Rohit Sharma संभालेंगे Mumbai Indians की कमान, Hardik Pandya को ट्रेड करने की तैयारी, सूत्रों का दावा
मुंबई इंडियंस IPL 2027 के लिए रोहित शर्मा को वापस कप्तान बनाने की तैयारी कर रही है। टीम मैनेजमेंट हार्दिक पांड्या के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं है, जिन्होंने तीन साल पहले रोहित की जगह कप्तानी संभाली थी। उनके कार्यकाल के दौरान, मुंबई केवल एक बार प्लेऑफ़ में पहुँच पाई। अब टीम न केवल कप्तान बदलने पर विचार कर रही है, बल्कि हार्दिक को ट्रेड करने के लिए भी तैयार है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वनडे सीरीज के लिए न्यूजीलैंड रवाना होने से पहले मैनेजमेंट ने रोहित से संपर्क किया था। उनसे फिर से जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया और दिलचस्प बात यह है कि वे इस प्रस्ताव के लिए मान गए हैं।
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यह घटनाक्रम फ्रेंचाइजी के कोचिंग विभाग में हुए बड़े बदलावों के बाद सामने आया है; शुक्रवार, 30 अक्टूबर को फ्रेंचाइजी ने चार नए कोचों की घोषणा की थी। इस बीच, सूर्यकुमार यादव और जसप्रीत बुमराह जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के नामों पर भी विचार किया जा सकता था, जिन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी दी जा सकती थी। युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा के नाम पर भी भविष्य के एक संभावित विकल्प के तौर पर चर्चा हुई थी। हालांकि, अंत में रोहित को ही सबसे उपयुक्त विकल्प के रूप में चुना गया।
'द इंडियन एक्सप्रेस' को एक सूत्र ने बताया कि शुरुआत में रोहित ने तिलक वर्मा का नाम सुझाया था, लेकिन फ्रेंचाइजी ने उनसे कप्तानी संभालने का अनुरोध किया, जिसके लिए अब वह मान गए हैं। न्यूजीलैंड रवाना होने से पहले कई दौर की बातचीत हुई थी, और नए कोचों की नियुक्ति के दौरान भी रोहित से सुझाव मांगे गए थे। मुंबई में पांड्या की स्थिति एक और अहम सवाल बनी हुई है। ऐसी चर्चा है कि एक 'ट्रेड' समझौते के जरिए यह ऑलराउंडर किसी दूसरी फ्रेंचाइजी में जा सकता है। अगर ऐसा कोई समझौता नहीं हो पाता है, तो माना जा रहा है कि वह रोहित की कप्तानी में खेलना जारी रखने के लिए तैयार हैं।
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गुजरात से पूरी तरह नकद सौदे (ऑल-कैश मूव) के जरिए मुंबई में आने के बाद, 2024 सीजन से पहले पांड्या को कप्तान बनाए जाने पर मुंबई के समर्थकों के बीच काफी विवाद हुआ था। घरेलू मैचों के दौरान वानखेड़े स्टेडियम में दर्शकों ने उन्हें कई बार हूट भी किया। हालांकि, T20 वर्ल्ड कप जीतने और टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाने के बाद, उन्होंने एक बार फिर फैंस का दिल जीत लिया।
पुतिन की यूरोप को चेतावनी- रूस से टकराव महंगा पड़ेगा:बोले- बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही न रोकें, वरना होर्मुज जैसे हालात बनेंगे
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि रूस से टकराव बढ़ाना उनके लिए महंगा पड़ सकता है। मॉस्को में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा, अगर बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश की गई, तो वहां भी होर्मुज जैसे हालात बन सकते हैं। पुतिन ने कहा कि रूस यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर कोई देश उससे टकराव करता है तो उसे इसके नतीजों के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ा तो किसी की जीत नहीं होगी। बाल्टिक सागर को लेकर क्यों नाराज हैं पुतिन बाल्टिक सागर रूस और यूरोप के बीच सामान लाने-ले जाने का एक अहम रास्ता है। रूस समेत कई यूरोपीय देश इसका इस्तेमाल व्यापार के लिए करते हैं। यहां से तेल, गैस और दूसरी चीजें जहाजों के जरिए एक देश से दूसरे देश पहुंचाई जाती हैं। यूक्रेन से जंग शुरू होने के बाद रूस और यूरोपीय देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। बाल्टिक सागर के आसपास नाटो देशों की मौजूदगी भी है। रूस को डर है कि अगर यूरोपीय देशों ने उसके जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से रोका, तो उसके व्यापार पर असर पड़ेगा। पुतिन इसी बात को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जहाजों की आवाजाही रोकी गई तो हालात बिगड़ सकते हैं। इसका असर सिर्फ रूस पर नहीं, बल्कि दूसरे देशों के व्यापार पर भी पड़ेगा। पुतिन ने फिनलैंड और नॉर्वे के PM से बातचीत का बचाव किया पुतिन ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे से फोन पर हुई बातचीत का भी बचाव किया। दोनों नेताओं ने इसी हफ्ते उनसे बात की थी। यूरोप के कुछ नेताओं ने रूस से बातचीत करने के उनके फैसले की आलोचना की थी। पुतिन ने कहा कि रूस और यूरोपीय देशों के बीच रिश्ते सुधारने के लिए बातचीत जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि मॉस्को यूरोप के साथ संबंध बेहतर करने की कोशिशों के लिए तैयार है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… सर्बिया में छात्र संगठनों ने चुनाव जीता:पुतिन समर्थक PM पद के उम्मीदवार वुचिच हारे; देश में 2 साल से प्रदर्शन चल रहे सर्बिया में छात्र संगठनों के गठबंधन ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने चुनाव जीत लिया है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन के करीबी पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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