नीति आयोग और जेआईसीए ने महत्वाकांक्षी जिलों और ब्लॉकों में सतत विकास को बढ़ाने के लिए किया समझौता
नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। भारत-जापान विकास सहयोग को मजबूत करने की दिशा में नीति आयोग और जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सोमवार को सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में जापान-भारत सहकारी कार्यों के कार्यक्रम को बढ़ावा देने की परियोजना - चरण II के लिए चर्चा अभिलेख (आरओडी) पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर नीति आयोग के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक, आकांक्षी जिला एवं ब्लॉक कार्यक्रम के रोहित कुमार और जेआईसीए भारत के मुख्य प्रतिनिधि ताकेउची ताकुरो की उपस्थिति रहे।
नीति आयोग ने बयान में कहा कि यह सहयोग भारत-जापान की मजबूत विकास साझेदारी की पुष्टि करता है और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में विशेष रूप से आकांक्षी जिलों (एडी) और आकांक्षी ब्लॉकों (एबी) में संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाता है।
रोहित कुमार ने कहा कि इस साझेदारी में संस्थागत शक्तियां, साझा ज्ञान और जमीनी अनुभव एक साथ है और इसका उद्देश्य वंचित क्षेत्रों में समावेशी विकास को गति देना है।
एडीपी और एबीपी के अंतर्गत इस परियोजना का उद्देश्य वैश्विक भागीदारी, स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास तथा बुनियादी ढांचा - इन छह विषयों में नीतिगत ढांचों और कार्यान्वयन प्रणालियों को सुदृढ़ करना है। यह परियोजना संस्थागत क्षमता निर्माण, बेहतर निगरानी एवं मूल्यांकन तथा सतत विकास लक्ष्यों के प्रभावी स्थानीयकरण पर केंद्रित है।
इस परियोजना के अंतर्गत प्रमुख गतिविधियों में लोगों के बीच आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण सम्बंधी कार्य, जापान-भारत ज्ञान मंच, सर्वोत्तम तौर-तरीकों की पहचान और प्रसार तथा आकांक्षी जिलों और आकांक्षी ब्लॉकों को लक्षित सहायता प्रदान करना शामिल है।
जेआईसीए इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि ताकेउची ताकुरो ने एडीपी और एबीपी के सफल कार्यान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि भारत की जिला और ब्लॉक-स्तरीय निगरानी प्रणालियां वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जापान-भारत साझेदारी को और मजबूत करने वाली यह परियोजना पारस्परिक रूप से लाभकारी और सहयोगात्मक पहल है।
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एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान में फंसे भारतीय छात्रों ने लगाई भारत सरकार से गुहार, सुरक्षित निकासी की मांग
इस्फहान, 2 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के शहर इस्फहान में फंसे भारतीय छात्रों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है। छात्रों ने भारत सरकार से अपील की है कि स्थिति सामान्य होने तक उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए या स्वदेश वापस लाने की व्यवस्था की जाए।
इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज की छात्रा फातिमा ने वीडियो जारी कर बताया कि वर्तमान में लगभग 25 से 30 भारतीय छात्र इस क्षेत्र में मौजूद हैं और लगातार चिंता में जी रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम सरकार से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि हालात स्थिर होने तक हमें किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए या हमारे माता-पिता के पास भारत भेजा जाए।”
फातिमा ने स्पष्ट किया कि छात्र पहले इसलिए नहीं लौट सके, क्योंकि उनकी शैक्षणिक प्रतिबद्धताएं बाधा बनीं। उन्होंने बताया, “हम नहीं रुकना चाहते थे, लेकिन कक्षाओं, परीक्षाओं, अस्पताल की शिफ्टों और शैक्षणिक दौरों के कारण यहां रुकना अपरिहार्य था।”
छात्रा के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को सूचित किया है कि अगला सेमेस्टर ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा, जिससे उन्हें ईरान में रहने या घर लौटने का विकल्प मिलेगा और वे अप्रैल में परीक्षा देने वापस आ सकते हैं, हालांकि अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए अस्पताल में प्रतिदिन ड्यूटी पर उपस्थित रहना अनिवार्य कर दिया गया है।
छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से उन्हें केवल छात्रावास में रहने और बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। उन्होंने दावा किया,“हम पर मौजूदा छात्रावास खाली कर दूसरे छात्रावास में जाने का दबाव डाला जा रहा है। दिन-रात हमसे कमरा खाली करने को कहा जा रहा है।”
फातिमा ने बताया कि कई छात्र इस समय परिसर से बाहर किराए के आवासों में रह रहे हैं और सीमित संसाधनों के सहारे गुजारा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा,“दुकानें बंद हैं, ऑनलाइन ऑर्डर संभव नहीं है और हमें बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। हम जो भी सामान हमारे पास है, उसे आपस में बांटकर काम चला रहे हैं। इंटरनेट सेवाओं में बाधा के कारण भारत में अपने परिवारों से संपर्क करना भी कठिन हो गया है।
छात्रा ने यह भी कहा कि हाल ही में उनके इलाके के पास विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि सटीक स्थान स्पष्ट नहीं है, लेकिन घटना कैंपस के करीब होने की आशंका जताई जा रही है। फातिमा ने कहा,“हम छात्रावास में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। घर पर भी सुरक्षा का एहसास नहीं है। चारों ओर दहशत और अनिश्चितता का माहौल है।”
उन्होंने बताया कि भारत में उनके परिवारजन लगातार समाचारों के माध्यम से स्थिति पर नजर रख रहे हैं और बेहद चिंतित हैं। माता-पिता हमसे भी ज्यादा डरे हुए हैं।
छात्रों ने भारतीय अधिकारियों से शीघ्र हस्तक्षेप करने और सामान्य स्थिति बहाल होने तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
--आईएएनएस
एएसएच/वीसी
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