High Court ने रोका Lucknow आर्य समाज मंदिर में विवाह, कम उम्र के जोड़े की शादी का मामला
लखनऊ, पांच अगस्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक आर्य समाज मंदिर को अगले आदेश तक विवाह कराने या विवाह प्रमाण पत्र जारी करने से रोक दिया है। अदालत ने विवाह पूर्व जोड़े की कानून के मुताबिक विवाह योग्य आयु का सत्यापन करने में कथित तौर पर विफल रहने को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबीता रानी की पीठ ने नेहा और एक अन्य याचिकाकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ताओं ने कथित पुलिस उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग की थी। अदालत ने कहा कि यदि कानून द्वारा निर्धारित आयु से नीचे के व्यक्तियों का विवाह कराया जाता है तो इस प्रक्रिया में शामिल सभी लोग कानून के तहत जिम्मेदार होंगे। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता आनंद कुमार की आयु उनके आधार कार्ड के अनुसार 19 वर्ष है, जबकि एक पुरुष के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष है।
अदालत ने पूछा कि विवाह प्रमाण पत्र में आनंद कुमार की आयु 22 वर्ष दर्ज है, जबकि उसके आधार कार्ड में आयु एक जनवरी, 2007 है और उम्र के संबंध में कोई अन्य प्रमाण उपलब्ध नहीं है। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 31 अगस्त निर्धारित की।
Jammu Kashmir को पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत दे केंद्र, Congress ने उठाई मांग
नयी दिल्ली, पांच अगस्त कांग्रेस ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की और कहा कि अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को निरस्त किए जाने तथा राज्य के पुनर्गठन के सात वर्ष बाद भी वहां के लोग इस वादे के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। पार्टी महासचिव एवं जम्मू-कश्मीर प्रभारी सैयद नासिर हुसैन ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई बार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन यह अब तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और विधानसभा चुनाव भी संपन्न हो चुके हैं, फिर भी केंद्र शासित प्रदेश में ऐसी व्यवस्था बनी हुई है, जिसमें उपराज्यपाल के पास निर्वाचित सरकार से अधिक अधिकार हैं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह स्थिति संविधान की संघीय भावना और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है तथा जम्मू-कश्मीर के लोगों को अन्य राज्यों की तरह पूर्ण लोकतांत्रिक स्वशासन से वंचित करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर को तत्काल और बिना किसी शर्त के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने, निर्वाचित सरकार को पूर्ण संवैधानिक अधिकार देने तथा संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संघीय ढांचे का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग करती है। हुसैन ने कहा कि केंद्र सरकार को अपना वादा अविलंब पूरा करना चाहिए।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निष्प्रभावी कर जम्मू-कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही, संसद के माध्यम से जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 पारित कर तत्कालीन राज्य का पुनर्गठन करते हुए उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था।
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