आज तिलक वर्मा के निशाने पर होगा बड़ा रिकॉर्ड, इतने छक्के लगाते ही रोहित-विराट समेत 4 भारतीय खिलाड़ियों को छोड़ देंगे पीछे
Tilak Varma Record : आज तिलक वर्मा के पास एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा. वो भारत और न्यूजीलैंड के बीच आज यानी 30 अक्टूबर (शुक्रवार) को खेलने जाने वाले मुकाबले में एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं. आज का मुकाबला दोपहर 13:30 भारत के समय के अनुसार शुरू होने वाला है. इस मैच के शुरू होने के ही तिलक वर्मा के पास रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़ने का मौका भी होगा. ऑकलैंड के ईडन पार्क पर तिलक वर्मा कौन सा रिकॉर्ड अपने नाम करेंगे. आइए आज इसके बारे में जानते हैं.
तिलक वर्मा इस सीरीज में अच्छी लय में नजर आए हैं. पांच मैचों की टी20 सीरीज में अब तक तिलक वर्मा ने 3 मैचों में 58 रन बनाए हैं. इस दौरान उनका उच्चतम स्कोर 51* रन रहा है. उनके नाम 6 चौके और 1 छक्के भी दर्ज हैं. आज जब तिलक मैदान पर उतरेंगे तो उनके पास छक्कों की बरसात कर एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा.
Pressure? ???? pic.twitter.com/wGjlAshtIL
— Tilak Varma (@TilakV9) October 24, 2026
तिलक वर्मा के पास छक्कों का शतक लगाने का मौका
तिलक वर्मा के पास इस मैच में 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक पूरे करने का मौका होगा. तिलक अब तक 73 मैचों की 69 पारियों में 94 छक्के लगा चुके हैं. अब उन्हें भारत के लिए 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय छक्के पूरे करने के लिए 6 छक्कों की जरूरत है. इस मैच में तिलक अगर 6 छक्के लगा देंगे तो वो भारत के लिए 100 छक्के लगाने वाले सातवें भारतीय क्रिकेटर बन जाएंगे.
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Kartik Maas Ki Katha: कार्तिक मास में भगवान विष्णु की इस कथा का पाठ रोजाना करें, जानें कैसे बदला था बुजुर्ग महिला का भाग्य
Kartik Maas Ki Katha: हिंदू धर्म में कार्तिक के महीने को सबसे पवित्र माना जाता है. इसे पुण्यदायनी मास कहते हैं. पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा को पूरा करके इस महीने में पड़ने वाली देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं. इसी के बाद से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. कहा जाता है कि इस महीने में माता लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करने आती हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बरसाती है. कार्तिक के महीने में सनातन धर्म के प्रमुख पर्व व त्योहार जैसे कि दिवाल, गोवर्धन पूजा, धनतेरस, छठ और तुलसी विवाह भी आते हैं. देव दीपावली कार्तिक मास के मुख्य पर्वों में से एक हैं. इस दिन नदी व तालाब में दीया जलाने से जीवन के अंधकार दूर होते हैं.
कार्तिक मास अत्यंत शुभ महीना कहलाता है. यह महीना भगवान कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान विष्णु को भी समर्पित होता है. इसलिए, धार्मिक मान्यता है कि इस महीने नित्य-प्रतिदिन उनकी आराधना करनी चाहिए और एक विशेष कथा का पाठ भी करना चाहिए. इस महीने से जुड़ी कई प्रचलित कथाएं हैं. मगर उन्हीं में से एक बुजुर्ग महिला की कथा भी है. आइए जानते हैं कार्तिक मास की इस कथा के बारे में.
कार्तिक मास की पौराणिक कथा (Kartik Maas Ki Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक बुढ़िया रहती थी वह हर साल नियम के साथ कार्तिक मास में सुबह-सुबह गंगा स्नान करती थी और व्रत किया करती थी. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवाव कृष्ण उसके व्रत खोलने के समय हमेशा खिचड़ी का एक कटोरा उनके पास रख जाते थे. रोज ऐसा ही होता देखकर उसके पास रहने वाली दूसरी बुजुर्गी औरत उससे ईर्ष्या करने लगी कि इसका कोई नहीं है फिर भी उसे हर दिन भोजन कैसे मिल जाता है.
एक दिन बुढ़िया हमेशा की तरह कार्तिक स्नान के लिए गंगा चली गई. उसके जाते ही श्रीकृष्ण वहां पर खिचड़ी से भरा हुआ कटोरा रखकर चले गए. तभी उसकी पड़ोसन की नजर और उसने उस कटोरे को उठाया है और घर के पीछे जाकर फेंक दिया है. बुढ़िया माई गंगा स्नान करके वापस लौटी तो वहां पर उन्हें खिचड़ी का कटोरा नहीं मिला और वह बुढ़िया भूखी रह गई. वह बहुत परेशान हुई और बार-बार कहने लगी की मेरी खिचड़ी कहां गई.
उसके मन में बस एक ही बात लहरा रही थी कहां गई मेरी खिचड़ी कहां गई. जिस जगह पड़ोसन महिला ने खिचड़ी फेंकी थी, वहां पर कुछ समय के बाद एक पौधा उग गया था और उसमे से दो प्यारे से फूल खिलें थे. तभी एक बार उस नगर का राजा वहां से गुजर रहा था, उसने वहां दो प्यारे से फूल देख लिए. राजा ने उन्हें तोड़कर अपनी रानी को दे दिया. रानी ने जैसे ही उन फूलों को सूंघा तो वह गर्भवती हो गई और उसने दो सुंदर पुत्रों को जन्म दिया.
राजा-रानी के दोनों पुत्र बड़े तो हो गए लेकिन वह किसी से भी कुछ नहीं बोलते थे. दोनों राजकुमार हिरण के शिकार पर जाते थे, उन्हें बस वही बूढ़ी औरत दिखती थी, जो अभी भी यही कहती थी कहां गई मेरी खिचड़ी और कहां गया मेरा कटोरा. एक दिन दोनों राजकुमार बुजुर्ग महिला के पास गए और वह दोनों उन्हें कहते हैं कि हम है तेरी खिचड़ी और हम है तेरा कटोरा. इसके बाद रोज यही होता था, एक दिन यह बात उस नगर के राजा के कानों में पड़ी तो राजा को आश्चर्य हुआ कि जब यह दोनों किसी से नहीं बोलते तो उस बुढ़िया से कैसे बात कर लेते हैं.
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तभी राजा ने उस बुढ़िया को अपने महल में बुलाया और उससे पूछा कि यह दोनों जब किसी से बात नहीं करते तो तुमसे आखिर कैसे कर लेते हैं? तो प्रतिउत्तर में बुढ़िया ने उनसे कहा मैं तो बस इतना जानती हूं कि मैं हमेशा की तरह कार्तिक मास में गंगा स्नान करने जाती थी और कृष्ण भगवान खुद मेरे लिए खिचड़ी से भरा हुआ कटोरा रखे थे.
एक दिन जब वह वापस लौटी तो उसे कटोरा नहीं मिला और तबसे बस मैं यही कह रही हो कहां गया मेरा कटोरा और कहां गई मेरी खिचड़ी ली और जब यह दोनों मुझसे मिले तो इन दोनों ने मुझे पूरी बात बताई कि उस दिन मेरी पड़ोसन ने खिचड़ी को फेंक दिया था और वहां पर एक सुंदर पौधा निकला था, जिसमें से दो सुंदर फूल निकले थे. जो बाद में राजा ने जाकर रानी को दिए और वही दो सुंदर फूल आपकी खिचड़ी और आपका कटोरा है. तब राजा को पूरी बात समझ आ चुकी थी और फिर उसने उस बूढ़ी औरत को महल में ही रहने को कहा और उसका पूरा ध्यान रखने का आदेश दिया.
कार्तिक मास की कथा पढ़ने से क्या मिलता है?
- हिंदू धर्म में कार्तिक मास की कथा पढ़ने और सुनने का विशेष धार्मिक महत्व बताया जाता है. मान्यता है कि इस पवित्र महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने के साथ कार्तिक मास की कथा का पाठ करने से भक्तों को पुण्य फल की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ इस कथा को पढ़ता या सुनता है, उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहती है.
- कार्तिक मास की बुजुर्ग महिला वाली कथा हमें सच्ची भक्ति, धैर्य और भगवान पर अटूट विश्वास रखने की सीख देती है. यह कथा बताती है कि भगवान अपने सच्चे भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं और उनकी भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती. इसके अलावा, इस कथा के माध्यम से दूसरों के प्रति ईर्ष्या और द्वेष की भावना न रखने का गूढ़ संदेश भी मिलता है.
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में नियमित रूप से कथा का पाठ करने से घर में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति के मन को शांति मिलती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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