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Kartik Maas Ki Katha: कार्तिक मास में भगवान विष्णु की इस कथा का पाठ रोजाना करें, जानें कैसे बदला था बुजुर्ग महिला का भाग्य

Kartik Maas Ki Katha: हिंदू धर्म में कार्तिक के महीने को सबसे पवित्र माना जाता है. इसे पुण्यदायनी मास कहते हैं. पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा को पूरा करके इस महीने में पड़ने वाली देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं. इसी के बाद से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. कहा जाता है कि इस महीने में माता लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करने आती हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बरसाती है. कार्तिक के महीने में सनातन धर्म के प्रमुख पर्व व त्योहार जैसे कि दिवाल, गोवर्धन पूजा, धनतेरस, छठ और तुलसी विवाह भी आते हैं. देव दीपावली कार्तिक मास के मुख्य पर्वों में से एक हैं. इस दिन नदी व तालाब में दीया जलाने से जीवन के अंधकार दूर होते हैं. 

कार्तिक मास अत्यंत शुभ महीना कहलाता है. यह महीना भगवान कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान विष्णु को भी समर्पित होता है. इसलिए, धार्मिक मान्यता है कि इस महीने नित्य-प्रतिदिन उनकी आराधना करनी चाहिए और एक विशेष कथा का पाठ भी करना चाहिए. इस महीने से जुड़ी कई प्रचलित कथाएं हैं. मगर उन्हीं में से एक बुजुर्ग महिला की कथा भी है. आइए जानते हैं कार्तिक मास की इस कथा के बारे में.

कार्तिक मास की पौराणिक कथा (Kartik Maas Ki Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक बुढ़िया रहती थी वह हर साल नियम के साथ कार्तिक मास में सुबह-सुबह गंगा स्नान करती थी और व्रत किया करती थी. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवाव कृष्ण उसके व्रत खोलने के समय हमेशा खिचड़ी का एक कटोरा उनके पास रख जाते थे. रोज ऐसा ही होता देखकर उसके पास रहने वाली दूसरी बुजुर्गी औरत उससे ईर्ष्या करने लगी कि इसका कोई नहीं है फिर भी उसे हर दिन भोजन कैसे मिल जाता है.

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एक दिन बुढ़िया हमेशा की तरह कार्तिक स्नान  के लिए गंगा चली गई. उसके जाते ही श्रीकृष्ण वहां पर खिचड़ी से भरा हुआ कटोरा रखकर चले गए. तभी उसकी पड़ोसन की नजर और उसने उस कटोरे को उठाया है और घर के पीछे जाकर फेंक दिया है. बुढ़िया माई गंगा स्नान करके वापस लौटी तो वहां पर उन्हें खिचड़ी का कटोरा नहीं मिला और वह बुढ़िया भूखी रह गई. वह बहुत परेशान हुई और बार-बार कहने लगी की मेरी खिचड़ी कहां गई.

उसके मन में बस एक ही बात लहरा रही थी कहां गई मेरी खिचड़ी कहां गई. जिस जगह पड़ोसन महिला ने खिचड़ी फेंकी थी, वहां पर कुछ समय के बाद एक पौधा उग गया था और उसमे से दो प्यारे से फूल खिलें थे. तभी एक बार उस नगर का राजा वहां से गुजर रहा था, उसने वहां दो प्यारे से फूल देख लिए. राजा ने उन्हें तोड़कर अपनी रानी को दे दिया. रानी ने जैसे ही उन फूलों को सूंघा तो वह गर्भवती हो गई और उसने दो सुंदर पुत्रों को जन्म दिया.

राजा-रानी के दोनों पुत्र बड़े तो हो गए लेकिन वह किसी से भी कुछ नहीं बोलते थे. दोनों राजकुमार हिरण के शिकार पर जाते थे, उन्हें बस वही बूढ़ी औरत दिखती थी, जो अभी भी यही कहती थी कहां गई मेरी खिचड़ी और कहां गया मेरा कटोरा. एक दिन दोनों राजकुमार बुजुर्ग महिला के पास गए और वह दोनों उन्हें कहते हैं कि हम है तेरी खिचड़ी और हम है तेरा कटोरा. इसके बाद रोज यही होता था, एक दिन यह बात उस नगर के राजा के कानों में पड़ी तो राजा को आश्चर्य हुआ कि जब यह दोनों किसी से नहीं बोलते तो उस बुढ़िया से कैसे बात कर लेते हैं.

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तभी राजा ने उस बुढ़िया को अपने महल में बुलाया और उससे पूछा कि यह दोनों जब किसी से बात नहीं करते तो तुमसे आखिर कैसे कर लेते हैं? तो प्रतिउत्तर में बुढ़िया ने उनसे कहा मैं तो बस इतना जानती हूं कि मैं हमेशा की तरह कार्तिक मास में गंगा स्नान करने जाती थी और कृष्ण भगवान खुद मेरे लिए खिचड़ी से भरा हुआ कटोरा रखे थे.

एक दिन जब वह वापस लौटी तो उसे कटोरा नहीं मिला और तबसे बस मैं यही कह रही हो कहां गया मेरा कटोरा और कहां गई मेरी खिचड़ी ली और जब यह दोनों मुझसे मिले तो इन दोनों ने मुझे पूरी बात बताई कि उस दिन मेरी पड़ोसन ने खिचड़ी को फेंक दिया था और वहां पर एक सुंदर पौधा निकला था, जिसमें से दो सुंदर फूल निकले थे. जो बाद में राजा ने जाकर रानी को दिए और वही दो सुंदर फूल आपकी खिचड़ी और आपका कटोरा है. तब राजा को पूरी बात समझ आ चुकी थी और फिर उसने उस बूढ़ी औरत को महल में ही रहने को कहा और उसका पूरा ध्यान रखने का आदेश दिया.

कार्तिक मास की कथा पढ़ने से क्या मिलता है?

  • हिंदू धर्म में कार्तिक मास की कथा पढ़ने और सुनने का विशेष धार्मिक महत्व बताया जाता है. मान्यता है कि इस पवित्र महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने के साथ कार्तिक मास की कथा का पाठ करने से भक्तों को पुण्य फल की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ इस कथा को पढ़ता या सुनता है, उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहती है.
  • कार्तिक मास की बुजुर्ग महिला वाली कथा हमें सच्ची भक्ति, धैर्य और भगवान पर अटूट विश्वास रखने की सीख देती है. यह कथा बताती है कि भगवान अपने सच्चे भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं और उनकी भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती. इसके अलावा, इस कथा के माध्यम से दूसरों के प्रति ईर्ष्या और द्वेष की भावना न रखने का गूढ़ संदेश भी मिलता है.
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में नियमित रूप से कथा का पाठ करने से घर में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति के मन को शांति मिलती है. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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मुंबई इंडियंस के साथ जुड़े रॉबिन उथप्पा, IPL 2027 में अब संभालेंगे ये अहम जिम्मेदारी

Robin Uthappa: आईपीएल 2027 से पहले मुंबई इंडियंस अपने सपोर्ट स्टाफ में एक के बाद एक बदलाव कर रही है. इसी कड़ी में 5 बार की चैंपियन टीम ने भारत के पूर्व बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा को अपने साथ जोड़ा है और अहम जिम्मेदारी सौंपी है. उथप्पा लगभग 2 दशक बाद मुंबई इंडियंस में वापसी कर रहे हैं. वह 2008 में बतौर खिलाड़ी इस टीम का हिस्सा बने थे और अब वह फ्रेंचाइजी में अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे. आइए जानते हैं कि उथप्पा किस भूमिका में नजर आने वाले हैं...

मुंबई इंडियंस ने रॉबिन उथप्पा को सौंपी अहम जिम्मेदारी

मुंबई इंडियंस ने 2027 सीजन से पहले अपने कोचिंग सेटअप को फिर से तैयार करने के क्रम में अब रॉबिन उथप्पा को अपने साथ जोड़ लिया है. फ्रेंचाइजी ने रॉबिन उथप्पा को अपना नया बैटिंग कोच नियुक्त किया है. उथप्पा लगभग दो दशक बाद मुंबई इंडियंस में वापसी कर रहे हैं.

उन्होंने 2008 में IPL के पहले सीजन में इस फ्रेंचाइजी के लिए 14 मैच खेले थे और 320 रन बनाए थे. अब वह एक कोचिंग भूमिका में वापस आ रहे हैं और अपने साथ IPL तथा इंटरनेशनल क्रिकेट का लंबा अनुभव लेकर आए हैं. भारत के लिए खेल चुके उथप्पा का मुंबई इंडियंस की प्रतिद्वंद्वी टीम चेन्नई सुपर किंग्स के साथ भी गहरा नाता रहा है.

वह 2021 और 2022 सीज़न में CSK का हिस्सा थे. 2021 में CSK के चैंपियन बनने के सफर में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने चार मैचों में 115 रन बनाए थे, जिसमें दूसरे क्वालीफायर में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ खेली गई 63 रनों की महत्वपूर्ण पारी भी शामिल थी. मुंबई इंडियंस के कोचिंग स्टाफ में उनका शामिल होना उनके IPL सफर में एक दिलचस्प मोड़ है, क्योंकि वह पहले मुंबई की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी टीमों में से एक का हिस्सा रह चुके हैं.

IPL आंकड़े हैं शानदार

रॉबिन उथप्पा ने आईपीएल 2008 से लेकर 2022 तक कई टीमों का प्रतिनिधित्व किया. इस दौरान उन्होंने 205 मुकाबले खेले, जिसकी 197 पारियों में उन्होंने 130.3 की स्ट्राइक रेट और 27.5 के औसत से 4952 रन बनाए. उनके बल्ले से इस दौरान 27 शतक भी निकले.

धवल कुलकर्णी को बनाया बॉलिंग कोच

टी दिलीप को बनाया फील्डिंग कोच

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6,6,4, 4 और फिर विकेट... दमभर कुटाई के बाद मयंक ने तुरंत लिया बदला, डेरिल मिचेल की निकल गई हेकड़ी

न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 में वापसी करने वाले मयंक यादव ने टीम इंडिया के लिए पारप्ले में दमदार गेंदबाजी की. मयंक ने अपने स्पेल के पहले ही ओवर में टिम सीफर्ट का विकेट हासिल किया. इसके बाद उनका दूसरा शिकार डेरिल मिचेल बने. हालांकि, आउट होने से पहले मिचेल ने मयंक यादव के ओवर में धुआंधार खेल दिखाते हुए 20 रन कूट दिए थे. Fri, 30 Oct 2026 13:31:23 +0530

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