India Myanmar Border Dispute: म्यांमार से जमीन की अदला-बदली करेगा भारत? जानिए क्या है पूरा मामला
भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के एक अनसुलझे हिस्से को तय करने के लिए अब क्षेत्रीय अदला-बदली के प्रस्ताव पर कूटनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी पत्रिका 'द डिप्लोमैट' की एक रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह मामला तूल पकड़ चुका है, जहां एक ओर केंद्र सरकार घुसपैठ और आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में इसे लेकर राजनीतिक हलचल और तीखा विरोध शुरू हो गया है।
जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव और विदेश मंत्रालय का पक्ष
अमेरिकी मैगजीन 'द डिप्लोमैट' की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार मणिपुर सीमा पर बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच चंदेल जिले और म्यांमार की काबाव घाटी से सटे करीब 2.8 किमी के दायरे में लगभग 1.4 वर्ग मील क्षेत्र की अदला-बदली के प्रस्ताव की जांच कर रही है।
इस मामले पर नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा पर कुछ ऐसे इलाके हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है और उन हिस्सों पर बातचीत लगातार जारी है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर जमीन की अदला-बदली की पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर स्वीकार किया कि अनसुलझे हिस्सों को सुलझाने के प्रयास चल रहे हैं।
सुरक्षा कारणों से क्यों जरूरी है सीमा का निर्धारण?
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत-म्यांमार की कुल 1,643 किमी सीमा में से लगभग 1,472 किमी का सीमांकन हो चुका है, जबकि करीब 171 किमी का हिस्सा मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश का लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी क्षेत्र अभी अनसुलझा है। इस अनसुलझे दायरे की वजह से सीमा पर पूरी तरह बाड़बंदी करना और 'फ्री मूवमेंट रीजीम' (FMR) को समाप्त करने के बाद सुरक्षा पुख्ता करना कठिन हो रहा है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य इस अदला-बदली के जरिए सीमा को सुरक्षित करना, अवैध अप्रवासन, उग्रवादियों की आवाजाही और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे सीमा पार के अपराधों पर पूरी तरह लगाम लगाना है।
मणिपुर में COCOMI का कड़ा विरोध और चेतावनी
इस संभावित प्रस्ताव की खबर सामने आते ही मणिपुर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। मैतेई नागरिक संगठनों के संयुक्त निकाय 'कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी' (COCOMI) ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि राज्य का एक छोटा सा हिस्सा भी म्यांमार को सौंपा गया, तो व्यापक जन-आंदोलन किया जाएगा।
संगठन का तर्क है कि 1949 में भारतीय संघ में विलय के बाद मणिपुर पहले ही अपने ऐतिहासिक भूभाग का कुछ हिस्सा खो चुका है और राज्य की भौगोलिक व क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। COCOMI ने साफ कहा है कि केंद्र सरकार को मणिपुर के लोगों की सहमति के बिना ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना चाहिए।
'ईरान में भी वही करेंगे जो वेनेजुएला में किया था.' ट्रंप ने क्यों की दोनों की तुलना? परमाणु कार्यक्रम पर दी हिदायत
Trump Compare Iran and Venezuela: ईरान को लेकर ट्रंप ने फिर चेतावनी दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ वही नीति अपना रहा है, जो उसने पहले वेनेजुएला के मामले में अपनाई थी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की पहली पसंद ईरान के साथ समझौता करना है.
लास वेगास में एक सभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की ताकत कमजोर हुई है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा.
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वेनेजुएला का दिया उदाहरण
ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला में युद्ध सिर्फ 48 मिनट चला था। उस दौरान हमने जो भी हासिल किया, उसकी पूरी कीमत वसूल कर ली. जीत का पूरा फायदा हमें मिला और अब हम ईरान के साथ भी यही कर रहे हैं। हम ईरान पर लगातार दबाव बना रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि मैं चाहता हूं कि समझौता हो, क्योंकि मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता.
ट्रंप ने बड़े अटैक की बनाई थी योजना
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि एक बहुत बड़े सैन्य अभियान की योजना बनाई गई थी, लेकिन ईरान द्वारा बातचीत की पेशकश के बाद इसे रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हम पर सबसे बड़ा हमला होने वाला था, और उन्होंने मुझे फोन करके कहा- कृपया ऐसा मत करो। चलो बात करते हैं. फिर उन्होंने कहा कि हमने ऐसा कभी नहीं कहा. आप जानते हैं कि फर्जी खबरों में क्या लिखा होता है। उन्होंने ऐसा कहा था, लेकिन हम बात कर रहे हैं. देखते हैं आगे क्या होता है.
'ईरान अब सम्मान करता है'
ट्रंप ने कहा कि हाल की घटनाओं के बाद ईरान अब अमेरिका का सम्मान करता है. उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा. उन्होंने कहा कि अब वे हमारा सम्मान करते हैं. पिछले किसी भी राष्ट्रपति ने वह कदम नहीं उठाया, जो काफी पहले उठाया जाना चाहिए था. मैं साफ कहना चाहता हूं कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए.
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वेनेजुएला के साथ बताए अच्छे संबंध
वेनेजुएला का जिक्र करते हुए ट्रंप ने वहां के कुख्यात गिरोह 'ट्रेन डी अरागुआ' के खिलाफ कार्रवाई के लिए अमेरिकी आव्रजन एजेंसी (ICE) की तारीफ की. उन्होंने कहा कि ICE हमारे सबसे बड़े देशभक्तों में से एक है. इस एजेंसी ने वेनेजुएला के ट्रेन डी अरागुआ गिरोह के खिलाफ शानदार काम किया है. लेकिन अब हमारे वेनेजुएला के साथ अच्छे संबंध हैं. हमें वहां से काफी तेल मिल रहा है और दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हैं. ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है और अमेरिका को उसके साथ बेहतर संबंधों का फायदा मिल रहा है.
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