल पकड़ चुका है, जहां एक ओर केंद्र सरकार घुसपैठ और आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में इसे लेकर राजनीतिक हलचल और तीखा विरोध शुरू हो गया है।
जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव और विदेश मंत्रालय का पक्ष
अमेरिकी मैगजीन 'द डिप्लोमैट' की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार मणिपुर सीमा पर बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच चंदेल जिले और म्यांमार की काबाव घाटी से सटे करीब 2.8 किमी के दायरे में लगभग 1.4 वर्ग मील क्षेत्र की अदला-बदली के प्रस्ताव की जांच कर रही है।
इस मामले पर नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा पर कुछ ऐसे इलाके हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है और उन हिस्सों पर बातचीत लगातार जारी है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर जमीन की अदला-बदली की पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर स्वीकार किया कि अनसुलझे हिस्सों को सुलझाने के प्रयास चल रहे हैं।
सुरक्षा कारणों से क्यों जरूरी है सीमा का निर्धारण?
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत-म्यांमार की कुल 1,643 किमी सीमा में से लगभग 1,472 किमी का सीमांकन हो चुका है, जबकि करीब 171 किमी का हिस्सा मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश का लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी क्षेत्र अभी अनसुलझा है। इस अनसुलझे दायरे की वजह से सीमा पर पूरी तरह बाड़बंदी करना और 'फ्री मूवमेंट रीजीम' (FMR) को समाप्त करने के बाद सुरक्षा पुख्ता करना कठिन हो रहा है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य इस अदला-बदली के जरिए सीमा को सुरक्षित करना, अवैध अप्रवासन, उग्रवादियों की आवाजाही और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे सीमा पार के अपराधों पर पूरी तरह लगाम लगाना है।
मणिपुर में COCOMI का कड़ा विरोध और चेतावनी
इस संभावित प्रस्ताव की खबर सामने आते ही मणिपुर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। मैतेई नागरिक संगठनों के संयुक्त निकाय 'कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी' (COCOMI) ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि राज्य का एक छोटा सा हिस्सा भी म्यांमार को सौंपा गया, तो व्यापक जन-आंदोलन किया जाएगा।
संगठन का तर्क है कि 1949 में भारतीय संघ में विलय के बाद मणिपुर पहले ही अपने ऐतिहासिक भूभाग का कुछ हिस्सा खो चुका है और राज्य की भौगोलिक व क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। COCOMI ने साफ कहा है कि केंद्र सरकार को मणिपुर के लोगों की सहमति के बिना ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना चाहिए।
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