होली में नहीं मिल रहा ट्रेन टिकट? ऐसे पहुंचें घर, रेलवे ने बताया आसान रास्ता
होली का त्योहार नजदीक है और बड़ी संख्या में लोग शहरों से अपने गांव जाने की तैयारी में जुटे हैं. लेकिन ज्यादातर ट्रेनों में रिजर्वेशन फुल होने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई लोग टिकट के लिए अलग-अलग जुगाड़ भी कर रहे हैं, फिर भी सीट नहीं मिल पा रही है. ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है.
ये है आसान रास्ता
भारतीय रेलवे के अनुसार त्योहारों के समय ज्यादातर यात्री उन्हीं ट्रेनों में टिकट बुक कराते हैं, जो सीधे उनके शहर या नजदीकी स्टेशन तक जाती हैं. यही कारण है कि ऐसी ट्रेनें पहले ही फुल हो जाती हैं. रेलवे ने सलाह दी है कि यात्री अपने गंतव्य से कुछ दूरी पर स्थित स्टेशन तक जाने वाली ट्रेनों में रिजर्वेशन कराने की कोशिश करें. वहां से वे बस या दूसरी ट्रेन के जरिए अपने गांव पहुंच सकते हैं.
18 मार्च तक स्पेशल ट्रेन की सौगात
रेलवे ने होली 2026 के लिए 1,244 स्पेशल ट्रेन ट्रिप्स चलाने की घोषणा की है. ये ट्रेनें 25 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक चलाई जा रही हैं. इनमें कई अनारक्षित और स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं, जिनमें जनरल कोच में भी यात्रा की जा सकती है.
ईस्ट सेंट्रल रेलवे चला रहा 285 स्पेशल ट्रेन
सबसे ज्यादा 285 स्पेशल ट्रेन ट्रिप्स ईस्ट सेंट्रल रेलवे की ओर से चलाई जा रही हैं. इन ट्रेनों से बिहार और झारखंड के शहरों जैसे पटना, दरभंगा, सहरसा और धनबाद से दिल्ली, आनंद विहार, चंडीगढ़ और दक्षिण भारत तक कनेक्टिविटी मिल रही है. वेस्टर्न रेलवे ने 231, सेंट्रल रेलवे ने 209 और साउथ सेंट्रल रेलवे ने 160 स्पेशल ट्रेन ट्रिप्स शुरू किए हैं.
ऐसे भी जा सकते हैं घर
नॉर्दर्न रेलवे ने 108 ट्रेनें चलाई हैं, जिनसे दिल्ली से वाराणसी, लखनऊ, बरौनी, हावड़ा, अयोध्या और सहारनपुर तक सफर किया जा सकता है. इसके अलावा नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे ने 71, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे ने 66 और नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे तथा ईस्ट कोस्ट रेलवे ने 62-62 ट्रेनें चलाई हैं. अगर सीधी ट्रेन में टिकट नहीं मिल रहा है तो वैकल्पिक रूट अपनाकर भी आप इस बार अपनों के साथ होली मना सकते हैं.
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कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 प्रतिशत निर्धारित की ब्याज दर
नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने सोमवार को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के लिए ब्याज दरों का ऐलान किया। सरकार एजेंसी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर निर्धारित की है।
यह लगातार दूसरा साल है जब ईपीएफओ ने ईपीएफ के लिए ब्याज दर को स्थिर रखा है।
ईपीएफ के लिए ब्याज दर तय करने का फैसला ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (सीबीटी) की ओर से किया जाता है।
ईपीएफओ द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दरों पर सीबीटी के फैसले को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। सरकार की मंजूरी के बाद ईपीएफओ के 7 करोड़ सब्सक्राइबर्स के खाते में ब्याज को क्रेडिट कर दिया जाएगा। इससे पहले ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 25 में भी ब्याज दरों को 8.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था।
इससे पहले के वर्षों में ब्याज दरों के कई दशकों के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इजाफा किया गया था।
वित्त वर्ष 24 में ब्याज दर को मामूली रूप से बढ़ाकर 8.25 प्रतिशत कर दिया था, जो कि वित्त वर्ष 23 में 8.15 प्रतिशत था।
वित्त वर्ष 22 और वित्त वर्ष 21 में ईपीएफओ ने ईपीएफ के लिए ब्याज दर 8.10 प्रतिशत निर्धारित की थी, जो कि करीब चार दशकों का निचला स्तर था। इससे पहले वित्त वर्ष 1978 में ब्याज दर 8 प्रतिशत थी। वहीं, ब्याज दर वित्त वर्ष 20 में 8.5 प्रतिशत थी और वित्त वर्ष 19 में 8.65 प्रतिशत थी।
ईपीएफ जमा पर ब्याज की गणना मासिक आधार पर की जाती है, लेकिन यह ग्राहकों के खातों में वित्तीय वर्ष के अंत में जमा किया जाता है।हालांकि, जो खाते 36 महीनों तक निष्क्रिय रहते हैं, उन पर कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलता क्योंकि उन्हें निष्क्रिय माना जाता है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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